Explainer: जिस LPG से पकती है दो वक्त की रोटी, वह भारत में कहां से आती है? प्रोडक्शन से सप्लाई तक की कहानी
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण भारत की एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हो रही है, क्योंकि देश अपनी 60% से अधिक एलपीजी आयात पर निर्भर है, जिसका अधिकांश हिस् ...और पढ़ें

Explainer: जिस LPG से पकती है दो वक्त की रोटी, वह भारत में कहां से आती है? प्रोडक्शन से सप्लाई तक की कहानी
नई दिल्ली। पश्चिमी एशिया जिसे हम मिडिल ईस्ट भी कहते हैं। इस समय तप रहा है। युद्ध की आग में। इसकी आंच धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है। यह इतनी तेज हो चुकी है कि इसकी आंच आप भी पहुंचना शुरू हो चुकी है। भले ही युद्ध ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच हो रहा है। लेकिन इसके ताप का असर पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। इसका सबसे ज्यादा असर तेल और गैस की सप्लाई (Oil Gas Supply) पर पड़ रहा है।
जो एनर्जी आपके चूल्हे के जरिए खाना बनाने में खर्ज होनी चाहिए वह इस समय मिडिल ईस्ट में बम बारूद के रूप में खत्म हो रही है। इन बम-बारूद और गोलों की वजह से आपके घर में जो दो वक्त की रोटी बनती है उस पर असर पड़ना शुरू हो चुका है। भारत के अलग-अलग शहरों में LPG सिलेंडर के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। बड़े-बड़े शहरों में रेस्टोरेंट में एलपीजी सप्लाई बाधित होने से ताला लगना शुरू हो चुका है। एलपीजी भारत कहां से लेता है और आपके घर तक कैसे पहुंचती है? जानेंगे पूरी कहानी इस एक्सप्लेनर में।
LPG का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है भारत
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है। मिडिल ईस्ट में मची तबाही की वजह तेल और गैसों से लदे बड़े-बड़े जहाज होर्मुज ऑफ स्ट्रेट को पार ही नहीं कर पा रहे हैं। यह इलाका ईरान की कंट्रोल में आता है। युद्ध के बाद से यहां से जहाजों का बेड़ा आगे नहीं पढ़ पा रहा है।
यही वजह की तेल और गैस जैसी जरूरी वस्तु की सप्लाई बाधित हो रही है। 2026 की शुरुआत तक, भारत अपनी खपत का लगभग 88 परसेंट कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। नैचुरल गैस के मामले में, देश की लगभग आधी जरूरतें विदेश से खरीदकर पूरी होती हैं।
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होर्मुज स्ट्रेट दुनिया भर में तेल और नेचुरल गैस सप्लाई का 20 परसेंट संभालता है। अब आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह से एनर्जी का क्राइसिस अब और भी बढ़ सकता है अगर यह युद्ध नहीं रुका।
सप्लाई बाधित हुई तो भारत ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करके रिफाइनरी को घरेलू इस्तेमाल के लिए प्रोडक्शन बढ़ाने का ऑर्डर दिया है, जिससे हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को काफी सप्लाई पाने में मुश्किल हो रही है। देश की लगभग 65 परसेंट LPG की जरूरत इंपोर्ट (India LPG Import) से पूरी होती है, और इनमें से ज्यादातर शिपमेंट सऊदी अरब, कतर और UAE जैसे खाड़ी देशों से आते हैं। बाकी डिमांड घरेलू प्रोडक्शन से पूरी होती है।
इस नए संकट ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई पर असर डालना शुरू कर दिया है, जो एक जरूरी फ्यूल है जिसका इस्तेमाल पूरे भारत में घरों और कमर्शियल जगहों पर बड़े पैमाने पर होता है।
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LPG का कितना प्रोडक्शन करता है भारत और क्या है LPG की खपत?
भारत LPG का प्रोडक्शन देश में तो करता है, लेकिन यह कुल डिमांड को पूरा करने के लिए काफी नहीं है। इस कमी को इम्पोर्ट से पूरा किया जाता है। FY 2025-26 की पहली छमाही के PPAC (Petroleum Planning & Analysis Cell) डेटा के अनुसार भारत का एलपीजी प्रोडक्शन 6219 TMT (टीएमटी- यानी हजार मीट्रिक टन) रहा।
वहीं, कंजम्पशन (Consumption) 16,200 TMT रह है। यानी इस हिसाब से भारत को 2025-26 की पहली छमाई में आपूर्ति पूरी करने के लिए 10731 TMT LPG आयात (लगभग 66 फीसदी) करना पड़ा।
| भारत का LPG प्रोडक्शन | 6,219 TMT |
| भारत की LPG खपत | 16,200 TMT |
| भारत का LPG इम्पोर्ट | 10,731 TMT |
| इम्पोर्ट डिपेंडेंसी | 62% |
ये 2025-26 के पहली छमाही के आंकड़े हैं।
PIB पर 11 मार्च को एक रिपोर्ट छपी जिसके अनुसार भारत अपनी LPG खपत का लगभग 60 प्रतिशत इम्पोर्ट करता है और इसमें से लगभग 90 प्रतिशत इम्पोर्ट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होता है, जिस पर मौजूदा घटनाओं के कारण असर पड़ा है।
पिछले दस सालों में LPG की डिमांड तेजी से बढ़ी है, क्योंकि ज्यादा से ज्यादा घरों ने LPG कुकिंग फ्यूल अपनाना शुरू कर दिया है। घरेलू प्रोडक्शन धीरे-धीरे बढ़ा है, लेकिन यह डिमांड में बढ़ोतरी के हिसाब से काफी नहीं है। इसलिए, सप्लाई बनाए रखने के लिए इंपोर्ट जरूरी हो गया है।
किन देशों से भारत खरीदता है LPG?
