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    देश में होगा ₹1.75 लाख करोड़ का खाने के तेल का आयात! सिर्फ 8 महीने में बढ़ गए 20% दाम, वजह क्या है?

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 02:05 PM (IST)

    भारत का खाद्य तेल आयात बिल चालू तेल वर्ष के पहले 8 महीनों में 20% बढ़कर ₹1.19 लाख करोड़ हो गया है, जिसके साल के अंत तक ₹1.75 लाख करोड़ तक पहुंचने का अ ...और पढ़ें

    खाने के तेल का आयात बिल तेजी से बढ़ा है

    खाने के तेल का आयात बिल तेजी से बढ़ा है

    HighLights

    1. खाद्य तेल आयात बिल 8 महीने में 20% बढ़कर ₹1.19 लाख करोड़।

    2. चालू तेल वर्ष के अंत तक ₹1.75 लाख करोड़ पहुंचने का अनुमान।

    3. कमजोर रुपया, मानसून अनिश्चितता, वैश्विक आपूर्ति में कमी प्रमुख कारण।

    नई दिल्ली| भारत कच्चे तेल के साथ ही खाद्य तेलों का भी बड़ा आयातक देश है। एक तरफ सरकार दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर देश में खाद्य तेलों (Edible Oil) के आयात का बिल भी बढ़ता जा रहा है। भारत के खाने के तेल आयात बिल चालू तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर-अक्टूबर) के पहले आठ महीनों में ही 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। सीजन के अंत तक इसकी आंकड़ा और बड़ा हो जाएगा।

    ₹1.75 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है बिल

    सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के सदस्यों के लिखे अपने मासिक पत्र में, SEA के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने कहा कि भारत खाद्य तेल के क्षेत्र में अपने सफर के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, और चेतावनी के संकेतों को नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है। चालू तेल वर्ष 2025-26 के शुरुआती 8 महीने में ही पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। (SEA) का अनुमान है कि तेल वर्ष के अंत तक यह ₹1.75 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा।

    कितने बढ़े तेल के दाम?

    देश का खाद्य तेल आयात बिल, जो पिछले साल ₹1.61 लाख करोड़ था, अब ये रिकॉर्ड ₹1.75 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। चालू तेल वर्ष के नवंबर से जून के दौरान ही आयात 104 लाख टन से अधिक हो चुका है, जिससे आयात बिल ₹99,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.19 लाख करोड हो गया है, यानी मात्र आठ महीनों में लगभग ₹20,000 करोड़ की बढ़ोतरी हुई जो 20.20 फीसदी के आसपास है।

    क्यों बढ़ रहे हैं तेल के दाम

    SEA के अध्यक्ष अस्थाना ने कहा कि भारतीय रुपये के लगातार कमजोर होने के कारण आयात महंगा हो गया है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने कहा कि सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमान और कई तिलहन उत्पादक क्षेत्रों में बुवाई में देरी सहित मौसम संबंधी अनिश्चितताएं घरेलू उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने जानकारी दी कि वैश्विक घटनाक्रम से दबाव और बढ़ रहा है।

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    इंडोनेशिया का बढ़ता बायोडीजल कार्यक्रम ताड़ के तेल की अधिक मात्रा को खाद्य उपयोग से ईंधन की ओर मोड़ रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति कम हो रही है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, माल ढुलाई और बीमा की लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल की कीमतें हाई हैं।