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कर्जमाफी के 'महासंग्राम' में HDFC की हुंकार, ₹22000 करोड़ के लोन में 99.97% के 'मेगा डिस्काउंट' पर लटकी तलवार!

By IANSEdited By: Gyanendra Tiwari
Updated: Thu, 27 Aug 2026 09:28 PM (IST)

एनसीएलटी द्वारा एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत दिवाला समाधान में बड़ी राहत मिलने के बाद, एचडीएफसी बैंक ...और पढ़ें

एचडीएफसी बैंक 99.97% कर्ज छूट के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील कर सकता है।

एचडीएफसी बैंक 99.97% कर्ज छूट के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील कर सकता है।

HighLights

  1. एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत दिवाला समाधान में बड़ी राहत दी।

  2. एचडीएफसी बैंक 99.97% कर्ज छूट के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील करेगा।

  3. 22,000 करोड़ के दावों पर सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान स्वीकृत हुआ।

आईएएनएस, नई दिल्ली। एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में बड़ी राहत देने वाले राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल-एनसीएलटी) के फैसले के खिलाफ एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) अपील करने की तैयारी कर रहा है। बैंक ने गुरुवार को कहा कि वह इस मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष अपील दायर करने की संभावना पर विचार कर रहा है।

HDFC बैंक की क्या प्रतिक्रिया आई?

HDFC बैंक की यह प्रतिक्रिया उस फैसले के बाद आई है, जिसमें एनसीएलटी ने एक ऐसी पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत लगभग 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के बदले केवल 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।

यह लेनदारों के लिए लगभग 99.97 प्रतिशत कर्ज छूट (हेयरकट) के बराबर है। बैंक के एक प्रवक्ता ने एनडीटीवी प्रॉफिट को बताया कि इस मामले में एचडीएफसी बैंक का स्वीकृत दावा कुल दावों का केवल 3.2 प्रतिशत था। यह ऋण सुविधा बैंक को एचडीएफसी लिमिटेड और एचडीएफसी बैंक के विलय के बाद विरासत में मिली थी।

प्रवक्ता ने आगे कहा, "एनसीएलटी मामले में एचडीएफसी बैंक का स्वीकृत दावा कुल राशि का केवल 3.2 प्रतिशत था। यह ऋण सुविधा पहले एचडीएफसी लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई थी और विलय के बाद बैंक को प्राप्त हुई।"

उन्होंने आगे कहा कि बैंक इस आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील दायर करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित ऋण के लिए आवश्यक प्रावधान पहले ही किए जा चुके हैं और यह खाता विलय प्रक्रिया के हिस्से के रूप में बैंक की पुस्तकों में आया था। इससे पहले एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी।

22,006.57 करोड़ रुपये का लोन और करना होगा 6.25 करोड़ का भुगतान

प्रस्ताव के अनुसार, चंद्रा को लेनदारों के लगभग 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के बदले केवल 6.25 करोड़ रुपये का भुगतान करना था, जबकि 25 लाख रुपये प्रक्रिया लागत के लिए निर्धारित किए गए थे। मामले की सुनवाई के दौरान एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस सहित कई लेनदारों ने इस योजना का विरोध किया था। एनसीएलटी के आदेश में दर्ज एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की दलील के अनुसार, उसका स्वीकृत दावा 1,322.39 करोड़ रुपये था, जबकि प्रस्तावित भुगतान केवल 38.09 लाख रुपये था, जो उसके कुल दावे का लगभग 0.028 प्रतिशत है।

कंपनी ने तर्क दिया था कि इतनी मामूली वसूली वाली योजना को स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, तीसरे सदस्य के रूप में फैसला सुनाते हुए एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 114 के तहत इस योजना को मंजूरी दे दी।

उन्होंने उन लेनदारों की आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिन्होंने कहा था कि वसूली की राशि अत्यंत कम है और योजना व्यवहार्य नहीं है। गौरतलब है कि इस मामले में पहले एनसीएलटी की दो सदस्यीय पीठ का फैसला विभाजित रहा था। दोनों सदस्यों की अलग-अलग राय के बाद न्यायाधिकरण के अध्यक्ष ने मामले के निस्तारण के लिए नीलेश शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया था।

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के नेतृत्व में असहमति जताने वाले लेनदारों ने तर्क दिया था कि प्रस्तावित पुनर्भुगतान योजना "अव्यावहारिक और कानून के विपरीत" है। उनका कहना था कि 22,006 करोड़ रुपये से अधिक के स्वीकृत दावों के मुकाबले केवल 6.25 करोड़ रुपये का भुगतान स्वीकार करना लेनदारों के हितों के खिलाफ होगा।

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