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    कौन थे खुशी राम-बिहारी लाल? 1947 में खो दी थी सारी दौलत, आज इनकी चावल की सबसे पुरानी कंपनी का अरबों में बिजनेस

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 06:00 AM (IST)

    इंडिया गेट बासमती चावल ब्रांड की नींव खुशी राम और बिहारी लाल ने 1889 में पाकिस्तान में रखी थी। बंटवारे में सब कुछ खोने के बाद, उन्होंने भारत में शून्य ...और पढ़ें

    चावल ब्रांड की नींव रखने वाले खुशी राम और बिहारी लाल कौन थे? (AI फोटो)

    चावल ब्रांड की नींव रखने वाले खुशी राम और बिहारी लाल कौन थे? (AI फोटो)

    HighLights

    1. KRBL की शुरुआत 1889 में अविभाजित भारत के पाकिस्तान में हुई थी।

    2. बंटवारे में सब कुछ खोकर भारत में फिर से व्यापार शुरू किया।

    3. ईरान संघर्ष से बासमती निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है।

    नई दिल्ली। इंडिया गेट (India Gate) बासमती चावल ब्रांड की नींव रखने वाले खुशी राम और बिहारी लाल कौन थे, क्या आप जानते हैं? 1889 में पाकिस्तान (अविभाजित भारत) में एक छोटे से व्यापार से शुरू हुई यह कंपनी (KRBL Limited) आज हजारों करोड़ रुपये का कारोबार कर रही है। आइए जानते हैं बंटवारे के दर्द से लेकर दुनिया की सबसे बड़ी राइस मिलिंग कंपनी बनने तक के इनके सफर और मौजूदा समय में मध्य पूर्व के तनाव के कारण इनके सामने खड़ी नई चुनौतियों के बारे में।

    पाकिस्तान से जुड़ी हैं जड़ें 

    KRBL का नाम उनके फाउंडर खुशी राम और बिहारी के नाम पर रखा गया है। इसकी शुरुआत 1889 में लायलपुर (अब फैसलाबाद, पाकिस्तान) में हुई थी। दोनों भाइयों ने मिलकर चावल, खाद्य तेल, गेहूं और कृषि उत्पादों का एक छोटा सा व्यापार शुरू किया था। बंटवारे से पहले के शहरों में वे राइस मिल, कॉटन स्पिनिंग यूनिट, कमीशन एजेंसी और यहां तक कि एक बैंक भी चलाते थे। बाजार में उनकी पहचान ईमानदारी, सही वजन और पारदर्शिता के लिए थी, जिससे उन्होंने समुदाय में जबरदस्त विश्वास कायम किया था।

    1947 का बंटवारा: जब सब कुछ पीछे छूट गया

    1947 के भारत-पाकिस्तान बंटवारे ने उनके व्यापार को एक बड़ा झटका दिया। इस त्रासदी में परिवार ने पाकिस्तान में अपनी लगभग सारी संपत्ति खो दी और उन्हें जान बचाकर भारत आना पड़ा। शुरुआत में उन्होंने दिल्ली के लाहौरी गेट/नया बाजार इलाके में शरण ली। भारी उथल-पुथल और अपना सब कुछ खो देने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शून्य से शुरुआत करते हुए चावल और तेल के व्यापारी के रूप में अपना कारोबार फिर से खड़ा किया। यह कहानी भू-राजनीतिक विभाजन से उजड़ी एक विरासत को फिर से बनाने के उनके शानदार जज्बे को दर्शाती है।

    फर्श से अर्श तक का सफर और 'इंडिया गेट' का जन्म

    भारत में फिर से बसने के बाद, KRBL ने राइस मिलिंग पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अपनी पहली यूनिट लगाई। बाद की पीढ़ियों, विशेषकर अनिल कुमार मित्तल (वर्तमान चेयरमैन और एमडी) के नेतृत्व में, यह भारत की पहली पूरी तरह से इंटीग्रेटेड बासमती कंपनी बन गई। BSE डेटा के मुताबिक आज कंपनी का मार्केट कैप 7,056 करोड़ रुपये है।

    खबरें और भी

    ईरान युद्ध एक्सपोर्ट पर पड़ा भारी असर

    भारतीय बासमती के लिए ईरान हमेशा से एक बहुत बड़ा बाजार रहा है (सऊदी अरब के बाद अक्सर दूसरे नंबर पर)। ऐतिहासिक रूप से KRBL ने ईरान को बड़े पैमाने पर निर्यात किया है। हालांकि, मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष और हमलों ने इस व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
    इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) अपने सदस्यों को ईरान और खाड़ी देशों के खरीदारों के साथ नए कॉस्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट (सीआईएफ) अनुबंधों से बचने की सलाह दी है। यह चेतावनी भी दी गई है कि संघर्ष से निर्यात बाधित हो सकता है और लागत बढ़ सकती है।

    भारत सालाना लगभग 60 लाख टन (MT) बासमती चावल का निर्यात करता है, जिसकी अधिकांश मांग सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन सहित मध्य पूर्व के देशों से आती है। ईरान ऐतिहासिक रूप से एक प्रमुख खरीदार रहा है, लेकिन चल रहे संघर्ष ने देश और इस क्षेत्र को होने वाले निर्यात को काफी धीमा कर दिया है या रोक दिया है