8th Pay Commission: देहरादून से दिल्ली तक, मीटिंग पर मीटिंग कर रहा आयोग; जल्द बढ़ेगी सैलरी-पेंशन? अंदर की कहानी!
8th Pay Commission Delhi Meeting: आठवें वेतन आयोग की देहरादून और दिल्ली में बैठकें शुरू हो गई हैं, जिसमें कर्मचारियों की सैलरी, छुट्टियों और रिटायरमें ...और पढ़ें
HighLights
आयोग की देहरादून में पहली बैठक सकारात्मक रही, वन-टू-वन चर्चा हुई।
न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 और फिटमेंट फैक्टर 3.833 की मांग।
छुट्टियों और रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने पर भी आयोग में चर्चा हुई।
नई दिल्ली| देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब कागजों से निकलकर जमीन पर आ गया है। आयोग ने विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ आमने-सामने की बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। इसकी पहली औपचारिक शुरुआत 24 अप्रैल 2026 को देवभूमि देहरादून से हुई। इस बैठक में कर्मचारियों की सैलरी, छुट्टियों और रिटायरमेंट की उम्र जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। वहीं दूसरी मीटिंग आज यानी 28 अप्रैल से दिल्ली में शुरू हो चुकी है, जो 30 अप्रैल तक चलेगी। जिसमें नेशनल काउंसिल (NC-JCM) समेत तमाम संगठन शामिल होंगे और अपनी बात रखेंगे।
इस पूरी हलचल और भविष्य की तस्वीर को समझने के लिए जागरण बिजनेस ने बात की ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल (Dr Manjeet Patel) से, जिन्होंने आयोग के मीटिंग की अंदर की पूरी कहानी बताई। 10 सवालों में पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:
सवाल 1: आठवें वेतन आयोग की पहली बैठक में क्या हुआ और इसका माहौल कैसा था?
डॉ. मंजीत पटेल: देखिए, 24 अप्रैल को देहरादून में हुई यह बैठक बेहद सकारात्मक रही। आयोग ने करीब 20 से 30 संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया था। सबसे अच्छी बात यह रही कि आयोग ने वन-टू-वन चर्चा की। यानी हर संगठन के प्रतिनिधियों के लिए अलग चेंबर थे, जहां उन्होंने अपनी बात विस्तार से रखी। आयोग का रवैया बहुत शानदार था, वे कर्मचारियों के सुझावों को गंभीरता से सुन रहे हैं।
सवाल 2: बैठक में संगठनों ने किन प्रमुख मांगों पर सबसे ज्यादा जोर दिया?
डॉ. मंजीत पटेल: हमने आयोग के सामने कई कॉमन एजेंडे रखे हैं। हमारी सबसे पहली प्राथमिकता 'फैमिली यूनिट को बदलना है। अभी तक सैलरी की गणना 3 सदस्यों वाली फैमिली यूनिट पर होती है, जिसे हमने बढ़ाकर 5 करने की मांग की है। इसके अलावा, सोशल ऑब्लिगेशन लीव (सामाजिक दायित्व छुट्टी) और पैरेंट केयर लीव जैसी नई श्रेणियों की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
खबरें और भी
सवाल 3: कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी (Minimum Basic Salary) कितनी होनी चाहिए?
डॉ. मंजीत पटेल: हमने मांग की है कि 8वें वेतन आयोग में लेवल-1 के कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक सैलरी कम से कम 69,000 रुपए (minimum basic salary 69000) होनी चाहिए। अगर आयोग हमारी फैमिली यूनिट (3 से बढ़ाकर 5 सदस्य) वाली बात मान लेता है, तो फिटमेंट फैक्टर अपने आप बढ़ जाएगा और वेतन में सम्मानजनक वृद्धि होगी।
सवाल 4: फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर आयोग का क्या रुख है?
डॉ. मंजीत पटेल: फिटमेंट फैक्टर देना या न देना आयोग का काम है, लेकिन हमने अपना सुझाव दे दिया है। जेसीएम (JCM) ने पहले ही 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की बात कही है। हमने उसे अपना समर्थन दिया है। हमारा मानना है कि अगर कैलकुलेशन सही तरीके से की जाए, तो यह 2.62 से लेकर 3.833 के बीच कहीं भी फिट हो सकता है, जिससे सैलरी में बड़ा उछाल आएगा।
सवाल 5: छुट्टियों के नियमों में क्या बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं?
