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    Oracle की नौकरी छूटी पर हिम्मत नहीं! बेंगलुरु से लौट बने ड्राइवर, ब्याज से ही कमा रहे ₹43000; क्या है सीक्रेट?

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 08:46 PM (IST)

    Oracle Layoff Story: ओरेकल बेंगलुरु से नौकरी जाने के बाद एक व्यक्ति ने घबराने के बजाय अपनी मजबूत वित्तीय योजना का प्रदर्शन किया। बिना किसी कर्ज के, उन ...और पढ़ें

    Oracle की नौकरी छूटी पर नहीं टूटी हिम्मत! बेंगलुरु से लौटकर बने ड्राइवर, सेविंग्स इतनी कि हर महीने मिल रहा ₹43000 ब्याज

    Oracle की नौकरी छूटी पर नहीं टूटी हिम्मत! बेंगलुरु से लौटकर बने ड्राइवर, सेविंग्स इतनी कि हर महीने मिल रहा ₹43000 ब्याज

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    नई दिल्ली| कल्पना कीजिए कि आप बेंगलुरु की एक बड़ी टेक कंपनी (Oracle Employee Success Story) में शानदार नौकरी कर रहे हैं और अचानक आपको निकाल दिया जाए। ज्यादातर लोग ऐसे में घबरा जाएंगे, लेकिन ओडिशा के एक शख्स ने साबित कर दिया कि अगर आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग 'टाइट' है, तो मंदी भी आपका बाल बांका नहीं कर सकती।

    नौकरी जाने के बाद इस शख्स ने न केवल अपना घर संभाला, बल्कि बिना किसी कर्ज (EMI) के हर महीने करीब 43,000 रुपये (Passive Income 43000 Rupees) की फिक्स्ड इनकम का जुगाड़ भी कर लिया।

    बेंगलुरु की चकाचौंध छोड़ गांव में सुकून

    फंडिंग एडवाइजर नायक सत्या ने इस प्रेरक कहानी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि कैसे इस व्यक्ति ने अपनी बचत का सही इस्तेमाल किया। जब ओरेकल से उनकी छुट्टी (Layoff to Financial Independence) हुई, तो वे घबराने के बजाय अपने गृहनगर भुवनेश्वर लौट आए। उनके पास कोई लोन नहीं था, कोई बकाया क्रेडिट कार्ड बिल नहीं था और न ही किसी महंगी लाइफस्टाइल का बोझ। उन्होंने अपनी बरसों की मेहनत और बचत को परिवार के अलग-अलग खातों में 60 लाख रुपये की फिक्स डिपॉजिट यानी एफडी (FD Investment Strategy) के रूप में निवेश किया हुआ था। आज इसी निवेश से उन्हें हर महीने ब्याज के तौर पर लगभग 43,000 रुपये मिल रहे हैं।

    साधारण तरीके, असाधारण नतीजे

    इस शख्स की सफलता का सबसे बड़ा राज 'ओल्ड स्कूल' यानी पुराने जमाने का अनुशासन है। उन्होंने आज के दौर के इन्फ्लुएंसर्स, भारी भरकम SIP या रिस्की इन्वेस्टमेंट के बजाय सुरक्षित और स्ट्रक्चर्ड सेविंग्स को चुना।

    नायक सत्या के अनुसार, इस व्यक्ति ने 'पहले बचाओ और बाद में खर्च करो' के नियम का सख्ती से पालन किया। बेंगलुरु जैसे महंगे शहर के खर्चों को खत्म कर उन्होंने खुद को इस काबिल बनाया कि वे अब परिस्थितियों के गुलाम नहीं, बल्कि अपनी पसंद के मालिक हैं।

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    सिर्फ ब्याज नहीं, काम का जज्बा भी

    हैरानी की बात यह है कि 43,000 रुपये की पैसिव इनकम होने के बावजूद यह शख्स हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठा। अपनी तत्काल जरूरतों और समय के सदुपयोग के लिए उन्होंने भुवनेश्वर में कैब ड्राइवर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। साथ ही, वे अपने माता-पिता के साथ मिलकर एक छोटा बिजनेस शुरू करने की योजना भी बना रहे हैं।

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    सोशल मीडिया पर मिली वाहवाही

    इंटरनेट पर इस कहानी ने धूम मचा दी है। लोगों का कहना है कि यह "फाइनेंशियल फ्रीडम" का सबसे सटीक उदाहरण है। कुछ यूजर्स ने लिखा कि जब आपके पास बैकअप प्लान होता है, तभी आप संकट में इतना शांत रह सकते हैं।

    यह कहानी उन युवाओं के लिए एक सबक है जो दिखावे के लिए कर्ज लेकर लग्जरी लाइफ जीते हैं। सच तो यह है कि सही तैयारी ही किसी भी संकट को अवसर में बदल सकती है।