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    138 साल पुरानी भारत की पहली FMCG कंपनी, लंदन से मंगाए एक साबुन से शुरू हुआ बिजनेस आज 5 लाख करोड़ का साम्राज्य

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 03:49 PM (IST)

    भारत में FMCG की शुरुआत 1888 में ब्रिटिश लीवर ब्रदर्स के सनलाइट सोप से हुई, जिसने बाद में लाइफबॉय जैसे ब्रांड्स को जन्म दिया। 1956 में हिंदुस्तान यूनि ...और पढ़ें

    138 साल पहले भारत में आई थी पहली FMCG कंपनी, 7 समंदर पार लंदन से मंगाए एक साबुन से शुरु हुआ बिजनेस अब 5 लाख करोड़ का साम्राज्य

    138 साल पहले भारत में आई थी पहली FMCG कंपनी, 7 समंदर पार लंदन से मंगाए एक साबुन से शुरु हुआ बिजनेस अब 5 लाख करोड़ का साम्राज्य

    HighLights

    1. 1888 में सनलाइट सोप से भारत में FMCG की शुरुआत।

    2. 1956 में हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) की स्थापना हुई।

    3. आज HUL 5 लाख करोड़ रुपये का विशाल साम्राज्य है।

    नई दिल्ली। आज भारत के घरों में लक्स, लाइफबॉय या विम जैसे प्रोडक्ट्स का रोज इस्तेमाल होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस बड़े साम्राज्य की नींव कैसे रखी गई थी? 1888 की गर्मियों में, ब्रिटिश कंपनी लीवर ब्रदर्स ने पहली बार इंग्लैंड से भारत में सनलाइट सोप का एक्सपोर्ट शुरू किया। कोलकाता बंदरगाह पर सनलाइट सोप के कार्टन के आने के साथ ही भारत में ब्रांडेड फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) की मार्केटिंग के एक ऐतिहासिक दौर की शुरुआत हुई।

    लाइफबॉय और दूसरे मशहूर ब्रांड्स की एंट्री

    सनलाइट सोप की कामयाबी के बाद, कंपनी ने 1895 में भारत में लाइफबॉय साबुन लॉन्च किया। यह भारतीय इतिहास में हाइजीन यानी साफ-सफाई के सबसे मशहूर और ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ब्रांड्स में से एक बन गया। इसके कुछ समय बाद, 1900 के दशक की शुरुआत में, Pears, Lux और Vim जैसे दूसरे जाने-माने ब्रांड्स भी भारत लाए गए और बाजार में बेचे गए।

    हिंदुस्तान यूनिलीवर की शुरुआत

    भारतीय बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए, यूनिलीवर ने 1931 में अपनी पहली भारतीय सब्सिडियरी, 'हिंदुस्तान वनस्पति मैन्युफैक्चरिंग कंपनी' की स्थापना की। इसके बाद, 1933 में लीवर ब्रदर्स इंडिया लिमिटेड और 1935 में यूनाइटेड ट्रेडर्स लिमिटेड बनाई गईं। नवंबर 1956 में, इन तीनों कंपनियों का विलय कर दिया गया, जिससे हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) का जन्म हुआ। HUL उन शुरुआती विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों में से एक थी, जिसने अपनी इक्विटी का 10% हिस्सा भारतीय जनता को पेश किया।

    उदारीकरण के बाद तेज़ी से विस्तार

    1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण से HUL की ग्रोथ को नई रफ्तार मिली। इसके बाद, कंपनी ने कई बड़े अधिग्रहण और विलय किए। 1 अप्रैल, 1993 को HUL के साथ टाटा ऑयल मिल्स कंपनी (TOMCO) का विलय हुआ, यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक थी। यह सिलसिला हाल के वर्षों में भी जारी रहा है। 2020 में GSK कंज्यूमर हेल्थकेयर के साथ हुए विलय से हॉर्लिक्स और बूस्ट जैसे मशहूर हेल्थ ड्रिंक ब्रांड HUL के पोर्टफोलियो में शामिल हो गए।

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    ₹5 लाख करोड़ का विशाल साम्राज्य

    आज, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹4,93,720 करोड़ (लगभग ₹5 लाख करोड़) है और इसके शेयर की मौजूदा कीमत ₹2,101 है। 2022 में, कंपनी का कुल टर्नओवर ₹50,000 करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया। कंपनी लगातार अपने पोर्टफोलियो को अपडेट कर रही है। हाल ही में, 1 दिसंबर 2025 से प्रभावी, HUL के आइसक्रीम बिज़नेस को अलग करके 'क्वालिटी वॉल्स इंडिया लिमिटेड' (KWIL) नाम की एक अलग कंपनी बनाई गई। लंदन से आयातित साबुन से शुरू हुआ यह सफर आज पूरे भारत के घरों का एक अहम हिस्सा बन गया है।

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