पड़ोसी पस्त, महाशक्तियां त्रस्त! US-PAK में पेट्रोल-डीजल 20% महंगा, चीन की भी टूटी कमर; भारत कैसे टिका है?
मध्य पूर्व संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल पार कर गई हैं। अमेरिका, पाकिस्तान और चीन जैसे देशों ने पेट्रोल-डीजल के दाम 20% तक बढ़ा द ...और पढ़ें

पड़ोसी पस्त, महाशक्तियां त्रस्त! US-PAK में पेट्रोल-डीजल 20% महंगा, चीन की भी टूटी कमर; भारत कैसे टिका है?
HighLights
मध्य पूर्व संघर्ष से कच्चा तेल $100 पार।
अमेरिका, पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल 20% महंगा हुआ।
भारत में ईंधन कीमतें स्थिर, एक्साइज ड्यूटी कटौती संभव।
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के चलते इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल (Crude Oil Price) के पार जा चुकी हैं। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से शुरू हुए संघर्ष के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 45 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा देखने को मिल चुका है। मध्य पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद से अब तक कई देशों ने अपने यहां पेट्रोल-डीजल के प्राइस 20% तक बढ़ा दिए हैं।।
हालांकि, भारत में अभी भी आम जनता पर सरकार ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ नहीं डाला है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर भारत कब तक फ्यूल की कीमतों को कंट्रोल में रख सकता है? आज जागरण बिजनेस के एक्सप्लेनर में जानेंगे इसकी पूरी कहानी।
अमेरिका- पाकिस्तान में 20% तक बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत
मध्य पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद से भारत ने अभी तक पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Rate In India) की कीमतों में इजाफा नहीं किया है। वहीं, दूसरी ओर इस युद्ध में ईरान के खिलाफ लड़ने वाली दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्तियों अमेरिका अपने यहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बढ़ाने से खुद को नहीं रोक पाया। 28 फरवरी के बाद से अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20 फीसदी तक बढ़ गई हैं।
ईरान में चल रहे संघर्ष का असर भारत के पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है। पाकिस्तान में भी पेट्रोल और डीजल 20% तक महंगे हो गए हैं। श्रीलंका में फ्यूल की कीमत 8 फीसदी तक बढ़ गई है। चीन भी इससे अछूता नहीं रहा। चीन में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है। 10 मार्च को चीन ने पेट्रोल की कीमतों में 3.7 फीसदी बढ़ोतरी की घोषणा की। यह 2022 के बाद से चीन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी।
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Strait of Hormuz ने बिगाड़ा तेल-गैस का खेल
कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में आ रही रुकावट की मुख्य वजह ईरान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) है। युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान ने इस पूरे इलाके को फुल कंट्रोल में कर लिया है। अमेरिका और इजरायल ने जैसे ही ईरान की सबसे बड़ी गैस फील्ड साउथ पार्स (South Pars) और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला करना शुरू किया, ईरान ने भी जबरदस्त पलटवार किया।
ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों के गैस और तेल रिफाइनरी पर जबरदस्त हमला किया। ईरान ने कतर की सबसे अहम गैस सुविधाओं में से एक, रास लफान कॉम्प्लेक्स मिसाइल दागकर हमला किया। इस मिसाइल हमले ने पूरे मध्य-पूर्व और दुनिया के एनर्जी बाजारों में हलचल मचा दी है।
| क्रम संख्या | देश | 23 फरवरी 2026 के रेट | 11 मार्च 2026 के रेट | बदलाव |
| 1 | कंबोडिया | $1.11 | $1.32 | 67.81% |
| 2 | वियतनाम | $0.75 | $1.13 | 49.73% |
| 3 | नाइजीरिया | $0.59 | $0.80 | 35.02% |
| 4 | लाओस | $1.34 | $1.78 | 32.94% |
| 5 | कनाडा | $1.16 | $1.30 | 28.36% |
| 6 | पाकिस्तान | $0.92 | $1.15 | 24.49% |
| 7 | मालदीव | $0.87 | $1.04 | 18.54% |
| 8 | ऑस्ट्रेलिया | $1.11 | $1.31 | 18.23% |
| 9 | संयुक्त राज्य अमेरिका | $0.87 | $1.01 | 16.55% |
| 10 | सिंगापुर | $2.16 | $2.50 | 15.69% |
| 11 | प्यूर्टो रिको | $0.90 | $1.02 | 13.54% |
| 12 | जर्मनी | $2.08 | $2.36 | 13.30% |
| 13 | ग्वाटेमाला | $1.04 | $1.17 | 12.90% |
| 14 | सेशेल्स | $1.34 | $1.52 | 12.89% |
| 15 | सिएरा लियोन | $1.45 | $1.63 | 12.29% |
| 95-ऑक्टेन (सुपर) पेट्रोल की औसत कीमत, USD प्रति लीटर स्रोत: Global Petrol Prices | 11 मार्च, 2026 (यह डेटा 11 मार्च 2026 तक का है।) | ||||
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के इस हमले से कतर की एक बड़ी गैस सुविधा में आग लग गई और उसे ढांचागत नुकसान पहुंचा। इससे यह डर और बढ़ गया है कि अब यह युद्ध सिर्फ सैन्य ठिकानों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह सीधे तौर पर दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा बन गया है।
भारत कब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों कंट्रोल कर पाएगा?
7 मार्च को सरकार ने 14.2 किलो वाला LPG सिलिंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की थी। और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये तक का इजाफा किया गया था। सरकार ने पीएम उज्जवला योजना के तहत LPG सिलेंडर पर मिलने वाली 300 रुपये की सब्सिडी को जारी रखा है। इस योजना के तहत सिलिंडर रिफिल करने वालों को सिर्फ 12 सिलिंडर रिफिल तक ही सब्सिडी मिलेगी। इससे अधिक रिफिल कराने पर आपको खुद ही पैसा देना होगा। अधिक सिलिंडर रिफिल कराने पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।
अब सवाल यह है कि आखिर भारत कब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाएगा? इसका जवाब है कि सरकार अनिश्चितकाल तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों नहीं कंट्रोल कर सकती है। सरकार एक लीटर पर पेट्रोल पर 19.9 रुपये और डीजल पर 15.8 रुपये की एक्साइज ड्यूटी लेती है। कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार इसमें कटौती कर सकती है, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर ज्यादा बोझ न बढ़े। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक एक्साइज ड्यूटी कट करके कंट्रोल की जा सकती है। यानी अगर कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक जाती है, तो उतने तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कंट्रोल किया जा सकता है।
हालांकि, अभी तक सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम करने को लेकर कोई घोषणा नहीं की है। अगर इसी तरह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा होता रहता है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इसका भार आम जनता पर कीमतों में इजाफा करके कम कर सकती हैं।
10 डॉलर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर OMC को कितना नुकसान?
इलारा सिक्योरिटीज की एक स्टडी के अनुसार जब भी कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर का इजाफा होगा, तब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां को एक लीटर पेट्रोल-डीजल पर 6.3 रुपये का नुकसान होगा। यानी उनके मार्जिन में इतने रुपये की कमी आएगी।
कोविड कॉल में जब कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, तो पेट्रोल-डीजल के रेट में कमी नहीं की गई थी। उस समय कंपनियों ने प्रॉफिट कमया था। और अब जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं तो ये कंपनियां जनता पर सीधे बोझ नहीं डाल रही हैं। क्योंकि कीमतें कम होने पर इन्होंने प्रॉफिट कमया था।