खेती पर दिखने लगा अल नीनो का असर, खरीफ फसलों की बुवाई में 23% की भारी गिरावट
कमजोर मानसून के पूर्वानुमान के बीच, अल नीनो के प्रभाव से इस साल खरीफ फसलों की बुवाई में 23% की भारी कमी आई है। धान, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों के ...और पढ़ें

अलनीनो के चलते घटा बुवाई का रकबा
HighLights
खरीफ फसलों की बुवाई में 23% की कमी।
धान, दलहन, तिलहन के रकबे में भारी गिरावट।
खाद्य तेल, दालों का आयात बढ़ने की आशंका।
नई दिल्ली| इस साल देश में कमजोर मानसून का पूर्वानुमान पहले से ही लगाया जा चुका था। अब इसका असर भी देखने को मिल गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस खरीफ फसलों की बुवाई में लगभग 23 फीसदी की कमी सामने आई है। पिछले साल 25 जून तक खरीफ फसलों की बुवाई 236.46 लाख हेक्टेयर तक हो चुकी थी वहीं, इस साल सिर्फ 182.72 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है।
धान की बुवाई में भारी गिरावट
खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की बुवाई में सबसे बुरा असर देखने को मिला है। धान ऐसी फसल है जिसे बुवाई से लेकर तैयार होने तक खूब पानी की जरूरत होती है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल इस समय तक 34.41 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हो चुकी थी, इस बार 25.75 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है। जो कि 25.1% की कमी के आंकड़े को दिखाता है।
दलहन-तिलहन फसलों पर बुरा असर
अलनीनो की वजह से बारिश में कमी ने हमारी दलहन-तिलहन फसलों की बुवाई में भारी कमी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक दालों की बुवाई 30.48% घटकर 1.49 मिलियन हेक्टेयर रह गई, वहीं तिलहन फसलों की बुवाई 53.34% घटी और रकबा 1.69 मिलियन हेक्टेयर दर्ज किया गया।
सरकार की ओर से जहां दलहन-तिलहन फसलों की बुवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं सोयाबीन की फसल जो पिछले साल तक 19.97 लाख हेक्टेयर में उगाई गई थी, वो इस साल गिरकर सिर्फ 6.92 लाख हेक्टेयर पर सिमट गई। इसमें करीब 65.3% की रिकॉर्ड तोड़ कमी आई है। यही हाल मूंगफली का भी रहा, पिछले साल के 15.29 लाख हेक्टेयर से घटकर केवल 8.87 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, ये गिरावट करीब 42% तक है। ये गिरावट देश में खाद्य तेल के आयात को और अधिक बढ़ा सकता है।
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बुवाई में कमी से क्या असर होगा?
खरीफ फसलों में बुवाई में गिरावट के कारण देश के कुल पैदावार में भी कमी देखी जा सकती है। पैदावार की कमी के कारण देश में दालों और खाद्य तेलों का आयात बढ़ सकता है। हालांकि सरकार ने अलनीनो के पूर्वानुमान से पहले ही तैयारी पूरी कर ली थी, और खाद्यान्न का बफर स्टॉक मजबूत कर लिया था।