डॉ. मंजीत पटेल: हमने 90 दिनों की विशेष छुट्टियों की मांग की है। इसमें 45 दिन सोशल ऑब्लिगेशन लीव और 45 दिन फैमिली केयर लीव शामिल हैं। इसके साथ ही, पूरे देश के कर्मचारियों के लिए साल में 14 सीएल (Casual Leave), 30 ईएल (Earned Leave) और 20 दिन की मेडिकल लीव की यूनिफॉर्म व्यवस्था होनी चाहिए। हमने यह भी कहा है कि एक हफ्ते तक की मेडिकल लीव के लिए सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म हो।
सवाल 6: क्या रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 साल करने की भी कोई योजना है?
डॉ. मंजीत पटेल: जी बिल्कुल। हमने विशेष रूप से टीचिंग कैटेगरी के लिए यह मांग रखी है। अभी यूजीसी के प्रोफेसरों और डॉक्टर्स की रिटायरमेंट उम्र 65 साल (retirement age 65 years) है। चूंकि टीचिंग भी एक हाई-स्किल्ड और प्रतिष्ठित पेशा है, इसलिए शिक्षकों की रिटायरमेंट उम्र भी 60 से बढ़ाकर 65 साल की जानी चाहिए।
सवाल 7: डिजिटल सपोर्ट अलाउंस और अकोमोडेशन सेटलमेंट अलाउंस क्या हैं?
डॉ. मंजीत पटेल: आज के दौर में बिना इंटरनेट और एआई (AI) के काम करना नामुमकिन है। इसलिए हमने हर कर्मचारी के लिए 2000 से 5000 रुपए महीने के डिजिटल सपोर्ट अलाउंस की मांग की है। वहीं, जब कोई नया कर्मचारी नौकरी जॉइन करता है, तो उसे शहर में बसने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए हमने कम से कम 2 लाख रुपए के एडवांस्ड अकोमोडेशन सेटलमेंट अलाउंस का प्रस्ताव दिया है।
सवाल 8: ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (GIS) में आप किस तरह के बड़े बदलाव चाहते हैं?
डॉ. मंजीत पटेल: मौजूदा जीआईएस (GIS) व्यवस्था बहुत पुरानी और अपर्याप्त है। अभी किसी कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार को महज 30 हजार से 1.20 लाख रुपए मिलते हैं, जो ऊंट के मुंह में जीरा है। हमने मांग की है कि इस बीमा राशि को बढ़ाकर कम से कम 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपए के बीच किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारी का परिवार सुरक्षित महसूस कर सके।
सवाल 9: पेंशनभोगियों के लिए सीजीएचएस (CGHS) सुविधा को लेकर क्या चर्चा हुई?
डॉ. मंजीत पटेल: यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है। हमने मांग की है कि रिटायरमेंट के बाद हर शिक्षक और कर्मचारी को देश के किसी भी कोने में CGHS (Central Government Health Scheme) का विकल्प चुनने की आजादी मिले। इससे महानगरों (जैसे दिल्ली-मुंबई) पर बोझ कम होगा और कर्मचारी अपने होमटाउन जाकर सम्मान के साथ इलाज करा सकेंगे। जहाँ सुविधा नहीं है, वहां 20,000 रुपए महीने का फिक्स मेडिकल अलाउंस मिलना चाहिए।
यह भी पढ़ें- 8th Pay Commission: ₹72000 बेसिक, 400 दिन लीव इनकैशमेंट और पुरानी पेंशन की वापसी; वेतन-भत्तों में बड़े बदलाव की मांग
सवाल 10: आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट कब तक आने की उम्मीद है?
डॉ. मंजीत पटेल: आयोग अब पूरी तरह से ट्रैक पर है। दिल्ली, पुणे और अन्य शहरों में बैठकों का शेड्यूल जारी हो चुका है। मेरी सभी कर्मचारियों से अपील है कि वे आयोग की वेबसाइट पर जाकर डिजिटल माध्यम से अपने सुझाव और इनपुट ज्यादा से ज्यादा संख्या में सबमिट करें। जिस रफ्तार से अभी काम चल रहा है, मुझे उम्मीद है कि अगले 6 से 7 महीनों में आयोग अपनी रिपोर्ट कंपाइल कर लेगा।
डॉ. मंजीत पटेल की बातों से स्पष्ट है कि आठवां वेतन आयोग केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों की जीवनशैली, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक सम्मान को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। 30 अप्रैल को होने वाली अगली बड़ी बैठक में डॉ. पटेल स्वयं आयोग के सामने इन मुद्दों को मजबूती से रखेंगे।