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    8th Pay Commission: गोल्ड के भाव से तय होगी सैलरी? DA-HRA, एरियर और पेंशन पर बड़ा खुलासा; 10 सवालों में समझें

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 03:17 PM (IST)

    8th Pay Commission Latest Update: आठवें वेतन आयोग की प्रगति, प्रमुख मांगों और केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अपेक्षित परिणामों पर चर्चा की गई है। डॉ. मंज ...और पढ़ें

    आठवें वेतन आयोग: सैलरी, डीए, एचआरए, एरियर और पेंशन पर अहम खुलासे

    आठवें वेतन आयोग: सैलरी, डीए, एचआरए, एरियर और पेंशन पर अहम खुलासे

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    नई दिल्ली| 15 जनवरी 2025, ये वो तारीख है जब पहली बार आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन का आधिकारिक ऐलान हुआ और देश के 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के चेहरे खिल उठे थे। जिसके 9 महीने बाद अक्टूबर 2025 में आधिकारिक गजट जारी हुआ और 3 नवंबर 2025 को आयोग ने टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) भी जारी कर दिए। तब से अब तक आयोग को गठित हुए 17 महीने बीत चुके हैं और टर्म ऑफ रेफरेंस जारी हुए भी करीब 8 महीने बीत चुके हैं।

    अच्छी बात यह है कि आठवां वेतन आयोग बेहद तेजी से काम कर रहा है। वह शहर-शहर घूमकर मीटिंग कर रहा है और विभिन्न कर्मचारी संगठनों की मांगों को सीधे सुन रहा है। लेकिन, इंतज़ार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

    आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, और हर कर्मचारी बेसब्री से यह जानना चाहता है कि आखिर बढ़ी हुई सैलरी कब से मिलेगी? एरियर कब से मिलेगा? ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) का क्या होगा? भत्तों (HRA) और महंगाई भत्ते (DA) में कितनी बढ़ोतरी होगी? इन्हीं सब मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए हमने ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल से बातचीत की। जिसमें उन्होंने पूरी स्थिति स्पष्ट की।

    सवाल 1: आठवें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ा एजेंडा क्या है और कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर का क्या महत्व है?

    जवाब: किसी भी वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ा और प्राथमिक टास्क देश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन का रिवीजन करना होता है। इस पूरे संसोधन का मुख्य केंद्र फिटमेंट फैक्टर ही है। कर्मचारी चाहे किसी भी रैंक का हो, वह सबसे पहले फिटमेंट फैक्टर की ही बात करेगा, क्योंकि इसी के आधार पर यह तय होता है कि मूल वेतन में कितने गुना या कितने प्रतिशत का इजाफा होगा। आज के आधुनिक जमाने और बढ़ती महंगाई को देखते हुए, विभिन्न संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को लेकर अपनी-अपनी वैज्ञानिक दलीलें आयोग के सामने पेश की हैं ताकि कर्मचारियों का वेतन आज की वास्तविक जरूरतों के अनुकूल हो सके।

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    सवाल 2: क्या आठवें वेतन आयोग में सैलरी स्ट्रक्चर तय करने के लिए सोने की कीमतों को भी आधार बनाया जा रहा है?

    जवाब: आठवें वेतन आयोग के सामने अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें रखने के लिए गहन रिसर्च का सहारा लिया है। कुछ संगठनों ने बाकायदा सोने की कीमतों (Gold Price Hike) से तुलना करते हुए अपनी दलीलें दी हैं। साल 2016 में जब सातवां वेतन आयोग लागू हुआ था और न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपए तय की गई थी, तब 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 28 से 30 हजार रुपए थी। आज सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, इसलिए लोग उससे भी अपनी परचेजिंग पावर को कम्पेयर कर रहे हैं।

    हालांकि, डॉ. पटेल ने साफ किया कि उनके संगठन ने गोल्ड की कीमतों को आधार नहीं बनाया है, क्योंकि सोने के भाव रोज घटते-बढ़ते हैं, जबकि सरकारी कर्मचारी की सैलरी रोज नहीं बदल सकती। वेतन के लिए हमारे पास महंगाई भत्ता (DA) होता है जो हर 6 महीने में बढ़ता है।

    सवाल 3: न्यूनतम सैलरी निर्धारण के लिए आपके संगठन ने फैमिली यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 करने की मांग क्यों की है?

