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    602 लाख मीट्रिक टन गेहूं-चावल, पेट्रोल व डीजल के बाद 'अन्न' के स्टॉक और दाम पर सरकार ने दूर की आम आदमी की चिंता

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 03:58 PM (IST)

    भारत सरकार ने गेहूं और चावल के पर्याप्त बफर स्टॉक पर जानकारी दी है। उपभोक्ता मंत्रालय की संयुक्त सचिव सी. शिखा ने बताया कि देश में निर्धारित मानदंडों ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. देश में गेहूं-चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद।

    2. निर्धारित मानदंडों से तीन गुना अधिक खाद्य भंडार उपलब्ध।

    3. कीमतों को स्थिर रखने और महंगाई नियंत्रण में मदद मिलेगी।

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट का पूरी दुनिया पर असर पड़ा है। खासकर, कच्चे तेल में बढ़ोतरी से ऊर्जा संकट पैदा हुआ है और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ी हैं। इस बीच सरकार ने गेहूं और चावल के स्टॉक पर बड़ा अपडेट दिया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा ने कहा, "हमारे पास गेहूं और चावल दोनों का पर्याप्त बफर स्टॉक है, जो निर्धारित बफर स्टॉक से तीन गुना अधिक है।" उन्होंने कहा कि स्टॉक की पर्याप्त उपलब्धता है और कीमतों को स्थिर रखने व महंगाई पर नियंत्रण रखने की पूरी तैयारी है।

    स्टॉक में कितना गेहूं और कितना चावल

    ज्वाइंट सेक्रेटरी सी. शिखा ने कहा गेहूं का लगभग 222 लाख मीट्रिक टन और चावल का लगभग 380 लाख मीट्रिक टन स्टॉक उपलब्ध है। कुल मिलाकर हमारे पास लगभग 602 लाख मीट्रिक टन खाद्य भंडार है। यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की आवश्यकताओं के साथ-साथ किसी भी आपातकालीन आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। प्रमुख साझेदारों से आयात लगातार जारी है, जिनमें इंडोनेशिया, मलेशिया, रूस, यूक्रेन, अर्जेंटीना और ब्राजील शामिल हैं। सरसों के बेहतर उत्पादन से घरेलू आपूर्ति मजबूत हुई है। कुल आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। सरकार इस पर कड़ी नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करेगी।"

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    वहीं, कंज्यूमर अफेयर्स डिपॉर्टमेंट के एडिशनल सेक्रेटरी अनुपम मिश्रा ने कहा कि देश में खाद्य सुरक्षा की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विभाग रोजाना 528 केंद्रों से 40 सामानों के दाम के बारे में सूचना जुटाता है और इन्हें एक मोबाइल ऐप पर अपडेट किया जाता है। उन्होंने कहा, "अब तक जरूरी सामानों की कीमतों में कोई असामान्य उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है।" कीमतों पर नजर रखने के साथ जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने और जमाखोरी व कालाबाजारी रोकने के भी प्रयास किए जा रहे हैं।