1950 में पानी के भाव मिलता था पेट्रोल-डीजल, आज 1 लीटर की कीमत में तब फुल हो जाती थी कई गाड़ियों की टंकी!
क्या आप जानते हैं कि 1950 के दशक में पेट्रोल और डीजल का भारत में क्या दाम था? आइए जानते हैं कि आजादी के बाद पेट्रोल डीजल के क्या रेट थे? ...और पढ़ें
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petrol diesel price 1950
HighLights
1950 के दशक में पेट्रोल कितने पैसे प्रति लीटर था?
डीजल की कीमत तब 15-30 पैसे प्रति लीटर हुआ करती थी।
सरकारी नियंत्रण हटने और टैक्स बढ़ने से दाम बढ़े।
नई दिल्ली: आजकल पेट्रोल पंप पर जाकर 500 रुपये का तेल भरवाना भी कम लगता है। दिल्ली सहित देश के कई शहरों में पेट्रोल 102 रुपये प्रति लीटर के पार बिक रहा है। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि भारत में एक दौर ऐसा भी था, जब ईंधन की कीमतें पानी से भी सस्ती हुआ करती थीं?
आइए 76 साल पीछे, 1950 के दशक में चलते हैं और समझते हैं कि तब पेट्रोल-डीजल के दाम क्या थे और वहां से यहां तक का सफर कैसा रहा।
1950 के दशक में क्या थे रेट?
आजादी के कुछ समय बाद, यानी 1950 के दशक में भारत में पेट्रोल और डीजल (petrol diesel)दोनों के ही दाम 1 रुपये से भी बहुत कम थे। उस दौर में पेट्रोल महज 25 से 27 पैसे प्रति लीटर के आसपास हुआ करता था। डीजल तो इससे भी सस्ता था। उस समय इसकी कीमत 15 से 20 पैसे प्रति लीटर (या अधिकतम 30 पैसे) हुआ करती थी। इसका मतलब है कि आज आप जितने रुपये में 1 लीटर पेट्रोल खरीदते हैं, 1950 में उतने ही पैसों में आप करीब 400 लीटर पेट्रोल खरीद सकते थे।
27 पैसे से 100 रुपये पार तक
1950 से 1990 के बीच 40 सालों में कीमतों में बहुत धीमी गति से बढ़ोतरी हुई (पैसे से ₹4 तक), लेकिन 2004 के बाद के मात्र 20 सालों में कीमतें रॉकेट की तरह 100 रुपये के पार पहुंच गईं।
पहले इतना सस्ता क्यों था तेल?
1950 के दशक में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों का आम आदमी की जेब पर सीधा असर नहीं पड़ता था। उस वक्त भारत सरकार 'प्राइस कंट्रोल सिस्टम' (नियंत्रित मूल्य प्रणाली) के तहत दाम खुद तय करती थी। इसे बाद में Administered Pricing Mechanism (APM) कहा गया। इसके अलावा, तब ईंधन पर लगने वाला टैक्स भी आज के मुकाबले ना के बराबर था।
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फिर कैसे और कब बदल गया गणित?
जैसे-जैसे देश में गाड़ियों की संख्या बढ़ी और आयात पर निर्भरता अधिक हुई, सरकार के लिए सब्सिडी देना मुश्किल हो गया।
1. जून 2010 में सरकार ने पेट्रोल को सरकारी नियंत्रण (Deregulation) से मुक्त कर दिया।
2. अक्टूबर 2014 में डीजल की कीमतें भी बाजार आधारित व्यवस्था के तहत तय होने लगीं।
3. साल 2017 से हर दिन सुबह पेट्रोल-डीजल के रेट अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर-रुपये की विनिमय दर के हिसाब से बदलने लगे।
कैसे बढ़े दाम?
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार देखें तो 1989 में दिल्ली में पेट्रोल 8.50 रुपये और डीजल 3.50 रुपये प्रति लीटर पर मिलता था। इसके बाद 1990 के दशक, 2000 और फिर 2010 के बाद कीमतों में तेजी से बदलाव देखने को मिला। इसके साथ ही जून 2010 की बात करें तो पेट्रोल और अक्टूबर 2014 से डीजल की कीमतें बाजार आधारित व्यवस्था के तहत तय होने लगीं।
आज पेट्रोल का जो रेट आप चुकाते हैं, उसमें बेस प्राइस के अलावा डीलर कमीशन, एक्साइज ड्यूटी (केंद्र का टैक्स) और वैट (राज्य का टैक्स) का बहुत बड़ा हिस्सा शामिल होता है। यही वजह है कि 1950 का 27 पैसे वाला पेट्रोल आज 100 रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है।