भारत की सबसे महंगी सुरंग, जमीन से 11578 फीट की ऊंचाई पर 13KM लंबी 'टनल'; हर एक किलोमीटर पर खर्च हुए 500 करोड़
भारत की सबसे महंगी सुरंग 'जोजिला टनल' श्रीनगर-कारगिल-लेह हाईवे पर 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही है। 13.153 किमी लंबी इस सुरंग की लागत ₹6,800 करोड़ है। ...और पढ़ें

कश्मीर में बनाई जा रही है जोजिला टनल
HighLights
भारत की सबसे महंगी जोजिला टनल, ₹6,800 करोड़ लागत।
11,578 फीट ऊंचाई पर श्रीनगर-लेह हाईवे पर स्थित।
लद्दाख को जोड़ेगी, यात्रा समय 2 घंटे से घटकर 30 मिनट होगा।
नई दिल्ली। भारत में पिछले 10 सालों में कई बड़े एक्सप्रेसवे समेत बड़े रेलवे इंफ्रा प्रोजेक्ट्स का निर्माण हुआ है। इनमें फ्लाईओवर, रेलवे ब्रिज से लेकर रोड टनल तक शामिल हैं। इस अवधि में भारत की सबसे महंगी सुरंग (Indias Most Expensive Tunnel) का निर्माण भी हुआ है। क्या आप जानते हैं देश की सबसे बड़ी रोड टनल कहां है और इसकी लागत कितनी है। भारत की सबसे महंगी सुरंग के तौर पर 'जोजिला टन' को जाना जाता है, जो ज़ोजिला दर्रा श्रीनगर-कारगिल-लेह नेशनल हाईवे (NH-1) पर 11,578 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है।
ज़ोजिला टनल के बनने से सर्दियों के मौसम में भारी बर्फ़बारी और खतरनाक हिमस्खलन के कारण दर्रा बंद होने और लद्दाख का देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह संपर्क कट जाने की समस्या अब खत्म हो जाएगी। आइये आपको बताते हैं इस सुरंग की लंबाई से लागत की पूरी डिटेल
कहां स्थित है जोजिला टनल?
- ज़ोजिला टनल, पश्चिमी हिमालय के ऊंचे और दुर्गम इलाकों में सीधे काटकर बनाई गई है। यह सुरंग भारतीय इंजीनियरिंग के गौरव का एक बेहतरीन उदाहरण है।
- नेशनल हाईवे-1 पर बालटाल और मीनामार्ग के बीच बन रही लगभग 13 किलोमीटर लंबी, दोनों तरफ से आने-जाने की सुविधा वाली ज़ोजिला सुरंग भारत के सबसे बड़े पहाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है।
- इस सुरंग की कुल लंबाई 13.153 किमी है। अप्रोच रोड और कनेक्टिंग पुलों को मिलाकर पूरे कॉरिडोर की लंबाई 31 किलोमीटर से ज़्यादा है।
- इस सुरंग को लगभग ₹6,800 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है यानी हर एक किलोमीटर के निर्माण पर 523 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
- 2,900 मीटर से 3,310 मीटर की ऊंचाई पर बनी यह सुरंग दुनिया के सबसे मुश्किल इलाकों में से एक में भारतीय इंजीनियरिंग की एक बड़ी उपलब्धि है।
जोजिला सुरंग से क्या फायदे
-यह सुरंग पश्चिम में कश्मीर घाटी और उत्तर-पूर्व में लद्दाख की द्रास और सुरू घाटियों के बीच एक पुल का काम करती है।
-इसके पूरा होने पर, सोनमर्ग और मीनामर्ग के बीच यात्रा का समय लगभग दो घंटे से घटकर करीब 30 मिनट रह जाएगा, जिससे समय और ईंधन की काफी बचत होगी।
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-खास बात है कि यह टनल प्रोजेक्ट हिमस्खलन और खराब मौसम की वजह से होने वाले हादसों के जोखिम और रुकावटों को भी कम करेगा।