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    महंगाई का एक और झटका! ₹10-15 प्रति किलो महंगा हुआ खाने का तेल, मौजूदा कीमतें भी जानिए

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 08:10 PM (GMT+05:30)

    खाने के तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिसमें मूंगफली, सोयाबीन और सरसों तेल शामिल हैं। किसानों द्वारा कम आवक, त्योहारी मांग और रुपये के कमजोर ...और पढ़ें

    खाने के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी

    खाने के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी

    HighLights

    1. मूंगफली, सोयाबीन, सरसों तेल की कीमतों में भारी वृद्धि।

    2. किसानों द्वारा कम आवक और त्योहारी मांग मुख्य कारण।

    3. रुपये की गिरावट और ड्यूटी बढ़ने से आयातित तेल महंगे।

    नई दिल्ली| खाद्य तेल हर घर में रोज इस्तेमाल किए जाते हैं। घर की रसोई से लेकर होटलों के खाने और स्ट्रीट फूड्स में बिना तेल के खाना संभव नहीं है। अब खाने के तेल (Edible oil) की कीमत में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। मूंगफली. सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (CPO), पामोलीन और बिनौला तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। बाजार के जानकारों ने मीडिया को बताया कि किसानों को सोयाबीन जैसी फसलों के पहले अच्छे दाम मिल चुके हैं और वे कम दाम पर बिक्री से कतरा रहे हैं जिससे बाजार में आवक कम हो रही है। वहीं बिनौले की उपलब्धता ना के बराबर है।

    बीते हफ्ते तेल की कीमतों में भारी उछाल

    इस समय खाद्य तेलों की त्योहारी मांग बढ़ी है। इसके अलावा बरसात के मौसम में अचार बनाने वाली कंपनियों के बीच सरसों की मांग बढ़ रही है। बीते सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट बढ़ने से इंपोर्टेड खाद्य तेलों की कीमतों में और अधिक मजबूती देखी गई है। साथ ही पिछले हफ्ते सरकार ने पाम-पामोलीन पर लगाई जाने वाली ड्यूटी को भी बढ़ाया है। इन मिल-जुले कारणों के चलते बीते हफ्ते सभी खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी दिखाई दी।

    सरसों की मांग बढ़ी, आवक कम

    मीडिया ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि सरसों की आवक कम है और मांग अधिक है। कुछ सप्ताह पहले की स्थिति से उलट, सरसों तेल का दाम अब सोयाबीन और पाम-पामोलीन से ₹10-15 प्रति किलो महंगा हो गया है। इस परिस्थिति में पिछले हफ्ते में सरसों के तेल के दाम में तेजी देखी गई है।

    तेजी से घटी सोयाबीन की आवक

    सूत्रों ने बताया कि सोयाबीन की आवक मंडियों में तेजी से घटी है, बीते सप्ताह मंडियों में इसकी आवक घटकर 60 हजार बोरी के आसपास थी जो अब घटकर 10 हजार बोरी के बीच रह गई। बता दें कि सोयाबीन के प्रत्येक दिन की खपत मांग लगभग ढाई से तीन लाख बोरी की है। कीमतों में कमी के कारण सोयाबीन की आवक में कमी दिखी, जिसके बाद महाराष्ट्र के लातूर में सोयाबीन के बड़े प्लांट संचालकों ने किसानों को आकर्षित करने के लिए आगामी 10 अगस्त के बाद के खरीद का भाव ₹7,700 रुपये क्विंटल से बढ़ाकर ₹8,100 क्विंटल कर दिया है। इसके चलते पिछले हफ्ते सोयाबीन तेल-तिलहन में सुधार देखा गया।

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    मूंगफली के तेल में सुधार दिखा

    मूंगफली की बात करें तो उपलब्धता कम रहने के बीच इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। बिनौला तेल की उपलब्धता बेहद कम होने के बीच ब्रांडेड कंपनियों की ओर से मूंगफली की मांग बढ़ी है। मूंगफली का सरकार के पास अभी का और दो साल पहले का स्टॉक है। निरंतर मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन में भी बढ़त दिखी। वहीं बीते सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपये के और कमजोर होने से आयातित तेलों के दाम बढ़ गये हैं।

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    क्या हैं मौजूदा भाव?

    • सूत्रों के मुताबिक बीते सप्ताह सरसों दाना ₹350 की बढ़ोतरी के ₹8,075-8,100 प्रति क्विंटल और सरसों के तेल में ₹650 की बढ़ोतरी के साथ ₹16,550 प्रति क्विंटल सुधार हुआ। वहीं सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल क्रमश: 90-90 रुपये की बढ़ोतरी के साथ क्रमश: ₹2,705-2,805 और ₹2,705-2,855 टिन (15 किलो) रहे।
    • सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज के थोक भाव में भी बढ़ोतरी देखी गई है। दोनों में ₹375-₹375 रुपये का सुधार आया है, जिसके बाद ताजा भाव क्रमश: ₹7,550-₹7,600 और ₹7,400-₹7,475 प्रति क्विंटल हैं।
    • इंडस्ट्रियल मांग में तेजी के बीच पिछले सप्ताह मूंगफली तिलहन का दाम में ₹400 का सुधार आया, जिसके बाद ₹7,350-₹7,925 रुपये क्विंटल कीमत रही। मूंगफली तेल गुजरात ₹1,000 के सुधार के साथ ₹17,000 क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल ₹105 के सुधार के साथ 2,665-2,965 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।