होर्मुज टेंशन के बीच भारत का ₹40 हजार करोड़ का मेगा प्लान! समंदर के नीचे 2000Km लंबी पाइपलाइन, ओमान से गुजरात आएगी गैस
मिडिल ईस्ट में होर्मुज संकट के कारण भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है। अगर यह प्लान मंजूरी होता है, तो ओमान से गुजरात तक समुद्र ...और पढ़ें

ओमान से गुजरात तक गैस पाइपलाइन बिछाने के प्लान पर हो रहा काम
HighLights
भारत का ₹40,000 करोड़ का ओमान-गुजरात गैस पाइपलाइन प्लान।
होर्मुज संकट के कारण ऊर्जा सुरक्षा हेतु यह कदम उठाया गया।
2000 किमी लंबी पाइपलाइन समुद्र के नीचे बिछाई जाएगी।
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया में तेल का संकट छा गया। जिस होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का 20 से 25 फीसदी कच्चे तेल और गैस का ट्रेड होता है। लेकिन इस समय यह रूट बाधित है। इसकी वजह से एनर्जी संकट पैदा हो गया। भारत अपनी जरूरत का 40 से 50 फीसदी कच्चा तेल और लगभग 80 फीसदी एलपीजी इसी रास्ते से आयात करता है। लेकिन संघर्ष शुरू होने और नाकाबंदी के बाद से तेल और गैस का आयात प्रभावित हुआ है। इसी संकट को देखते हुए भारत ने एक मेगा प्लान तैयार किया है। यह प्लान है समुद्र के नीचे गैस पाइपलाइन बिछाने का।
प्रस्तावित मेगा प्लान के तहत भारत समुद्र के रास्ते करीब 2000 किलोमीटर की गैस पाइपलाइन बिछाएगा जो ओमान से गुजरात को जोड़ेगी। यानी खाड़ी देशों से आने वाली गैस समुद्री पाइपलाइन के जरिए सीधे भारत के गुजरात पहुंचेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, इस पाइपलाइन की अनुमानित लागत लगभग 40000 करोड़ रुपये है।
होर्मुज संकट ने किया मजबूर
होर्मुज में नाकेबंद की वजह से वैश्विक कच्चे तेल और गैस का आयात निर्यात प्रभावित हुआ है। रूट बंद होने की वजह से सिर्फ गैस, तेल ही नहीं खाद्य सामग्री का भी आयात-निर्यात नहीं हो पा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा के एक अहम प्राथमिकता के तौर पर उभरने के साथ ही, सरकार ओमान को भारत से जोड़ने वाली प्रस्तावित परियोजना पर एक बार फिर से ध्यान दे रही है।सरकार ओमान को भारत से जोड़ने वाली प्रस्तावित परियोजना पर एक बार फिर से ध्यान दे रही है।
खबरें और भी
भारत में एनर्जी का संकट बना हुआ है। धीरे-धीरे इसका असर आम जनता पर भी डाला जाने लगा है। महानगर गैस ने महाराष्ट्र में CNG की कीमतों में प्रति किलो 2 रुपये का इजाफा किया है।
इतना ही नहीं अन्य खाद्य सामग्रियां भी महंगी हो रही है। अमूल और मदर डेयरी जैसे बड़े दूध ब्रांड ने प्रति लीटर 2 रुपये का इजाफा किया है। इन कंपनियों को गैस और डीजल महंगे रेट पर मिल रही है। इसी वजह से कंपनियों ने दाम में इजाफा किया।
भारत में बढ़ रही है गैस की मांग
भारत में नेचुरल गैस की मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार मौजूदा खपत लगभग 190-195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (mmscmd) होने का अनुमान है, जबकि अनुमानों से पता चलता है कि 2030 तक मांग बढ़कर लगभग 290-300 mmscmd तक पहुंच सकती है।
अकेले LNG के आयात में ही काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जो इस दशक के खत्म होने से पहले 180-200 mmscmd तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि अब सरकार समुद्र में पाइप बिछाने के प्लान पर फिर से काम करने लगी है।
पेट्रोलियम मंत्रालय GAIL, इंजीनियर्स इंडिया और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसी सरकारी कंपनियों से इस प्रोजेक्ट के लिए एक विस्तृत फिजिबिलिटी असेसमेंट तैयार करने को कहने की योजना बना रहा है।
40000 करोड़ रुपये की आएगी लागत, पूरा होने में लगेगा 5 से 7 साल का समय
अगर ओमान से गुजरात के बीच गैस पाइपलाइन बिछाने के प्लान को मंजूरी मिलती है तो यह भारत आसानी से खाड़ी देशों से गैस का आयात कर सकता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, इस पाइपलाइन की अनुमानित लागत लगभग 40,000 करोड़ रुपये (4.7-4.8 अरब डॉलर) है और अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो इसे पूरा होने में पाँच से सात साल का समय लग सकता है।
एक अधिकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया से आने वाली एक विशेष पाइपलाइन गैस की ज्यादा भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सप्लाई सुनिश्चित करेगी, साथ ही समुद्री मार्ग की रुकावटों और बीच में पड़ने वाले देशों पर निर्भरता को भी कम करेगी।
मिडिल ईस्ट-इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन प्रोजेक्ट की क्या होगी खासियत?
अधिकारियों ने बताया कि यह पाइपलाइन अरब सागर से होते हुए ओमान और UAE से गुजरेगी, और इस दौरान यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों से दूर रहेगी। इस प्रोजेक्ट से भारत को ओमान, UAE, सऊदी अरब, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और कतर जैसे देशों के गैस भंडारों का इस्तेमाल करने का मौका भी मिलेगा।
इसके लिए करीब 2000 किलोमीटर लंबे पानी के नीचे पाइपलाइन का नेटवर्क बिछाना होगा। लंबे पाइपलाइन का यह नेटवर्क अरब सागर के नीचे से गुज़रेगा और ओमान को सीधे गुजरात के समुद्री तट से जोड़ेगा।
अनुमान है कि इस पूरे इलाके में लगभग 2,500 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस के भंडार मौजूद हैं। लगभग 3,450 मीटर की गहराई पर मौजूद यह पाइपलाइन, दुनिया भर में पानी के नीचे बिछाई गई सबसे गहरी गैस पाइपलाइनों में से एक होगी।
समुद्र के बेहद नीचे गैस पाइपलाइन को बिछाने और उसकी मरम्मत करने के टेक्नोलॉजी में बहुत सुधार हुआ है। यानी इस तरह के प्रोजेक्ट को किया जा सकता है। और पूरा करना भी मुमकिन है।
सरकार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में SAGE ने बताया है कि उसने समुद्र तल की स्थितियों की जांच करने के लिए, प्रस्तावित रास्ते पर लगभग 3000 मीटर लंबी एक टेस्ट पाइपलाइन पहले ही बिछा दी है, जिस पर लगभग 25 करोड़ रुपये का खर्च आया है।