ये हैं दिलवाले अरबपति पति-पत्नी! इस देश के लोगों को बांट रहे ₹53-53 हजार; बदल रही गरीबों की जिंदगी
कैनवा के सह-संस्थापकों मेलानी पर्किन्स और क्लिफ ओब्रेक्ट ने मलावी में गरीब परिवारों के लिए $150 मिलियन की बिना शर्त नकद सहायता परियोजना शुरू की है। यह ...और पढ़ें

मलावी में लोगों को दिया जा रहा कैश
HighLights
कैनवा संस्थापकों ने मलावी में $150 मिलियन की सहायता दी
बिना शर्त नकद हस्तांतरण से गरीबी में कमी आई
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला, जीवन स्तर सुधरा
नई दिल्ली। अफ्रीकी देश मलावी में हजारों गरीब परिवारों के लिए करीब 550 डॉलर (करीब 53112 रुपये) की लम्पसम आर्थिक सहायता नई जिंदगी की शुरुआत साबित हो रही है। इस पहल के पीछे Canva के को-फाउंडर और अरबपति दंपति मेलानी पर्किन्स और क्लिफ ओब्रेक्ट हैं, जिन्होंने इस परियोजना के लिए कुल 150 मिलियन डॉलर खर्च करने का संकल्प लिया। यह किसी कम इनकम वाले देश में चलाया जा रहा दुनिया का सबसे बड़ा बिना शर्त (Unconditional) कैश ट्रांसफर प्रोग्राम माना जा रहा है।
कैसे भेजे जा रहे पैसे?
यह कार्यक्रम Canva Foundation और एनजीओ GiveDirectly की साझेदारी में ऑपरेट किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि लाभार्थियों को सीधे उनके मोबाइल फोन पर पैसे भेजे जाते हैं और उन पर कोई शर्त लागू नहीं होती।
परिवार अपनी जरूरत के अनुसार यह तय करते हैं कि पैसे का उपयोग भोजन, खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य या छोटा कारोबार शुरू करने में करना है। मेलानी पर्किन्स और क्लिफ ओब्रेक्ट का मानना है कि लोगों पर भरोसा करके उन्हें सीधे नकद सहायता देना पारंपरिक राहत योजनाओं की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
कमाई का 30 फीसदी हिस्सा सामाजिक कार्यों पर खर्च
Canva फाउंडर्स के अनुसार, कंपनी की शुरुआत से ही उनका लक्ष्य केवल एक सफल वैश्विक कंपनी बनाना नहीं था, बल्कि समाज के लिए बड़ा योगदान देना भी था। इसी सोच के तहत Canva की कुल वैल्यू का 30% से अधिक हिस्सा सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित किया गया है।
कंपनी का दावा है कि वह अब तक छात्रों, शिक्षकों और दुनिया भर के 10 लाख से अधिक गैर-लाभकारी संगठनों को अपने उत्पादों के रूप में करीब 2.5 बिलियन डॉलर का सहयोग दे चुकी है। मलावी की यह योजना भी उसी लॉन्ग टर्म सोशल आउटलुक का हिस्सा है।
5 साल पहले हुई थी शुरुआत
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2021 में 10 मिलियन डॉलर के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य यह जांचना था कि बिना किसी शर्त के नकद सहायता से अत्यधिक गरीबी कम हो सकती है या नहीं। शुरुआती नतीजे सकारात्मक मिलने पर 2021 से 2023 के बीच फंडिंग बढ़ाकर 50 मिलियन डॉलर कर दी गई।
इसके बाद अक्टूबर 2025 में दंपति ने अतिरिक्त 100 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की, जिससे कुल प्रतिबद्धता 150 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई। यह GiveDirectly के इतिहास का सबसे बड़ा दान है। अब तक 52.5 मिलियन डॉलर से अधिक राशि लाभार्थियों तक पहुंच चुकी है, जबकि बाकी रकम अगले चार वर्षों में वितरित की जाएगी।
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1.39 लाख से अधिक लोगों को मिला फायदा
अब तक इस कार्यक्रम से 1.39 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। खोंगोनी सब-डिस्ट्रिक्ट में, जहां हर वयस्क को नकद सहायता मिली, वहां सिर्फ तीन महीनों में 90% लोग अत्यधिक गरीबी की सीमा से ऊपर आ गए। GiveDirectly के मुताबिक, इस दौरान बाल मृत्यु दर में 48%, बीमारियों में 27% की कमी दर्ज की गई, जबकि स्कूलों में एनरोलमेंट 23% बढ़ा।
रिसर्चर्स का कहना है कि जब परिवारों को अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च करने की स्वतंत्रता मिलती है, तो जीवन स्तर में कई मोर्चों पर तेजी से सुधार देखने को मिलता है।
कैसे मिला लोगों को फायदा?
स्टडी में यह भी सामने आया कि इस कैश सहायता का फायदा केवल लाभार्थियों तक सीमित नहीं रहा। हर 1,000 डॉलर के ट्रांसफर से स्थानीय अर्थव्यवस्था में करीब 2,400 डॉलर की आर्थिक गतिविधि पैदा हुई, क्योंकि लोगों ने स्थानीय दुकानों से खरीदारी की, खेती में निवेश किया और छोटे व्यवसाय शुरू किए। मेलानी पर्किन्स और क्लिफ ओब्रेक्ट ने 2021 में The Giving Pledge पर हस्ताक्षर कर अपनी अधिकांश संपत्ति दान करने का संकल्प लिया था।
दोनों के पास Canva में करीब 18-18% हिस्सेदारी है, जिसकी अनुमानित कीमत 7.6 बिलियन डॉलर प्रति व्यक्ति है, और उन्होंने अपनी 80% से अधिक व्यक्तिगत संपत्ति दान करने का वादा किया है।
वहीं को-फाउंडर कैमरून एडम्स, जिनकी करीब 9% हिस्सेदारी लगभग 3.8 बिलियन डॉलर की मानी जाती है, उन्होंने भी अपनी अधिकांश संपत्ति दान करने की प्रतिबद्धता जताई है। हाल ही में Canva Foundation ने Global Goals Platform भी लॉन्च किया है, जिसके जरिए दुनिया भर के लोगों से पूछा जाएगा कि वे अपने समुदाय, देश और दुनिया में कौन-से बदलाव देखना चाहते हैं, ताकि भविष्य की परोपकारी योजनाएं उन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार की जा सकें।