गौतम अदाणी कभी दुनिया के दूसरे सबसे रईस थे, अब 30वें नंबर पर; साढ़े 3 साल में कैसे घटती गई दौलत? पूरी टाइमलाइन
Gautam AAdani Net Worth Drop: गौतम अदाणी की संपत्ति साढ़े तीन साल में 155 बिलियन डॉलर से घटकर 55 बिलियन डॉलर रह गई है, जिससे वे दुनिया के दूसरे सबसे अ ...और पढ़ें
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कभी दुनिया के दूसरे सबसे अमीर थे गौतम अदाणी, अब 30वें नंबर पर; साढ़े 3 साल में कैसे फिसलती गई दौलत? पूरी टाइमलाइन

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| सिर्फ साढ़े तीन साल पहले तक जो नाम दुनिया के टॉप रईसों में गिना जा रहा था, आज वह सूची में काफी नीचे खिसक चुका है। 2022 में गौतम अदाणी दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने थे, वो अब 30वें पायदान पर पहुंच गए हैं। फोर्ब्स के रियलटाइम बिलिनेयर इंडेक्स (Forbes) के मुताबिक, सिर्फ 24 घंटे में उनकी संपत्ति 9.29% यानी करीब 5.6 बिलियन डॉलर (51 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा) घट गई।
अब सवाल यह है कि आखिर पिछले साढ़े तीन साल में ऐसा क्या हुआ कि उनकी संपत्ति 100 बिलियन डॉलर घटकर 155 बिलियन डॉलर से 55 बिलियन डॉलर ही रह गई है। चलिए समझते हैं पूरी टाइमलाइन।
2022: जब गौतम अदाणी बने दुनिया के दूसरे सबसे रईस
साल 2022 में गौतम अदाणी की नेटवर्थ करीब 155 बिलियन डॉलर (14 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा) पहुंच गई थी। उस समय उन्होंने अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस को भी पीछे छोड़ दिया था। अदाणी ग्रुप के शेयरों में जबरदस्त तेजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर में विस्तार ने उनकी दौलत को रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचाया।
2023: हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने दिया अदाणी को पहला झटका
24 जनवरी 2023 को हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट सामने आई। जिसने गौतम अदाणी पर धोखाधड़ी, स्टॉक हेरफेर, अकाउंटिंग फ्रॉड और कर्ज-ओवरवैल्यूड शेयर जैसी गंभीर आरोप लगाए गए। इस रिपोर्ट के तुरंत बाद ही अदाणी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में 50 से 83 फीसदी तक गिरावट आई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बढ़ गई।
और देखते ही देखते अदाणी ग्रुप की कंमाइंड मार्केट वैल्यू में करीब 100 बिलियन डॉलर से 150 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। खास बात यह है कि गौतम अदाणी की व्यक्तिगत नेटवर्थ भी घटकर लगभग 46-62 बिलयन डॉलर रह गई। और यहीं से अदाणी की संपत्ति में लगातार गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। खास बात यह है कि इस रिपोर्ट के बाद अदाणी वैश्विक अमीरों की सूची में टॉप-10 से बाहर हो गए।
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दूसरा झटका: कर्ज और फंडिंग पर दबाव
अदाणी ग्रुप का विस्तार बड़े पैमाने पर कर्ज के सहारे हुआ था। शेयरों में गिरावट के बाद कर्ज को लेकर सवाल उठने लगे। कुछ प्रोजेक्ट्स की फंडिंग महंगी हुई। नई कैपिटल जुटाने में मुश्किलें भी आईं। इसका सीधा असर अदाणी की नेटवर्थ पर पड़ा।
तीसरा झटका: रेगुलेटरी और वैश्विक माहौल
बीते कुछ सालों में रेगुलेटरी सख्ती बढ़ी। ग्लोबल ब्याज दरें ऊंची रहीं और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बढ़ी। इन सब वजहों से इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर पर दबाव आया, जहां अदाणी ग्रुप की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।
2023-2024: सुप्रीम कोर्ट और SEBI की जांच
साल 2023 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने SEBI को रिपोर्ट में तय आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया और CBI-SIT जांच के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। जनवरी 2024 तक शेयरों और समूह के नकदी पर असर कुछ कम हुआ, लेकिन विवाद अपेक्षाकृत जारी रहा।
सितंबर 2025: हिंडनबर्ग के दावों पर क्लीन चिट
SEBI ने हिंडनबर्ग की कई प्रमुख दावों को क्लीन चिट दे दिया। सेबी का कहना था कि हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए कुछ आरोपों की जांच में नियमों का उल्लंघन नहीं पाया गया। इसी फैसले के बाद कई अदाणी समूह के शेयरों में तेजी आई और निवेशकों का विश्वास वापस आया।
23 जनवरी 2026: ट्रंप सरकार की संस्था का बड़ा आरोप
अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने एक अलग सिविल धोखाधड़ी और रिश्वत के आरोपों के सिलसिले में अदालत से अनुमति मांगी कि वह गौतम अदाणी और सागर अदाणी को सीधे ई-मेल-अधिसूचना भेज सके। इस खबर से अदाणी समूह के शेयरों में भारी गिरावट आई, जिससे बाजार पूंजी में लगभग $12.5 अरब की हानि हुई। इसके बाद गौतम अदाणी की संपत्ति में एक बार फिर भारी गिरावट आई।
बता दें कि यह मामला नवंबर 2024 का है। जब एक शिकायत में SEC ने आरोप लगाया कि अदाणी परिवार ने "अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के संबंध में सितंबर 2021 में जारी किए गए ऋण प्रस्ताव के बारे में जानबूझकर या लापरवाही से झूठे और भ्रामक बयान देकर सिक्योरिटी एक्सचेंज कानूनों के धोखाधड़ी-रोधी प्रावधानों का उल्लंघन किया।"
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2025-26: दौलत सिमटकर 55.3 बिलियन डॉलर रह गई
फोर्ब्स के मुताबिक, 24 घंटे में गौतम अदाणी की कुल संपत्ति घटकर 55.3 बिलियन डॉलर रह गई है। यानी अपने पीक से अब तक करीब 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। हालांकि अदाणी ग्रुप ने कर्ज घटाने, एसेट मोनेटाइजेशन और नए निवेशकों को जोड़ने पर फोकस बढ़ाया है। अगर बाजार में भरोसा लौटता है और प्रोजेक्ट्स से कैश फ्लो मजबूत होता है, तो अदाणी की संपत्ति में स्थिरता आ सकती है।