LPG vs Induction: किस पर खाना बनाना पड़ता है सस्ता, आपकी किचन के लिए कौन सा ऑप्शन है ज्यादा बेहतर? पूरा कैलकुलेशन
LPG vs induction: मिडिल ईस्ट में तनाव और देश में गैस की किल्लत के बीच लोगों ने इंडक्शन का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। आइए जानते हैं कि गैस और इंडक्शन में क ...और पढ़ें

LPG vs Induction: किस पर खाना बनाना पड़ता है सस्ता, आपकी किचन के लिए कौन का ऑप्शन है ज्यादा बेहतर? पूरा कैलकुलेशन

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| गैस सिलेंडर पर खाना बनाना सस्ता पड़ता है या फिर इंडक्शन चूल्हे (LPG vs induction) पर? यह एक ऐसा सवाल है, जो आज लगभग हर भारतीय घरों में उठने लगा है।
देश में गैस के बढ़ते दाम (LPG cylinder price hike), सप्लाई की अनिश्चितता और बिजली से चलने वाले इंडक्शन के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों को दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है।
दरअसल, हाल के समय में मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव, खासकर इजरायल-ईरान संघर्ष ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजार (LPG shortage India) को प्रभावित किया है। इसका असर भारत की रसोई तक पहुंच सकता है, क्योंकि देश में इस्तेमाल होने वाले LPG का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है।
भारत में गैस पर निर्भरता क्यों बड़ी समस्या है?
भारत अपनी जरूरत का करीब 57% LPG आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। अगर उस इलाके में तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो गैस की सप्लाई महंगी या धीमी हो सकती है।
इसी वजह से कई शहरों में लोगों ने गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें देखी हैं। होटल, ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट भी गैस की देरी से डिलीवरी की समस्या झेल रहे हैं।
एलपीजी vs इंडक्शन: दोनों में क्या फर्क?
भारतीय घरों में LPG दशकों से इस्तेमाल हो रहा है, क्योंकि इसमें तुरंत तेज आंच मिलती है और लगभग हर बर्तन इसमें इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन इंडक्शन कुकटॉप एक अलग तकनीक पर काम करता है। इसमें गर्मी सीधे बर्तन तक पहुंचती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी कम होती है।
| पहलू | LPG गैस | इंडक्शन |
| ऊर्जा दक्षता (energy efficiency) | लगभग 40% | करीब 90% |
| ईंधन | गैस सिलेंडर | बिजली |
| बर्तन | सभी बर्तन | खास इंडक्शन बर्तन |
| बिजली कट होने पर | काम करता है | काम नहीं करता |
दोनों में कौन पड़ता है ज्यादा सस्ता?
मान लीजिए, एक सामान्य 14.2 किलो LPG सिलेंडर की कीमत लगभग ₹913 है, जो महीने भर का खाना बनाता है। दूसरी तरफ, इंडक्शन पर उतना ही खाना पकाने के लिए करीब 78 यूनिट बिजली लगती है।
अगर बिजली की कीमत ₹8 प्रति यूनिट है, तो खर्च होगा:
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78 × 8 = ₹624
यानी लगभग ₹289 तक की बचत संभव है।
इसका मतलब है कि कई मामलों में इंडक्शन गैस से सस्ता पड़ सकता है, क्योंकि इसकी ऊर्जा दक्षता (induction vs LPG efficiency) ज्यादा होती है।
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सालभर में कितनी हो सकती है बचत?
कुछ ऊर्जा अध्ययनों के मुताबिक, भारत में इंडक्शन से खाना बनाना नॉन-सब्सिडी LPG से करीब 37% तक सस्ता (induction cheaper than gas) पड़ सकता है। कई घरों में सालभर में ₹2000 से ₹13000 तक बचत भी देखी गई है।
दिल्ली-मुंबई में PNG का विकल्प
दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में कुछ घर PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) इस्तेमाल करते हैं। इसमें सिलेंडर बुक कराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन इसकी कीमत भी अंतरराष्ट्रीय LNG बाजार से जुड़ी रहती है।
क्या पूरी तरह इंडक्शन पर शिफ्ट होना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी पूरी तरह बदलाव जरूरी नहीं है। सबसे अच्छा तरीका हाइब्रिड किचन हो सकता है।
- भारी खाना, तड़का या प्रेशर कुकर- LPG
- चाय, दूध उबालना, खाना गर्म करना- इंडक्शन
इससे गैस की खपत कम होती है और बिजली का फायदा भी मिलता है।
बड़ा सवाल: भारत की ऊर्जा सुरक्षा का क्या?
भारत की रसोई अभी भी विदेशी गैस पर काफी निर्भर है। वहीं बिजली का बड़ा हिस्सा देश के अंदर पैदा होता है और धीरे-धीरे नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ रही है। इसलिए भविष्य में इलेक्ट्रिक कुकिंग भारत की ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा बन सकती है।
अभी के हालात में LPG पूरी तरह खत्म होने वाला नहीं है, लेकिन यह भी साफ है कि इंडक्शन धीरे-धीरे सस्ता और व्यावहारिक विकल्प बन रहा है। आने वाले समय में भारतीय किचन में गैस और इंडक्शन का कॉम्बिनेशन ही सबसे समझदारी भरा समाधान हो सकता है।