भारत नेचुरल गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए दो कैटेगरी की गैस आयात करता है। एक LNG के फॉर्म में दूसरा LPG के फॉर्म में। दोनों ही हाइड्रोकार्बन फ्यूल हैं, लेकिन वे इकॉनमी में अलग-अलग काम करते हैं और अलग-अलग तरीकों से ट्रांसपोर्ट किए जाते हैं।
2025 में भारत ने निम्नलिखित देशों से LPG आयात किया;
कतर: कतर ने भारत के LPG इम्पोर्ट का लगभग 34% हिस्सा लिया, जिससे वह सबसे बड़ा सप्लायर बन गया।
UAE: UAE ने लगभग 26% इम्पोर्ट सप्लाई किया। कुवैत ने लगभग 8.3% हिस्सा दिया।
सऊदी अरब: सऊदी अरब पहले के सालों में एक बड़ा सप्लायर था, जिसकी हिस्सेदारी 2020 में 11% थी।
इनमें से ज्यादातर सप्लायर होर्मुज स्ट्रेट के जरिए एक्सपोर्ट करते हैं, जो ईरान और ओमान के बीच एक वॉटरवे है, जिससे दुनिया का लगभग 20% रोजाना का तेल और LNG ट्रेड होता है। 1 मार्च, 2026 से इस रूट के बंद होने से भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर सीधा असर पड़ा है।
कतर पहले से भारत का LNG का सबसे बड़ा सप्लायर रहा है। लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत भारत के LNG इंपोर्ट का लगभग आधा हिस्सा खाड़ी देश का है।
भारत आयात के तलाश रहा है दूसरे सोर्स
हाल के जियोपॉलिटिकल तनावों ने सरकार को इस रुकावट से बचने के लिए दूसरे रास्ते और सोर्स ढूंढने पर मजबूर किया है। एक "ऐतिहासिक पहली बार" में, भारत ने नवंबर 2025 में, 2026 कॉन्ट्रैक्ट साल के लिए US गल्फ कोस्ट से 2.2 मिलियन टन LPG इंपोर्ट करने के लिए एक साल का स्ट्रक्चर्ड कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। यह भारत के सालाना इंपोर्ट का लगभग 10 परसेंट है। भारत नॉर्वे, अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से लिक्विड नेचुरल गैस और LPG दोनों के शिपमेंट भी बढ़ा रहा है।
आपके घर तक कैसे आता है LPG सिलेंडर?
प्रोडक्शन यूनिट से घर तक सिलेंडर का सफर इंफ्रास्ट्रक्चर के एक मुश्किल नेटवर्क के जरिए मैनेज किया जाता है। गुजरात के खंभात की खाड़ी में दाहेज, कर्नाटक के मंगलुरु और आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बड़े समुद्री टर्मिनल दुनिया भर से शिपमेंट लेते हैं।
इसके बााद LPG को पाइपलाइन या टैंकरों से बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचाया जाता है ताकि सिलेंडर में भरा जा सके। इसके बाद सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां IOCL, BPCL, और HPCL लॉजिस्टिक्स मैनेज करती हैं। इसके अलावा, देश भर में 25,000 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर रोजाना लगभग 6 मिलियन सिलेंडर कंज्यूमर्स तक पहुंचाते हैं।
इस समय भारत में क्या है LPG की स्थिति?
अभी सप्लाई की स्थिति भारत के पास लगभग 25 दिनों के लिए फ्यूल और कच्चे तेल का स्टॉक है, इसलिए सरकार ने कहा है कि स्थिति "कंट्रोल में" है। 'पैनिक बुकिंग' को रोकने के लिए, घरेलू सिलेंडर रिफिल के बीच जरूरी गैप को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। तेल मार्केटिंग कंपनियों की एक खास कमेटी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर- होटल और रेस्टोरेंट को LPG सप्लाई का रिव्यू करने के लिए बनाई गई है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि उन्हें अपने एवरेज कंजम्प्शन का कम से कम 80 परसेंट मिले, साथ ही घरों को प्रायोरिटी दी जाए।