जीविका दीदियों की सिलाई से आत्मनिर्भरता की नई कहानी, वैशाली में 1200 महिलाओं को मिला रोजगार
वैशाली जिले में जीविका से जुड़ी महिलाएं सिलाई और सेवा कार्यों से आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिससे 1200 दीदियों को रोजगार मिला है। ...और पढ़ें

जीविका दीदियों की सिलाई से आत्मनिर्भरता की नई कहानी (AI Generated Image)

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जागरण संवाददाता, हाजीपुर। जिले में जीविका से जुड़ी महिलाओं के लिए सिलाई और सेवा कार्य आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रहा है। बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जीविका) के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके तहत जीविका दीदियां सरकारी संस्थानों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अपनी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ कर रही हैं।
जीविका दीदियां एससी-एसटी आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए स्कूल ड्रेस, दीदी की रसोई में कार्यरत महिलाओं की यूनिफॉर्म, बैग, अस्पताल के मरीजों के वस्त्र सहित विभिन्न प्रकार की सिलाई सामग्री तैयार कर आपूर्ति कर रही हैं।
जिला परियोजना प्रबंधक वंदना कुमारी ने बताया कि सिलाई कार्य से जिले की करीब 1200 जीविका दीदियों को रोजगार मिला है। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिससे महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
जिले के सभी प्रखंडों में 52 संकुल स्तरीय संघों के माध्यम से सिलाई कार्य संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए ड्रेस तैयार की जा रही है।
जिले के तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के 1,42,600 बच्चों के लिए दो-दो सेट के हिसाब से कुल 2,85,200 ड्रेस तैयार करने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है और सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में इसकी आपूर्ति भी कर दी गई है।
इसी प्रकार नौ जिलों के 15 एससी-एसटी आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत 4,545 विद्यार्थियों के लिए प्रति छात्र चार सेट के अनुसार कुल 18,180 ड्रेस का निर्माण और आपूर्ति भी जीविका दीदियों द्वारा की जा चुकी है।
20 सरकारी कार्यालयों में भी निभा रहीं जिम्मेदारी
सिलाई कार्य के अलावा वैशाली जिले के सभी प्रखंड कार्यालयों, अनुमंडल अस्पतालों, एससी-एसटी आवासीय विद्यालयों तथा एनबीपीडीसीएल सहित 20 सरकारी कार्यालयों में 86 जीविका दीदियां संकुल स्तरीय संघों के माध्यम से साफ-सफाई का कार्य भी कर रही हैं।
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जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि जीविका दीदियों का यह कार्य महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन, सामुदायिक सहभागिता और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन भविष्य में भी जीविका के माध्यम से महिलाओं को अधिक से अधिक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
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