JP Associates पर ₹55357 करोड़ का पहाड़ जैसा कर्ज, एक चौथाई कीमत में अदाणी बनेंगे मालिक; ₹40822Cr का नुकसान किसे?
अदाणी समूह ने जयप्रकाश गौड़ की JP Associates को दिवालिया प्रक्रिया के तहत ₹14535 करोड़ में खरीदने की बोली जीती है। कंपनी पर ₹55357 करोड़ के कर्ज के मु ...और पढ़ें

JP Associates खरीद में लेंडर्स को सहना होगा घाटा
HighLights
अदाणी समूह ने JP Associates को ₹14535 करोड़ में खरीदा।
कंपनी पर ₹55357 करोड़ का भारी कर्ज था।
बैंकों को ₹40822 करोड़ का बड़ा 'हेयरकट' झेलना होगा।
नई दिल्ली। जयप्रकाश गौड़ की जेपी एसोसिएट्स (JP Associates) दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। इसे खरीदने की बोली गौतम अदाणी की अदाणी समूह ने जीती है। अदाणी ग्रुप ने जेपी ग्रुप (JP Group) की पैरेंट कंपनी को खरीदने के लिए 14535 करोड़ की बोली लगाई है। यह बोली कंपनी के ऊपर कर्ज के मुकाबले बहुत कम है। यानी कंपनी के ऊपर अदाणी द्वारा लगाई गई बोली से कई गुना ज्यादा कर्ज है।
अदाणी ने इतने कम रुपये में बोली लगाई है कि उससे कर्ज के 50 फीसदी की भी भरपाई नहीं की जा सकती है। JP Associates ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी थी कि 30 अप्रैल 2026 तक उसके ऊपर कुल 55357 करोड़ रुपये का कर्ज है। इस कर्ज के मुकाबले अदाणी समूह लगभग एक चौथाई में पूरी कंपनी के मालिक बनेंगे। एक समय जब बोली प्रक्रिया चल रही थी तो ऐसा लग रहा था कि जेपी ग्रुप के मालिक वेदांता के अनिल अग्रवाल बनेंगे। लेकिन फिर कहानी ऐसी पलटी कि बाजी गौतम अदाणी के हाथ में चली गई।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर ₹40822 करोड़ का नुकसान कौन सहेगा? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
JP Associates के मालिक बनेंगे अदाणी, लेकिन इन्हें होगा ₹40822 करोड़ का घाटा
जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के मालिक गौतम अदाणी बनेंगे। लेकिन इस खरीदारी से ₹40822 करोड़ का नुकसान उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों को उठाना पड़ेगा, जिन्होंने JAL को कर्ज दिया था।
Jaiprakash Associates Limited (JAL) को लोन देने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों की लिस्ट बहुत लंबी है। कंपनी ने लगभग 19 बैंकों/वित्तीय संस्थाओं से लोन ले रखा है। अब जब जेपी एसोसिएट्स दिवालिया प्रक्रिया में अदाणी ग्रुप के हाथों बिक रही है तो ₹40822 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ेगा। इस नुकसान को वित्तीय भाषा में हेयर कट कहा जाता है।
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इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की प्रक्रिया के तहत जब कोई कंपनी दिवालिया (Bankrupt) होती है, तो उसके बकाया को चुकाने के लिए लेनदारों को जो समझौता करना पड़ता है, उसे वित्तीय भाषा में 'हेयरकट' (Haircut) कहते हैं। यानी अब ₹40822 करोड़ का नुकसान लेंडर्स को उठाना पड़ेगा। यानी लेंडर्स को ₹40822 करोड़ का हेयरकट उठाना पड़ेगा।
अनिल अग्रवाल की वेदांता ने लगाई थी सबसे ऊंची बोली
जयप्रकाश गौड़ की जेपी एसोसिएट्स को खरीदने के लिए सबसे ऊंची बोली अनिल अग्रवाल की वेदांता ने लगाई थी। उसने लगभग 17 हजार करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। लेकिन पेमेंट करने का उसका प्लान अदाणी के प्लान से अलग था।
वेदांता 17 हजार करोड़ रुपये की पेमेंट करने में लगभग 5 साल लगाता। वहीं, अदाणी ने इसे 2 साल में पूरा करने का प्लान दिया था। यही कारण है कि लेंडर्स की कमेटी ने अदाणी ग्रुप को चुना।
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