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    E20 फ्यूल के इस्तेमाल से सचमुच कम होता है माइलेज? मंत्रालय ने संंसद में कर दिया साफ! रिसर्च में मिली जानकारी

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 07:24 PM (GMT+05:30)

    E20 फ्यूल से माइलेज कम होने और गाड़ी खराब होने की चिंताओं पर सरकार ने संसद में जवाब दिया है। सरकारी एजेंसियों और ऑटोमोबाइल निर्माताओं के शोध में E20 प ...और पढ़ें

    e20 फ्यूल पर मंत्रालय का जवाब (AI Image)

    e20 फ्यूल पर मंत्रालय का जवाब (AI Image)

    HighLights

    1. E20 फ्यूल से जुड़ी चिंताओं पर सरकार ने जवाब दिया।

    2. लैब और फील्ड टेस्ट में E20 सुरक्षित पाया गया।

    3. निर्धारित उपयोग पर वाहनों को कोई नुकसान नहीं।

    नई दिल्ली| पिछले कुछ महीनों से E20 पेट्रोल को लेकर चर्चा तेज है। कई लोगों ने इस फ्यूल से अपनी गाड़ियों का माइलेज कम होने का दावा किया है। वहीं कुछ लोगों ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल डालने से गाड़ी खराब होने की भी बात कही है। इथेनॉल का मामला सड़क से संसद तक गूंज रहा है। अब केंद्र सरकार ने 7 अगस्त को संसद में E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ियों पर पड़ने वाले प्रभाव पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है।

    केंद्र सरकार ने बताया कि सरकारी एजेंसियों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं और उद्योग निकायों (Industry Bodies) द्वारा किए गए लैब टेस्टिंग और फील्ड टेस्ट ने पुष्टि की है कि ई20 पेट्रोल निर्धारित मानकों के तहत उपयोग के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

    रिसर्च में क्या पता चला?

    मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि नीति आयोग के तहत 26 दिसंबर 2020 को गठित एक अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) ने इथेनॉल मिश्रण के वाहन अनुकूलता और माइलेज के पहलुओं का व्यापक रूप से अध्ययन किया था। यह मूल्यांकन (Evaluation) इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा किए गए रिसर्च पर आधारित था। जो स्पष्ट करता है कि निर्धारित मात्रा में उपयोग करने पर वाहन को कोई नुकसान नहीं होता है।

    जांच के बाद ही पेश किया गया है E20

    E20 फ्यूल पर उठ रहे सवालों के जवाब में आगे कहा गया कि फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, चलने की कैपासिटी, सामग्री अनुकूलता और उत्सर्जन प्रदर्शन के सफल सत्यापन के बाद ही E20 को पेश किया गया था। मंत्रालय ने कहा, "इन रिसर्च से निर्धारित परिचालन स्थितियों (Specified operating conditions) के तहत पुराने वाहनों के प्रदर्शन, सस्टैनिबिलिटी या मैटेरियल पर कोई बुरा प्रभाव सामने नहीं आया है।"

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    क्या है मामला?

    केंद्र सरकार डीजल-पेट्रोल के लिए विदेशी निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना, चावल औक मक्के जैसे अनाजों का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार E20 फ्यूल के प्रयोग पर जोर दे रही है, E20 का मतलब 80 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल और 20 फीसदी इथेनॉल। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार इस फ्यूल को लेकर सवाल उठाए गए हैं, लोगों ने माइलेज कम होने और गाड़ी के पार्ट्स खराब होने की बात कही है।

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    अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कई रिसर्च और स्टडी में पता चला है कि निर्धारित मानकों के तहत अगर आप E20 फ्यूल का इस्तेमाल करते हैं तो वाहनों में किसी तरह की समस्या नहीं होगी।