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बिहार में जीविका दीदियों को मिला रोजगार, आंगनबाड़ी बच्चों के लिए तैयार कर रहीं ड्रेस

Published: Sat, 18 Apr 2026 06:07 PM (IST)

सुपौल के छातापुर प्रखंड में जीविका दीदियां आंगनबाड़ी बच्चों के लिए पोशाकें सिल रही हैं। लगभग 250 दीदियां 24,722 ड्रेस ...और पढ़ें

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संवाद सूत्र, छातापुर (सुपौल)। प्रखंड क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को दी जाने वाली पोशाक की सिलाई का कार्य जीविका दीदियों द्वारा किया जा रहा है। प्रखंड की करीब 250 जीविका दीदियां अलग-अलग पंचायतों में बैठकर बच्चों के लिए ड्रेस तैयार करने में जुटी हैं।

इससे एक ओर जहां बच्चों को समय पर पोशाक उपलब्ध कराने की तैयारी हो रही है वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर भी मिल रहा है। जानकारी के अनुसार मिथिला प्रगति सीएलएफ के अंतर्गत छातापुर पंचायत, रामपुर गरिमा सीएलएफ के अंतर्गत घिवहा, उन्नति सीएलएफ के अंतर्गत जीवछपुर तथा संस्कार सीएलएफ के अंतर्गत लक्ष्मीनिया पंचायत की जीविका दीदियां सामूहिक रूप से बैठकर कपड़ों की सिलाई कर रही हैं।

सभी समूह निर्धारित समय सीमा के भीतर ड्रेस तैयार करने में जुटे हैं। छातापुर जीविका कार्यालय के अनुसार गर्मी एवं जाड़े के लिए कुल 24,722 सेट ड्रेस तैयार कर 298 आंगनबाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराया जाना है। यह पोशाक आइसीडीएस कार्यालय छातापुर के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी।

शनिवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता ने मुख्यालय स्थित जीविका कार्यालय पहुंचकर सिलाई कार्य का जायजा लिया और जीविका दीदियों से बातचीत की।

इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद बीपीएम रामनाथ मंडल तथा क्षेत्रीय समन्वयक रवि शंकर से भी कार्य की प्रगति व ड्रेस आपूर्ति से संबंधित जानकारी ली। बीडीओ ने कहा कि जीविका समूह के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रखंड की प्रत्येक पंचायत में खाली पड़े सामुदायिक भवनों को चिन्हित कर वहां जीविका दीदियों के लिए सिलाई कार्य सहित अन्य आजीविका गतिविधियों को संचालित करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। इस पहल से एक ओर आंगनबाड़ी बच्चों को समय पर पोशाक उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

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