100000 टन चावल से लदे जहाज कर रहे रास्ता खुलने का इंतजार, भारत का 50% एक्सपोर्ट पूरी तरह ठप!
पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत के बासमती चावल और चाय का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से कांडला बंदरगाह पर ...और पढ़ें

पश्चिमी एशिया युद्ध के चलते भारत का समुद्री व्यापार प्रभावित (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
पश्चिमी एशिया संघर्ष से भारत का बासमती चावल, चाय निर्यात प्रभावित हुआ।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से 1 लाख टन चावल कांडला पर फंसा।
भारत के कुल बासमती चावल निर्यात का 50% हिस्सा ठप।
नई दिल्ली| पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष का असर डायरेक्ट-इनडायरेक्ट हर किसी के जीवन में पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होते ही जहां एक ओर ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई, तो वहीं दूसरी ओर भारत के व्यापार को भी तगड़ी चोट हुई है। समुद्र का ये बेहद जरूरी रास्ता बंद होने के चलते पश्चिमी एशिया को बासमती चावल और चाय का निर्यात ठप हो गया है। एक्सपोर्ट्स ने बताया कि पहले रुक-रुक कर चीजें भेजी जाती थीं, लेकिन अब व्यापार पूरी तरह से बंद हो गया है।
100,000 टन चावल से लदे जहाज कर रहे इंतजार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक निर्यातकों ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है, और कांडला बंदरगाह पर 100,000 टन बासमती चावल से लदे तीन जहाज पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं। चाय निर्यातकों का कहना है कि खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council) देशों से उन्हें प्रीमियम सेकंड फ्लश ऑर्थोडॉक्स चाय के भारी ऑर्डर मिल रहे हैं, लेकिन वे उन्हें भेज नहीं पा रहे हैं।
1 हफ्ते से पूरी तरह बंद हुआ निर्यात
Economic Times के मुताबिक इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का इंतजार कर रहे निर्यातकों में काफी भ्रम की स्थिति है। निर्यातकों के अनुसार, फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में कई चीजों का निर्यात रुक-रुक कर हो रहा था, लेकिन पिछले लगभग एक हफ्ते से यह भी पूरी तरह बंद हो गया है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन जैसे देश जो भारत से होने वाले कुल बासमती चावल निर्यात का लगभग 50% हिस्सा हैं, वे इस संघर्ष से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल हैं।
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हर साल कितना एक्सपोर्ट करता है भारत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत हर साल लगभग 72 लाख टन बासमती चावल का उत्पादन करता है। इसमें से 60 लाख टन निर्यात किया जाता है। पश्चिम एशिया भारत के चाय निर्यात का लगभग 46% हिस्सा है। 2025 में, इस क्षेत्र ने 129.19 करोड़ किलोग्राम चाय का आयात किया था।
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पश्चिम एशिया में चाय पीने वाले लोग भारतीय सेकंड फ्लश प्रीमियम ऑर्थोडॉक्स चाय को पसंद करते हैं, जिससे यह देश के लिए विदेशी मुद्रा का एक प्रमुख स्रोत बन जाती है। हर साल, इस क्षेत्र के खरीदार मई के अंत से ऑर्डर देना शुरू कर देते हैं और भारत से चाय की खेप जून में शुरू होती है।