ड्रैगन का तिलिस्म तोड़ने की तैयारी, भारत ने बिछाई नई बिसात; रेयर अर्थ सप्लाई चेन के लिए इस देश से मिलाया हाथ
भारत रेयर अर्थ मैटेरियल के लिए चीन पर निर्भरता कम करने हेतु नए देश के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। यह कदम इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र ...और पढ़ें

रेयर अर्थ मैटेरियल के क्षेत्र में भारत को मिला नया साथी
HighLights
भारत रेयर अर्थ के लिए म्यांमार से सहयोग बढ़ा रहा है।
चीन 90% रेयर अर्थ प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है।
रेयर अर्थ EV, रक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं।
नई दिल्ली| आज के समय में रेयर अर्थ मैटेरियल टेक्नोलॉजी के सबसे जरूरी तत्व हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्टिक व्हीकल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और डिफेंस सेक्टर में बड़े पैमाने में होता है। दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के निर्यात में चीन की मजबूत पकड़ है, और वो इसे एक रणनीति के तहत इस्तेमाल करता है। भारत और चीन के बीच लगातार व्यापारिक रिश्तों में खींचतान देखने को मिली है।
चीन (China) जो पूरी दुनिया के 90 फीसदी रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में अपना कंट्रोल रखता है, उसने एक्सपोर्ट को लेकर सख्ती दिखाई है। भारत लंबे समय से रेयर अर्थ की निर्भरता में चीन के अलावा अन्य विकल्पों की तलाश में है, अब भारत की तलाश लगभग पूरी हो चुकी है।
भारत ने किया म्यांमार का रूख
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने म्यांमार का रूख किया है। बीते दिनों मांडले में एक माइनिंग फोरम की शुरुआत हुई। इस मौके पर म्यांमार में भारत के राजदूत अभय ठाकुर ने रेयर अर्थ के मामले में दोनों देशों के बीच बढ़ते आपसी सहयोग के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में माइनिंग सेक्टर में सहयोग बढ़ा है। दुर्लभ धातुएं और अन्य जरूरी खनिजों पर चर्चा के लिए भारतीय डेलिगेशंस ने दिसंबर 2024 और फरवरी 2026 के बीच म्यांमार का दौरा किया था।
अभय ठाकुर के अनुसार, मई-जून में सैन्य शासक से राष्ट्रपति बने मिन आंग ह्लाइंग ने भारत की आधिकारिक यात्रा की थी। इस दौरान भी रेयर अर्थ से जुड़े सहयोग के मामले पर उच्च स्तरीय बातचीत हुई थी।
90% रेयर अर्थ मैटेरियल की प्रोसेसिंग चीन में
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में भारी रेयर अर्थ मैटेरियल की लगभग आधी आपूर्ति म्यांमार के कचीन राज्य की खानों से होती है। जिन्हें बाद में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों और पवन टर्बाइनों को पावर देने वाले चुम्बकों में प्रोसेस्ड करने के लिए चीन भेजा जाता है।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत रेयर अर्थ की प्रोसेसिंग चीन में होती है। जिनका इस्तेमाल सोलर पैनल से लेकर स्मार्टफोन तक में होता है। साफ तौर पर कहें तो ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई सेक्टर्स में होता है।