    जवाब: इसके पीछे एक बेहद संवेदनशील और व्यावहारिक तर्क दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ने इससे पहले जो सैलरी स्ट्रक्चर बनाया था, उसमें केवल तीन लोगों की फैमिली यूनिट को ही ध्यान में रखा गया था (एक कर्मचारी, पत्नी/पति और आधी-आधी यूनिट के दो बच्चे)। हमने आयोग के सामने मजबूती से यह सवाल उठाया कि इस व्यवस्था में हमारे बुजुर्ग माता-पिता को क्यों छोड़ दिया गया? माता-पिता भारतीय परिवार की सबसे बड़ी जरूरत हैं। इसलिए हमने मांग की है कि फैमिली यूनिट को तीन से बढ़ाकर सीधे पांच किया जाए और इसी पांच यूनिट के खर्च को आधार मानकर कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी तय की जानी चाहिए।

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    सवाल 4: सालाना इंक्रीमेंट और डीए (DA Hike) को लेकर क्या नया फॉर्मूला सुझाया गया है, जिससे 10 साल में कर्मचारियों की सैलरी दोगुनी हो सके?

    जवाब: हमने आयोग को एक दीर्घकालिक फॉर्मूला दिया है। हमने दलील दी है कि एक साल के भीतर महंगाई भत्ता (DA) और सालाना वेतन वृद्धि (Increment) मिलाकर कर्मचारी का कुल वेतन कम से कम 10 प्रतिशत जरूर बढ़ना चाहिए। वर्तमान में सालाना इंक्रीमेंट सिर्फ 3 फीसदी है और डीए साल भर में मुश्किल से 4 फीसदी तक बढ़ पाता है। आने वाले समय में डीए घटकर 2 फीसदी से भी नीचे आ जाएगा। ऐसी स्थिति में हमने मांग की है कि सालाना इंक्रीमेंट को कम से कम 6 से 7 फीसदी किया जाए, ताकि डीए और इंक्रीमेंट मिलकर हर साल 10% की ग्रोथ दें, जिससे 10 साल बाद सैलरी स्वतः दोगुनी हो जाए।

    सवाल 5: आठवें वेतन आयोग के गठन से लेकर अब तक की वास्तविक टाइमलाइन क्या है, और इसकी अंतिम रिपोर्ट कब तक आने की उम्मीद है?

    जवाब: 15 जनवरी 2025 को आधिकारिक घोषणा के बाद 28 अक्टूबर 2025 को इसका गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ। 20 जनवरी 2026 को आयोग को दफ्तर मिला और 25 फरवरी को 18 सवालों की प्रश्नावली आई। आयोग ने अपनी पहली बैठक 24 अप्रैल 2026 को देहरादून में की, जिसके बाद दिल्ली, लखनऊ, श्रीनगर, पुणे, हैदराबाद और लेह जैसे 6-7 शहरों में बैठकें की जा चुकी हैं। डॉ. पटेल ने बताया कि आयोग अब तक 100 से अधिक कर्मचारी एसोसिएशनों से मिल चुका है। वर्तमान में भुवनेश्वर और कोलकाता का शेड्यूल जारी है। उम्मीद है कि अगस्त 2026 तक बैठकों का दौर खत्म हो जाएगा और अगस्त से दिसंबर 2026 के बीच आयोग अंतिम रिपोर्ट तैयार कर लेगा।

    सवाल 6: पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर सरकार के ताजा फैसले का क्या असर है, और क्या वेतन आयोग से ओपीएस की पूर्ण बहाली संभव है?

    जवाब: हाल ही में सरकार ने 1 जनवरी 2004 से पहले जिन कर्मचारियों की मृत्यु हो गई थी और उनके आश्रितों को अनुकंपा पर नौकरी मिली थी, उन्हें ओपीएस के दायरे में शामिल करने का फैसला लिया है। लेकिन सेंट्रल ऑटोनॉमस बॉडीज (जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालय और अस्पताल) में एनपीएस के कई सुधार और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) अभी तक ठीक से लागू नहीं हो सकी है। आठवें वेतन आयोग द्वारा ओपीएस बहाली पर डॉ. पटेल ने पूरा भरोसा जताया कि भले ही यह सीधे OPS के नाम से न आए, लेकिन किसी हाइब्रिड मॉडल या अन्य रूप में कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम के 99% लाभ मिलने की पूरी संभावना है।

    सवाल 7: बड़े और मेट्रो शहरों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए एचआरए (HRA) को बढ़ाने की क्या मांग है, और टैक्स का इस पर क्या असर पड़ता है?

