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नदियों में पानी का अपर और डाउन स्ट्रीम डिस्चार्ज क्या होता है? बाढ़ के समय क्यों सुनने को मिलते हैं ये दो शब्द

By Vinod Rao Edited By: Ajit kumar
Published: Sat, 05 Sep 2026 04:44 PM (IST)Updated: Sat, 05 Sep 2026 07:15 PM (IST)

Upstream And Downstream Discharge: मानसून में नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ 'अपर स्ट्रीम' और 'डाउन स्ट्रीम' डिस्चार्ज की चर्चा बढ़ जाती है। ये शब्द बाढ़ नियंत्रण की रीढ़ हैं।

बराज के ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए अभियंताओं को इन तकनीकों का प्रयोग करना होता है।

बराज के ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए अभियंताओं को इन तकनीकों का प्रयोग करना होता है।

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

विनोद राव, बगहा (पश्चिम चंपारण)। Upstream And Downstream Discharge: मानसून (Monsoon 2026,) के दस्तक देते ही नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और उत्तर बिहार में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगता है।

इस दौरान अखबारों और प्रशासनिक बुलेटिनों में अपर स्ट्रीम (Upstream Discharge) और डाउन स्ट्रीम (Downstream Discharge) डिस्चार्ज शब्द सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहते हैं।

जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के कनीय अभियंता अनुराग गिरी के अनुसार यह केवल तकनीकी शब्द नहीं हैं, बल्कि बाढ़ नियंत्रण की रीढ़ हैं।

अपर स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम डिस्चार्ज का वास्तविक अर्थ क्या है?

बांध या बराज से ठीक ऊपर यानी जहां से नदी बहकर आ रही है, उस आवक को 'अपर स्ट्रीम' कहते हैं। जब बराज के फाटकों को खोलकर निचली दिशा में पानी छोड़ा जाता है तो उसे 'डाउन स्ट्रीम डिस्चार्ज' कहा जाता है। इसे सामान्यतः क्यूसेक (क्यूबिक फीट प्रति सेकंड) में मापते हैं।

UP stream and Down stream discharge

मानसून सीजन में अचानक इसकी चर्चा तेज क्यों हो जाती है?

नेपाल की पहाड़ियों में भारी बारिश होते ही वाल्मीकिनगर या वीरपुर बराज के अपस्ट्रीम में भारी दबाव बन जाता है।

बराज के ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए अभियंताओं को डाउन स्ट्रीम में लाखों क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ता है। यह अतिरिक्त डिस्चार्ज ही पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर और दरभंगा समेत पूरे मैदानी क्षेत्र में बाढ़ और कटाव लाता है।

क्या यह शब्दावली केवल बिहार और नेपाल के संदर्भ में ही लागू होती है?

कनीय अभियंता स्पष्ट करते हैं कि यह किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक जल विज्ञान की मानक शब्दावली है। अमेरिका की मिसिसिपी हो या अफ्रीका की नील नदी, हर जगह जल नियंत्रण के लिए यही मानक प्रयुक्त होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय जल समझौतों में भी 'अपर रिपेरियन' और 'डाउन रिपेरियन' देशों के अधिकार इसी आधार पर तय होते हैं।

what is upstream and downstream discharge gandak barrage explainer

वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज का कंट्रोल रूम। फोटो: जागरण 

आम नागरिकों और प्रशासन के लिए इसको समझना क्यों जरूरी है?

अपस्ट्रीम में पानी की मात्रा देखकर ही निचले इलाके के प्रशासन को अलर्ट जारी करने का जरूरी 'लीड टाइम' मिलता है। इससे तटबंधों पर पड़ने वाले दबाव का सटीक आकलन कर कमजोर बिंदुओं पर समय रहते बोल्डर या बालू की बोरियां लगाई जाती हैं।

वहीं जरूरत से कम डिस्चार्ज छोड़ने पर नदी का निचला हिस्सा सूखने और जलीय जीवों के मरने का खतरा रहता है।

गंडक बराज में पानी के इस विशाल प्रवाह को कैसे मापा जाता है?

वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज (Gandak Barrage) में कुल 36 फाटकों की ओपनिंग ऊंचाई और दोनों तरफ के जलस्तर के अंतर से गणितीय गणना की जाती है।

इसके साथ ही बराज के पियर्स पर ऑटोमैटिक वाटर लेवल रिकॉर्डर (AWLR) सेंसर लगाए गए हैं जो हर मिनट का डेटा दर्ज करते हैं।

बराज पर स्काडा (SCADA) आधारित टेलीमेट्री सिस्टम भी लागू है, जिससे वास्तविक डिस्चार्ज का लाइव डेटा सीधे पटना मुख्यालय तक पहुंचता है।

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