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    150 करोड़ के सामान का सवाल है! 100% शुद्धता वाले दावे पर सरकारी एजेंसी से भिड़ा डाबर, FSSAI पर लगाया ये आरोप

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 01:00 PM (IST)

    डाबर इंडिया ने FSSAI पर कुछ मैन्युफैक्चरर्स का पक्ष लेने का आरोप लगाया है। कंपनी का कहना है कि '100% शुद्ध' दावे वाले प्रोडक्ट्स पर रोक से उसकी 150 कर ...और पढ़ें

    डाबर इंडिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

    डाबर इंडिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

    HighLights

    1. डाबर इंडिया ने FSSAI पर कुछ मैन्युफैक्चरर्स का पक्ष लेने का आरोप लगाया।

    2. '100% शुद्ध' दावे वाले प्रोडक्ट्स पर रोक से कंपनी नाराज।

    3. कंपनी को 150 करोड़ रुपये की इन्वेंट्री नष्ट होने का खतरा सता रहा है।

    नई दिल्ली। देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया (Dabur India) ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) पर कुछ मैन्युफैक्चरर्स का पक्ष लेने का आरोप लगाया है। कंपनी का कहना है कि रेगुलेटर द्वारा "100 प्रतिशत" का दावा करने वाले प्रोडक्ट्स पर लगाई गई रोक से उसकी 150 करोड़ रुपये की इन्वेंट्री खतरे में पड़ गई है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

    अपनी याचिका में डाबर इंडिया ने कहा कि रेगुलेटर के आदेश का मतलब यह है कि '100% शुद्ध' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से दूसरे मैन्युफैक्चरर्स के प्रोडक्ट्स की बुराई होती है। हालांकि, इस बात का कोई ठोस आधार नहीं है। कंपनी का दावा है कि '100%' शुद्ध जैसे शब्द का इस्तेमाल पूरी इंडस्ट्री में किया जा रहा है।

    दिल्ली हाईकोर्ट में डाबर की याचिका

    डाबर इंडिया ने 6 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक रिट याचिका में कहा, "यह बिल्कुल साफ़ है कि रोक लगाने वाला यह आदेश जनहित में नहीं है, और इसे दूसरे मैन्युफ़ैक्चरर्स के बिज़नेस हितों को साधने के लिए जारी किया गया है।" डाबर की इस प्रतिक्रिया पर FSSAI ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।

    डाबर इंडिया ने कोर्ट का रुख तब किया, जब फूड रेगुलेटर ने "100 प्रतिशत" का दावा करने वाले डाबर इंडिया के फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी और कंपनी से 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट जमा करने को कहा। उधर, कंपनी का दावा है कि रेगुलेटर ने बिना कोई 'शो-कॉज़' नोटिस दिए, और डाबर को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना ही कार्रवाई की।

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    डाबर ने कहा कि उसके 11 मुख्य प्रोडक्ट्स - जिनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और रियल एक्टिव कोकोनट वॉटर शामिल हैं - के खिलाफ की गई कार्रवाई से 150 करोड़ रुपये की इन्वेंट्री (स्टॉक) के नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है। कंपनी का आरोप है कि FSSAI ने बिना लेबल देखे ही मैकेनिकल तरीके से यह आदेश जारी कर दिया।