    जवाब: दिल्ली-एनसीआर जैसे X कैटेगरी के शहरों में एक सामान्य 2-BHK फ्लैट का किराया 15-18 हजार रुपए है, जबकि 18,000 की बेसिक सैलरी वाले को सिर्फ 5,400 रुपए एचआरए मिलता है। हमने मांग रखी है कि मेट्रो शहरों (X कैटेगरी) में एचआरए को बढ़ाकर न्यूनतम 36% से 40% के स्तर पर लाया जाए, वहीं Y कैटेगरी के लिए 24% और Z कैटेगरी के लिए 12% एचआरए तय हो। टैक्स के सवाल पर उन्होंने साफ किया कि यदि कोई कर्मचारी सरकारी क्वार्टर लेता है, तो उसे एचआरए नहीं मिलता। टैक्स हमेशा ग्रॉस इनकम पर लगता है।

    सवाल 8: महंगाई भत्ता (DA) वर्तमान में 60% के पार पहुंच रहा है, तो क्या इसे बेसिक सैलरी में मर्ज (DA Merger) करने की कोई उम्मीद है?

    जवाब: कर्मचारी संगठन लंबे समय से मांग कर रहे थे कि डीए 50% के पार होते ही उसे तत्काल बेसिक सैलरी में मर्ज कर दिया जाए। वर्तमान में डीए 58-60% चल रहा है। हालांकि, डॉ. पटेल ने स्पष्ट किया कि चूंकि इस समय आठवां वेतन आयोग सक्रिय रूप से काम कर रहा है और पूरी सैलरी संरचना नए सिरे से बना रहा है, इसलिए बीच में ही डीए को बेसिक में मर्ज किए जाने की प्रशासनिक संभावना बहुत कम है। अब सारा फोकस सीधे पे कमीशन की रिपोर्ट और फिटमेंट फैक्टर पर है।

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    सवाल 9: देश भर के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के तहत बढ़ी हुई सैलरी कब से मिलेगी, और 1 जनवरी 2026 से एरियर (Arrears) मिलने की क्या गारंटी है?

    जवाब: बढ़ी हुई सैलरी की तारीख तय करना सरकार का काम है, लेकिन भारत में होने वाले चुनावों का दबाव सरकार मानती है। डॉ. पटेल ने विश्वास जताया कि अप्रैल 2027 तक हर हाल में आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें पूरी तरह लागू हो जाएंगी। चूंकि आठवें वेतन आयोग की देयता (Due Date) 1 जनवरी 2026 से प्रभावी है, इसलिए सरकार को हर हालत में 1 जनवरी 2026 से ही पूरा एरियर देना होगा। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को इस पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

    सवाल 10: आपने कौन से 5 बड़े सुझाव आयोग के सामने प्रमुखता से रखे हैं?

    जवाब: डॉ. पटेल ने अपनी 5 मांगों को विस्तार से समझाया।

    1. शिक्षकों के प्रमोशन की नीति: दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेशों में शिक्षकों के प्रमोशन न के बराबर हैं। हमने मांग की है कि प्रत्येक 50 शिक्षकों पर कम से कम 3 वाइस प्रिंसिपल रखे जाएं।
    2. इंटर-ट्रांसफर पॉलिसी: ऑटोनॉमस सेक्टर्स और यूनियन टेरिटरीज के बीच पारस्परिक (Mutual) और पति-पत्नी (Spouse) के आधार पर ट्रांसफर की सुविधा शुरू हो।
    3. समान रिटायरमेंट उम्र: जब विश्वविद्यालयों में रिटायरमेंट की उम्र 65 साल है, तो बाकी शिक्षकों के साथ भेदभाव क्यों? या तो सबकी 60 साल हो या 65 साल।
    4. ओपीएस का विकल्प: जिनकी नौकरी 25 साल से ऊपर हो गई है, उन्हें अपना एनपीएस कॉर्पस सौंपकर ओपीएस चुनने का विकल्प दिया जाए।
    5. फैमिली यूनिट और फिटमेंट फैक्टर: 5 फैमिली यूनिट को मानकर फिटमेंट फैक्टर और एचआरए को पूरी तरह न्यायसंगत तरीके से लागू किया जाए।