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    Israel Iran War News: युद्ध से अंबानी की Reliance को भारी नुकसान? 100 डॉलर के पार हुआ क्रूड तो OMC की बढ़ेंगी मुश्किलें

    Updated: Sat, 28 Feb 2026 09:21 PM (IST)

    अमेरिका-ईरान तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। यदि टकराव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे भारत का आयात बिल, चालू खाता ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ेगा।

    2. होरमुज स्ट्रेट में बाधा से ब्रेंट क्रूड 5-15% महंगा होगा।

    3. ओएमसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज पर मिश्रित प्रभाव पड़ सकता है।

    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे पहला और सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर दिखाई देगा। इससे भारत जैसे बड़े आयातक देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    होरमुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा जोखिम

    ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और तेल उत्पादक देशों पर हमले की खबरें कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को और बढ़ा सकती हैं। होरमुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है, जहां से लगभग 20% वैश्विक पेट्रोलियम और 20% LNG गुजरता है। भारत के लिए यह और भी अहम है, क्योंकि FY2025 में देश के करीब 50% कच्चे तेल और 54% LNG आयात इसी रास्ते से हुए।

    अगर इस रास्ते पर शिपिंग बाधित होती है या तनाव बढ़ता है, तो सप्लाई रिस्क प्रीमियम बढ़ेगा, शिपिंग और इंश्योरेंस लागत में उछाल आएगा और Brent crude 5-15% तक तेजी से चढ़ सकता है। हाल के दिनों में कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 72–73 डॉलर तक पहुंच चुकी हैं।

    तेल महंगा होने से भारत पर क्या होगा असर?

    • आयात बिल में बढ़ोतरी
    • करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव
    • महंगाई बढ़ने का खतरा

    यदि कच्चा तेल 90-100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाता है, तो बाजार में 3-5% तक तेज वोलैटिलिटी संभव है। विदेशी निवेशक (FII) बिकवाली बढ़ा सकते हैं, जिससे निफ्टी पर दबाव बन सकता है।

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    OMC कंपनियों पर दबाव बढ़ने की आशंका

    ICRA के अनुसार, लंबे समय तक ऊंची कीमतें इन कंपनियों की लाभप्रदता को कमजोर कर सकती हैं। IOCL, भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) के मार्जिन पर असर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से इन कंपनियों की लागत बढ़ेगी। यदि खुदरा ईंधन कीमतों में पूरी बढ़ोतरी पास-ऑन नहीं की गई, तो मार्केटिंग मार्जिन घट सकते हैं।

    एविएशन, पेंट और केमिकल सेक्टर भी बढ़ती लागत से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि IT और फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर में निवेश शिफ्ट होने की संभावना है।

    क्या Reliance Industries को होगा नुकसान?

    मार्केट एक्सपर्ट अभिषेक भट्ट के मुताबिक मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए तस्वीर थोड़ी मिश्रित है। अगर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के साथ ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) मजबूत रहता है, तो रिफाइनिंग बिजनेस को फायदा हो सकता है। लेकिन अगर भू-राजनीतिक तनाव से वैश्विक मांग घटती है या क्रैक स्प्रेड कम होते हैं, तो मार्जिन पर दबाव आ सकता है। पेट्रोकेमिकल सेगमेंट में इनपुट कॉस्ट बढ़ने से प्रॉफिटेबिलिटी प्रभावित हो सकती है।

    हालांकि, रिलायंस के रिटेल में क्लासिफिकेशन और Jio जैसे बिजनेस अल्पकालिक झटकों को कुछ हद तक संतुलित कर सकते हैं। लेकिन कम समय में शेयर में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है। रिलायंस शेयर प्राइस अभी NSE पर 1,394 रुपये पर है।

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    (डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी निवेश की राय नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)