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HDFC Bank News: भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक पर अमेरिका में दर्ज हुआ मुकदमा, ब्याज बढ़ाना पड़ा भारी?

By IANSEdited By: Gyanendra Tiwari
Updated: Thu, 27 Aug 2026 04:31 PM (IST)

एचडीएफसी बैंक पर न्यूयॉर्क में एक क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें आरोप है कि बैंक ने एक राज्य ...और पढ़ें

एचडीएफसी बैंक पर न्यूयॉर्क में क्लास-एक्शन मुकदमा दायर।

एचडीएफसी बैंक पर न्यूयॉर्क में क्लास-एक्शन मुकदमा दायर।

HighLights

  1. एचडीएफसी बैंक पर न्यूयॉर्क में क्लास-एक्शन मुकदमा दायर।

  2. अवैध ब्याज भुगतान को मार्केटिंग खर्च में छिपाने का आरोप।

  3. सीईओ, सीएफओ भी प्रतिवादी, शेयरों में भारी गिरावट।

आईएएनएस, नई दिल्ली। HDFC Bank News: देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक पर न्यूयॉर्क में फेडरल सिक्योरिटी क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया है। बैंक पर आरोप है कि उसने एक कवर्ट स्कीम के तहत एक राज्य सरकार की एजेंसी को ब्याज के रूप में दी जाने वाली अतिरिक्त रकम को मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाकर ब्याज भुगतान को अवैध तरीके से बढ़ाया।

निवेशक ज्वलंत नटवरलाल सोनेजी ने न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में यह मुकदमा दायर किया है। इसमें एचडीएफसी बैंक के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शशिधर जगदीशन और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) श्रीनिवासन वैद्यनाथन को भी प्रतिवादी बनाया गया है। यह मुकदमा उन सभी निवेशकों की ओर से दायर किया गया है, जिन्होंने 17 जुलाई 2023 से 26 मई 2026 के बीच एचडीएफसी बैंक के अमेरिकन डिपॉजिटरी शेयर (एडीएस) खरीदे थे।

क्या है आरोप?

मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि एचडीएफसी बैंक ने बड़े जमा आकर्षित करने के लिए महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमएसआरडीसी) को 6.01 प्रतिशत ब्याज दर देने का वादा किया था। यह आम ग्राहकों को मिलने वाली 3.5 प्रतिशत की मानक बचत दर से 2.51 प्रतिशत अधिक थी और यह कथित तौर पर आरबीआई के नियमों का उल्लंघन था। आरबीआई के बैंकिंग नियम व्यक्तिगत जमाकर्ताओं को बातचीत के आधार पर अलग रिटर्न देने पर स्पष्ट रूप से रोक लगाते हैं, इसलिए वरिष्ठ प्रबंधन ने कथित तौर पर इसका एक वैकल्पिक रास्ता निकाला।

मुकदमे के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच एचडीएफसी बैंक ने करीब 45 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज राज्य की इस एजेंसी को दिया। आरोप है कि इस रकम को ब्याज के रूप में जमा करने के बजाय मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया और इसे एमएसआरडीसी द्वारा चलाए जा रहे सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान को प्रायोजित करने में इस्तेमाल किया गया। यह भुगतान कथित तौर पर तीसरे पक्ष के विक्रेताओं के माध्यम से किया गया। बैंक की एक आंतरिक सतर्कता जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि यह तरीका आरबीआई के मास्टर निर्देशों के साथ-साथ एचडीएफसी की आंतरिक रिश्वत-रोधी नीतियों का उल्लंघन करता है।

इसके बाद वादियों ने तर्क दिया कि क्लास पीरियड के दौरान एचडीएफसी की अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) में दाखिल की गई रिपोर्टों में महत्वपूर्ण रूप से गलत जानकारी दी गई। वित्त वर्ष 2024 और 2025 की अपनी फॉर्म 20-एफ वार्षिक रिपोर्टों में एचडीएफसी बैंक प्रबंधन ने निवेशकों को भरोसा दिलाया था कि वित्तीय रिपोर्टिंग पर उसका “आंतरिक नियंत्रण प्रभावी था।"

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ब्याज के अतिरिक्त भुगतान को मार्केटिंग बजट में छिपाकर एचडीएफसी बैंक ने अपने परिचालन खर्च और बारीकी से निगरानी किए जाने वाले शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) दोनों को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।

बैंक की रिपोर्टों में नियमित रूप से यह चेतावनी दी जाती थी कि “महत्वपूर्ण धोखाधड़ी, सिस्टम विफलता या आपदाएं हमारी राजस्व पैदा करने वाली गतिविधियों को बाधित कर सकती हैं।” रिपोर्टों में आरबीआई द्वारा लगाए गए पिछले जुर्मानों का भी उल्लेख था। हालांकि, शिकायत में कहा गया है कि ये सामान्य चेतावनियां बैंक के भीतर कथित तौर पर चल रही उच्च स्तर की सक्रिय धोखाधड़ी का खुलासा करने में विफल रहीं।

अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद गंभीर हुई मामला

मामला 18 मार्च 2026 को तब गंभीर हो गया, जब एचडीएफसी के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया। चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए बैंक के भीतर "कुछ ऐसी घटनाओं और प्रथाओं" का हवाला दिया, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। उनके अचानक जाने से निवेशक घबरा गए और अमेरिका में कारोबार करने वाले एचडीएफसी बैंक के शेयर असामान्य रूप से भारी कारोबार के बीच 7.28 प्रतिशत गिरकर 26.62 डॉलर पर बंद हुए।

मामले का पूरा असर 27 मई 2026 को सामने आया, जब द इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर एमएसआरडीसी को किए गए भुगतानों की आंतरिक जांच का खुलासा किया। रिपोर्ट में बताया गया कि 10 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार थे। इनमें सीईओ जगदीशन भी शामिल थे, जिन्होंने कथित तौर पर वरिष्ठ स्तर की चर्चाओं के दौरान इन छिपाए गए भुगतानों को मौखिक मंजूरी दी थी।

खुलासे के बाद शेयरों में गिरावट

इस खुलासे के बाद एचडीएफसी के शेयरों में 4.1 प्रतिशत की अतिरिक्त गिरावट आई और वे 23.78 डॉलर पर बंद हुए। वादियों ने 1934 के सिक्योरिटी एक्सचेंज एक्ट की धारा 10(बी) और 20(बी) के उल्लंघन का आरोप लगाया है। वे क्लास-एक्शन के रूप में मुकदमे को प्रमाणित करने, निर्धारित नहीं की गई क्षतिपूर्ति राशि और जूरी ट्रायल की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि बैंक के अधिकारियों ने सच्चाई के प्रति लापरवाही बरती और उन निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया, जिन्होंने नियामकीय उल्लंघनों के सामने आने से पहले कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई कीमतों पर एचडीएफसी के शेयर खरीदे थे।

एचडीएफसी बैंक ने एक बयान में कहा, "अमेरिका में शेयरधारकों द्वारा इस तरह के मुकदमे किसी कंपनी के शेयरों में गिरावट के बाद बेहद आम हैं और अमेरिका में सूचीबद्ध कई कंपनियां हर साल नियमित रूप से ऐसे मुकदमों का बचाव करती हैं। बैंक का मानना है कि यह मुकदमा निराधार है और वह इसका मजबूती से बचाव करेगा।"

एचडीएफसी बैंक के शेयर गुरुवार को 1.75 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 714.45 रुपए पर बंद हुए।

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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)