PM Kisan Yojana की 24वीं किस्त से पहले धान की MSP पर बड़ा अपडेट, सरकार ने संसद में दी अहम जानकारी
सरकार ने संसद में धान और जूट की MSP पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है, जिसमें मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए धान (कॉमन) की MSP 2441 रुपये प्रति क्विंटल तय क ...और पढ़ें

धान (कॉमन) की MSP ₹2441 प्रति क्विंटल तय।
HighLights
धान (कॉमन) की MSP ₹2441 प्रति क्विंटल तय।
सरकार ने संसद में MSP पर अहम जानकारी दी।
किसानों को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना MSP।
नई दिल्ली। पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त से पहले धान की MSP को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। यह अपडेट सरकार की ओर से संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिया गया है। सरकार ने संसद में जवाब देते हुए धान और जूट की MSP से जुड़े सवाल का जवाब दिया है।
NCP सांसद अबू ताहिर खान ने सरकार से धान और जूट को लेकर तीन सवाल पूछे थे। इन्हीं सवालों का लिखित जवाब दिया गया। पहला सवाल था कि चालू वर्ष के लिए जूट और धान के लिए तय किया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कितना है? दूसरा सवाल था कि पश्चिम बंगाल में समय पर खरीद के लिए की गई व्यवस्था/उठाए गए कदम क्या हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम कि किसानों को तय समय के भीतर उनके बैंक खातों में सीधे भुगतान मिले।
FY27 के लिए कितनी है धान की MSP?
PM Kisan Yojana की 24वीं किस्त से पहले कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने तीनों सवाल के जवाब दिए। उन्होंने लिखित जवाब में कहा कि सरकार हर साल, संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की राय पर विचार करने और 'कृषि लागत और मूल्य आयोग' (CACP) की सिफारिशों के आधार पर, पूरे देश के लिए धान और जूट सहित 22 तय कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है।
लिखीत जवाब में सरकार की ओर से आगे कहा गया कि 2018-19 के केंद्रीय बजट में MSP को उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना स्तर पर रखने का पहले से तय सिद्धांत घोषित किया गया था। इसके अनुसार, सरकार ने 2018-19 से सभी अनिवार्य खरीफ, रबी और अन्य कमर्शियल फसलों के लिए MSP में अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का मार्जिन जोड़ा है। मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए धान (कॉमन) की MSP 2441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान की MSP 2461 रुपये प्रति क्विंटल है।
किस तरह होती है खरीद
उन्होंने आगे कहा कि कुल उत्पादन में से, केवल बेचने लायक अतिरिक्त उपज ही सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद के लिए उपलब्ध होती है, जब इन उत्पादों की बाजार कीमत MSP से कम हो जाती है। सरकार किसानों को कीमत का सहारा देने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) और अन्य तय राज्य एजेंसियों के माध्यम से अनाज और मोटे अनाज की खरीद करती है। दालों, तिलहन और खोपरे (copra) की खरीद 'प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान' (PMAASHA) योजना के तहत 'मूल्य समर्थन योजना' (Price Support Scheme) के अंतर्गत की जाती है।
यह खरीद संबंधित राज्य सरकार के अनुरोध पर और तय दिशानिर्देशों के अनुसार तब की जाती है जब इन उत्पादों की बाजार कीमत MSP से कम हो जाती है। PM-AASHA योजना के तहत खरीद करने वाली एजेंसियां 'नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' (NAFED) और 'नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' (NCCF) हैं।
कपास और जूट की खरीद भी सरकार द्वारा क्रमशः 'कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' (CCI) और 'जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' (JCI) के माध्यम से MSP पर की जाती है। MSP बढ़ने से देश के किसानों, जिनमें पश्चिम बंगाल के किसान भी शामिल हैं, को फायदा हुआ है। यह बात खरीद के आंकड़ों और किसानों को भुगतान की गई MSP की राशि से साफ पता चलती है।
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कब आएगी पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त?
पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त को लेकर अभी तक कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि पीएम किसान योजना की आगामी किस्त अक्टूबर में जारी हो सकती है।