बेतिया के GMCH में 21 माह से नहीं लगी MRI मशीन, एजेंसी ब्लैकलिस्टेड
बेतिया के जीएमसीएच में 21 माह से एमआरआई मशीन स्थापित नहीं हो पाई है। जुलाई 2024 में एक एजेंसी से करार हुआ था, जिसे बाद में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इ ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, बेतिया। जुलाई 2024 गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में एमआरआई मशीन लगाने के लिए पश्चिम बंगाल की एक एजेंसी से करार हुआ था। 120 दिनों के अंदर एजेंसी को जीएमसीएच में एमआरआई मशीन इंस्टाल कर देना था।
लेकिन, विभागीय पेंच देखिए एजेंसी से करार होने के कुछ माह बाद बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) ने कतिपय कारणों से संबंधित एजेंसी के ब्लैकलिस्टेड कर दिया। उसके बाद से जीएमसीएच का एमआरआई मशीन ठंडे बस्ते में है। जीएमसीएच प्रबंधन की ओर से पत्राचार हो रहा है और इस बीच मरीज शोषण के शिकार हो रहे हैं।
रोज आते एमआरआई के 20 मरीज
अस्पताल में एमआरआई मशीन नहीं होने के कारण प्रतिदिन इलाज कराने आने वाले औसतन 15 से 20 मरीजों को जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह जांच कराना काफी महंगा साबित हो रहा है।
मरीजों को एमआरआई कराने के लिए शहर के निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है, जहां उन्हें हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। फिलहाल एमआरआई जांच के लिए मरीजों को निजी केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे इलाज में देरी भी होती है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकारी अस्पतालों में एमआरआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं, तो मरीजों को राहत मिलेगी और समय पर इलाज भी संभव हो सकेगा। फिलहाल, बाहर जांच कराना ही उनकी मजबूरी बनी हुई है।
बाहर एमआरआई कराने में हजारों का खर्च
जिले में उन्नत जांच सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को अब भी निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। खासकर एमआरआई जांच के लिए लोगों को बाहर जाना मजबूरी बनी हुई है, जहां उन्हें भारी खर्च वहन करना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार, निजी केंद्रों पर एमआरआई जांच का खर्च समान्यतः 3,000 से 10,000 रुपये तक पहुंच जाता है। जांच के प्रकार जैसे ब्रेन, स्पाइन या पूरे शरीर की एमआरआई के आधार पर यह शुल्क और भी अधिक हो सकता है।
कई मामलों में कॉन्ट्रास्ट एमआरआई कराने पर अतिरिक्त 2,000 से 5,000 रुपये तक देना पड़ता है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह खर्च काफी बोझिल साबित होता है। ऐसे मरीजों को जांच के लिए शहरों या बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे यात्रा और ठहरने का खर्च अलग से बढ़ जाता है।
मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। एमआरआई जैसी उन्नत जांच की सुविधा अभी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है।
डॉ. अनिल कुमार ,अधीक्षक, जीएमसीएच, बेतिया।