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    GSTN ई-वे बिल में होने जा रहे 2 बड़े बदलाव, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर्स के लिए क्या हैं जरूरी बातें?

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 01:02 PM (IST)

    देश में GST के तहत ई-वे बिल प्रणाली में दो बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं, जिनमें 'Ship-To GSTIN' और 'Voluntary E-Way Bill Closure' शामिल हैं। ये बदलाव, जो ...और पढ़ें

    e-way bill में होने वाले बदलाव 1 अगस्त ले होंगे लागू (AI Image)

    e-way bill में होने वाले बदलाव 1 अगस्त ले होंगे लागू (AI Image)

    HighLights

    1. ई-वे बिल में दो बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं।

    2. 'Ship-To GSTIN' और 'Voluntary E-Way Bill Closure' लागू होंगे।

    3. नए नियम 1 अगस्त 2026 से प्रभावी होंगे।

    नई दिल्ली| देश में GST लागू हुए 09 साल पूरे होने वाले हैं। समय-समय पर इसे लेकर कई बदलाव भी देखे गए हैं। इन दिनों चर्चा ई-वे बिल को लेकर है। ज्यादातर लोगों को अभी भी इसके बारे में कम जानकारी है। बता दें कि ई-वे बिल (Electronic Way Bill) एक डिजिटल दस्तावेज है, जिसे माल की ढुलाई के लिए GST प्रणाली के तहत बनाया जाता है। ई-वे बिल यह बताता है कि एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा रहा माल GST नियमों का पालन कर रहा है। अब ई-वे बिल में नए बदलाव होने जा रहे हैं।

    ई-वे बिल किसके लिए जरूरी है?

    e-way bill ₹50 हजार से अधिक कीमत के माल की ढुलाई के लिए जरूरी होता है। बता दें कि माल भेजने वाला व्यक्ति, माल प्राप्त करने वाला, और रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्टर, ई-वे बिल जनरेट कर सकता है। जो ट्रांसपोर्टर रजिस्टर्ड नहीं हैं वे भी साझा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराकर अपने ग्राहकों के लिए माल परिवहन हेतु ई-वे बिल जनरेट कर सकता है। यदि माल का मूल्य ₹50,000 से अधिक है और व्यापारी ने ई-वे बिल नहीं बनाया है, तो ट्रांसपोर्टर की जिम्मेदारी होती है कि वह इसे जनरेट करे।

    ई-वे बिल में क्या-क्या जानकारी होती है?

    e-way Bill के 2 पार्ट होते हैं। पार्ट A में सप्लायर का GSTIN, खरीदार (Recipient) का GSTIN, चालान नंबर, माल का मूल्य, HSN कोड और माल डिलेवर करने के स्थान की जानकारी लिखी होती है। इसके साथ ही पार्ट B में ट्रांसपोर्टर की जानकारी और माल ढोने वाले वाहन की जानकारी लिखी होती है।

    ई-वे बिल के क्या फायदे हैं?

    ई-वे बिल का उद्देश्य माल ढुलाई की निगरानी करना है। इससे टैक्स की चोरी पर रोक लगती है। खरीदार और ट्रांस्पोर्ट अपने माल और वाहन को ट्रैक कर सकते हैं। चेकपोस्ट पर समय कम लगता है जिससे ना सिर्फ समय और ईंधन की बचत होती, बल्कि कागजी कार्रवाई से भी छुटकारा मिलता है। बता दें कि पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू है।

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    क्यों चर्चा में है GSTN का ई-वे बिल?

    GSTN ई-वे बिल का मामला इन दिनों चर्चा में है। दरअसल GSTN ने ई-वे बिल में दो बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया था, जिसमें डेटा की सटीकता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए Ship-To GSTIN और Voluntary E-Way Bill Closure की सुविधा को 15 जून से लागू करना था। इसका मतलब डिलीवरी पूरी होने के बाद ई-वे बिल को स्वेच्छा से क्लोज किया जा सकेगा। इससे डिस्पैच से लेकर डिलीवरी तक का डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा।

    कई कंपनियों ने ERP सॉफ्टवेयर में बदलाव करने और API इंटीग्रेशन और टेस्टिंग को लेकर और अधिक समय की मांग की थी। जिसको देखते हुए इन नए बदलावों को 1 अगस्त 2026 से लागू करने