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    भारत के इस शहर में है एशिया का सबसे बड़ा कबाड़ मार्केट, हर साल निकलता है ₹6000 करोड़ का 'सोना'; US-चीन-यूरोप तक आयात-निर्यात

    Updated: Thu, 18 Jun 2026 07:37 AM (IST)

    पश्चिमी दिल्ली का मायापुरी बाजार एशिया का सबसे बड़ा स्क्रैप मार्केट है, जहां सालाना 6,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यह बाजार भारत की सर्कुलर इको ...और पढ़ें

    दिल्ली में है एशिया की सबसे बड़ी स्क्रैप मार्केट

    दिल्ली में है एशिया की सबसे बड़ी स्क्रैप मार्केट

    HighLights

    1. मायापुरी एशिया का सबसे बड़ा स्क्रैप मार्केट

    2. सालाना होता है 6000 करोड़ का कारोबार

    3. पुराने वाहनों, मशीनों, ई-कचरे का बड़ा व्यापार केंद्र

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के पश्चिमी हिस्से में स्थित मायापुरी को आम लोग कबाड़ का बाजार मानते हैं, लेकिन आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से यह किसी बड़े औद्योगिक हब से कम नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये एशिया की सबसे बड़ी स्क्रैप मार्केट (Largest Scrap Market in Asia) है और यहां हर साल करीब 6,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
    यहां पुराने वाहनों, मशीनों, रेलवे उपकरणों, औद्योगिक कबाड़, बॉल बेयरिंग, मेटल्स और इलेक्ट्रॉनिक कचरे तक का बड़ा कारोबार होता है। हजारों कारोबारियों और मजदूरों की रोजी-रोटी से जुड़ी यह मंडी देश की सर्कुलर इकोनॉमी और रिसाइक्लिंग उद्योग की महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी है।

    कितना पुराना है मायापुरी स्क्रैप मार्केट?

    मायापुरी स्क्रैप मार्केट का इतिहास करीब पांच दशक पुराना है। मूल रूप से यह कारोबार पुरानी दिल्ली के मोतिया खान क्षेत्र में संचालित होता था, लेकिन 1970 के दशक में सुरक्षा और विस्तार की जरूरतों को देखते हुए इसे मायापुरी ट्रांसफर कर दिया गया।
    बाद में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने यहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया और स्क्रैप कारोबार को व्यवस्थित रूप दिया। आज यह बाजार लगभग चार किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है और यहां 2,000 से अधिक दुकानें और करीब 3,500 कारोबारी यूनिट्स ऑपरेट होती हैं।

    लाखों रुपये तक की कमाई!

    मायापुरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी विविधता है। यहां साइकिल के पुर्जों से लेकर ट्रेन, ट्रैक्टर, क्रेन, जीप और भारी औद्योगिक मशीनों तक का कबाड़ खरीदा-बेचा जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 500 कारोबारी केवल ट्रैक्टर स्क्रैप के कारोबार से जुड़े हैं, जबकि लगभग 650 व्यापारी बॉल बेयरिंग के व्यापार में सक्रिय हैं।
    कई कारोबारी कबाड़ में खरीदी गई मशीनों और वाहनों के उपयोगी पुर्जों को निकालकर देशभर के बाजारों में बेचते हैं। कुछ मामलों में एक कबाड़ ट्रैक्टर से लाखों रुपये तक की कमाई हो जाती है।

    चीन, अमेरिका और यूरोप से आयात

    यह मार्केट केवल घरेलू व्यापार तक सीमित नहीं है। मायापुरी के कई कारोबारी चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों से स्क्रैप आयात करते हैं और उसकी प्रोसेसिंग कर भारतीय बाजारों में बेचते हैं। वहीं, कुछ विशेष श्रेणी के पुर्जे और बॉल बेयरिंग यूरोपीय देशों को निर्यात भी किए जाते हैं।
    यही वजह है कि मायापुरी को भारत के सबसे बड़े अनौपचारिक रिसाइक्लिंग और पुनर्चक्रण केंद्रों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील, ऑटोमोबाइल और निर्माण उद्योग में स्क्रैप की बढ़ती मांग के कारण इस क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

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    कुछ चुनौतियां बरकरार

    इतनी बड़ी आर्थिक गतिविधि के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। पर्यावरण प्रदूषण, अवैध इकाइयों का संचालन, सड़क अतिक्रमण और ई-वेस्ट प्रबंधन को लेकर मायापुरी कई बार चर्चा में रही है। हाल के वर्षों में विभिन्न एजेंसियों ने यहां नियमों के उल्लंघन और प्रदूषण संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई भी की है।
    जानकारों का कहना है कि यदि इस बाजार को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक रिसाइक्लिंग और बेहतर नियमन से जोड़ा जाए तो यह न केवल रोजगार और राजस्व का बड़ा स्रोत बना रहेगा, बल्कि भारत की हरित अर्थव्यवस्था और संसाधन संरक्षण के लक्ष्य को भी मजबूती देगा।

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