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    Ganga Expressway का शुभारंभ, खुलते ही चमकी 12 जिलों की किस्मत; मेरठ से प्रयागराज तक डिमांड ही डिमांड

    Updated: Wed, 29 Apr 2026 01:17 PM (GMT+05:30)

    गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ हो चुका है और यह उत्तर प्रदेश के लिए समृद्धि का मार्ग बनने जा रहा है, जिसमें 46,660 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. यूपी के लिए आर्थिक विकास का इंजन साबित होगा गंगा एक्सप्रेसवे

    2. 46,660 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।

    3. 12 जिलों में बनेंगे औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब।

    नई दिल्ली। गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ हो चुका है, पीएम मोदी इसे राष्ट्र को समर्पित कर चुके हैं। वैसे होने को यह एक तमाम हाईटेक सुविधाओं से लैस रोड है लेकिन इसके खुलते ही यूपी में खुशहाली के द्वार खुल गए हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को बड़े पैमाने के विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसके लिए 46,660 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पहले ही प्राप्त हो चुके हैं। 

    यह भारत के सबसे लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाइवे में से एक होगा। 6 लेन का यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जोड़ेगा, जिससे एक निर्बाध हाई-स्पीड कॉरिडोर बनेगा और यात्री व माल ढुलाई दोनों में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है। खास बात है कि एक्सप्रेसवे और इंडस्ट्रियल आधार के रूप में परिकल्पित इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में आर्थिक विकास को गति देने के लिए औद्योगिक विस्तार के साथ हायर स्पीड कनेक्टिविटी को इंटीग्रेट करना है।

    रोड से कैसे होगी कमाई?

    मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, इंडो अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के यूपी चैप्टर के अध्यक्ष मुकेश सिंह ने कहा, “इस कॉरिडोर को क्षेत्रीय समानता के साधन के रूप में भी देखा जा रहा है। हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिले, जो पारंपरिक रूप से औद्योगिक विकास में पिछड़े रहे हैं, उनमें आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।” उन्होंने कहा कि इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आय में वृद्धि होगी और स्थानीय बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।

    इस परियोजना का नेतृत्व उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण कर रहा है, जिसने एक्सप्रेसवे मार्ग पर औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर मॉडल अपनाया है। इस योजना के तहत, एक्सप्रेसवे कॉरिडोर में फैले 12 जिलों में 12 औद्योगिक केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन क्लस्टरों के लिए कुल 6,507 एकड़ भूमि पहले ही चिन्हित की जा चुकी है।

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    निवेश के लिए बेकरार इन्वेस्टर्स

    वहीं, अधिकारियों ने बताया कि इंडस्ट्रियल हब को लेकर निवेशकों की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है और अब तक 987 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ये प्रस्ताव मैन्युफेक्चरिंग, स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स पार्क, ई-कॉमर्स सप्लाई चैन और कृषि प्रसंस्करण समेत कई क्षेत्रों को कवर करते हैं। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इन निवेशों से एक मजबूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, सप्लाई चैन की दक्षता में सुधार होगा।

    फोकस में बुलंदशहर

    प्रत्येक औद्योगिक केंद्र की योजना संबंधित जिले के स्थानीय औद्योगिक आधार और भौगोलिक लाभों के आधार पर बनाई जा रही है। प्रस्तावित क्लस्टरों में से सबसे बड़ा क्लस्टर बुलंदशहर में 2,798 एकड़ में विकसित किया जाएगा। हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं और शाहजहांपुर में अन्य प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है, जिससे एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक केंद्रों का एक व्यापक नेटवर्क बनेगा।

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    बता दें कि गंगा एक्सप्रेसवे, मेरठ के बीजाउली गांव के पास से शुरू होकर प्रयागराज के जुधापुर दांडू गांव पर समाप्त होता है। 593 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत 12 जिलों से होकर गुजरता है।