लोकसभा में पास हुआ 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल', ₹2000 से ज्यादा की UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? RBI ने दिया जवाब
लोकसभा ने 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल' पारित किया, जिसका उद्देश्य यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करना और विदेशी निवेश को आकर्षित ...और पढ़ें

टैक्सेशन एंड अदर लॉज लोकसभा में पास (AI फोटो)
HighLights
लोकसभा ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज बिल पारित किया
बिल से यूपीआई पर MDR लागू हो सकता है
आरबीआई ने यूपीआई उपयोगकर्ताओं को न घबराने की सलाह दी
नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को बिना किसी बहस के 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल' या ToLA पास कर दिया गया है। इस बिल का मकसद 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में बदलाव करना है, जिससे यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो सकता है।
इस एक्ट में बदलाव के अलावा, बिल में 'फाइनेंस एक्ट 2026' और 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' में भी बदलाव करने और विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट देने के लिए जून में जारी किए गए एक अध्यादेश को रद्द करने का प्रस्ताव है।
इन मुद्दों पर है फोकस
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इसके तीन मुख्य विषय हैं : विदेशी पूंजी को आकर्षित करना, 'मेक इन इंडिया' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (कारोबार में आसानी)। बताया जाता है कि विदेशी कंपनियां अक्सर इस बात को लेकर अनिश्चित रहती हैं कि क्या भारत में या भारत के जरिए काम करने से उन पर कोई अप्रत्याशित टैक्स देनदारी तो नहीं बनेगी।
बिल के विभिन्न प्रस्ताव स्पष्ट, स्थिर और अनुमान लगाने योग्य टैक्स सिस्टम के साथ-साथ मनचाही टैक्स व्यवस्था पाने की प्रोसेस भी देते हैं। ऐसा ही एक प्रस्ताव भारत से मैनेज होने वाले 'एलिजिबल इन्वेस्टमेंट फंड' (EIF) के लिए अपनी ग्लोबल इनकम पर टैक्स छूट पाने की शर्तों की संख्या को 13 से घटाकर 5 करना है।
यूपीआई से पेमेंट पर स्पष्टीकरण
इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 4 अगस्त को संसद में ये विधेयक पेश किया था, जो MDR लागू करने का प्रस्ताव देता है। यह चार्ज 2000 रुपये से ज्यादा की लिमिट पर लागू हो सकता है। ₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर MDR चार्ज को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें चल रही हैं। लेकिन RBI ने साफ कर दिया था कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और आम UPI यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं है।
RBI गवर्नर का बयान
बुधवार को रेपो रेट की घोषणा के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा से पूछा गया था कि क्या UPI ट्रांजेक्शन पर कोई चार्ज लगेगा। इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "अभी इस बारे में बात करना बहुत जल्दबाजी होगी। सरकार अभी भी इसमें बदलाव की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इसकी लागत किसी न किसी को तो उठानी ही होगी। हम सभी चाहते हैं कि यह पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत होता रहे, इस मामले में आगे क्या होता है, यह देखने के लिए इंतजार करें।"
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क्या है MDR फीस?
MDR का मतलब है मर्चेंट डिस्काउंट रेट। यह वह फीस है जो कोई बिजनेस, ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट (जैसे क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या UPI) स्वीकार करने के लिए बैंक या पेमेंट प्रोसेसर को देता है। यह फीस कुल ट्रांजेक्शन राशि का एक छोटा प्रतिशत होती है।
चर्चा ये है कि 2000 रुपये से अधिक यूपीआई पेमेंट पर ये चार्ज लगाया जाएगा, मगर फिलहाल इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है और RBI ने आम UPI यूजर्स से न घबराने को कहा है।