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    New Labour Code: महीने की 7 तारीख तक सैलरी अनिवार्य; नौकरी छोड़ने पर 2 दिन में हिसाब, नए नियम में क्या-क्या?

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 07:32 PM (IST)

    नए लेबर कोड के तहत, कर्मचारियों को महीने की 7 तारीख तक वेतन और नौकरी छोड़ने पर 2 दिन में पूरा हिसाब मिलेगा। यह कोड सभी कर्मचारियों पर लागू होगा और वेत ...और पढ़ें

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। नए लेबर कोड लागू होने के बाद से, सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को कई मुद्दों को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सैलरी मिलने का समय भी शामिल है। नए नियमों के तहत, एम्प्लॉयर के लिए जरूरी है कि वे महीने खत्म होने के सात दिनों के अंदर कर्मचारियों को सैलरी दें। रोज़ाना मज़दूरी पाने वालों को उनकी शिफ्ट खत्म होने पर, हफ़्ते के आधार पर काम करने वालों को उनकी छुट्टी से पहले, और हर पखवाड़े (दो हफ़्ते) काम करने वालों को पखवाड़ा खत्म होने के दो दिनों के अंदर पेमेंट करना होगा।

    नौकरी छोड़ने के 2 दिनों के भीतर हिसाब-किताब

    अगर कोई कर्मचारी इस्तीफ़ा देता है, उसे हटाया जाता है या नौकरी से निकाला जाता है, तो कंपनी को सिर्फ़ दो कामकाजी दिनों के भीतर उसका पूरा और अंतिम हिसाब-किताब (सेटलमेंट) पूरा करना होगा। यह नियम वेतन से जुड़े विवादों को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।

    सभी कर्मचारियों पर लागू होने वाला नियम

    पुराने 'पेमेंट ऑफ़ वेजेज़ एक्ट, 1936' के उलट, नया 'लेबर कोड' सभी कर्मचारियों पर लागू होता है, चाहे उनकी सैलरी की सीमा कुछ भी हो। इसमें सीनियर मैनेजमेंट और ज़्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं।

    बिना इजाजत पैसे काटे जाएं, तो क्या करना चाहिए?

    नए कोड में पहली बार 'इंस्पेक्टर-कम-फ़ैसिलिटेटर' (निरीक्षक-सह-सुविधा प्रदाता) का कॉन्सेप्ट लाया गया है। अगर कोई एम्प्लॉयर वेतन देने में देरी करता है या बिना इजाज़त पैसे काटता है, तो कर्मचारी इस अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। यह अधिकारी विवाद को सुलझाने और बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने में मदद करेगा। अगर मामला नहीं सुलझता है, तो कर्मचारी या अधिकारी इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल (औद्योगिक न्यायाधिकरण) से संपर्क कर सकते हैं।

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    क्लेम करने की अवधि: 3 साल

    अब कर्मचारी 3 साल तक की अवधि के लिए बकाया वेतन का दावा कर सकते हैं, जबकि पहले यह समय-सीमा 6 महीने से 2 साल तक थी। इससे कर्मचारियों को सबूत इकट्ठा करने और उचित समाधान पाने के लिए ज़्यादा समय मिलेगा।

    फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक पे-स्लिप देना अनिवार्य

    नए नियमों के तहत, नियोक्ताओं के लिए वेतन के साथ फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक पे-स्लिप देना अनिवार्य है। इसके अलावा, नियोक्ताओं की मनमानी को रोकने के लिए वेतन से कटौती की सीमाएं तय की गई हैं। दावों के जल्द निपटारे के लिए तीन महीने की समय-सीमा तय की गई है। अगर नियोक्ता भुगतान नहीं करता है, तो यह राशि जिला मजिस्ट्रेट के जरिए जमीन के राजस्व (लैंड रेवेन्यू) के तौर पर वसूल की जाएगी।

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