Ganga Expressway: सड़क या 'सोने की खान'? ₹36230 Cr में इन्होंने बनाया UP का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे; योगी सरकार ले आई ₹47000 Cr का निवेश
Ganga Expressway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway Inauguration) का उद्घाटन करेंगे, जो उत्तर प्रदेश क ...और पढ़ें

बनकर तैयार हो गया यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। आज बुधवार 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway ) का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे। गंगा एक्सप्रेसवे भारत की सबसे बड़े ग्रीनफील्ड सड़क परियोजनाओं में से एक है। छह-लेन वाला यह एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर, जिसे आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है, 12 जिलों से गुजरते हुए मेरठ को प्रयागराज से जोड़ेगा। यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल, लॉजिस्टिक्स और डेवलपमेंट कॉरिडोर के तौर पर भी काम करेगा। कितने खर्च में बनकर हुआ है तैयार और किसने बनाया है ये एक्सप्रेसवे, आइए जानते हैं।
यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे को लगभग 36,230 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार किया गया है। खास बात ये है कि गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी, मध्य और पूर्वी UP को जोड़ेगा। यह मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा के समय को लगभग 10-12 घंटे से घटाकर 6-8 घंटे कर देगा।
किसने बनाया है गंगा एक्सप्रेसवे?
गंगा एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों को अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और इसकी सब्सिडियरी कंपनी, अदाणी रोड एंड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड के अलावा आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर (IRB Infrastructure) ने तैयार किया है।
एक्सप्रेसवे से जुड़ी सबसे अहम बात
बता दें कि राज्य सरकार ने इस कॉरिडोर के साथ-साथ 12 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLCs) तैयार किए हैं। इसके लिए लगभग 6,507 एकड़ जमीन की पहचान की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार को लगभग 47,000 करोड़ रुपये के 987 निवेश प्रस्ताव पहले ही मिल चुके हैं।
यह कॉरिडोर मेरठ, हापुड, बुलन्दशहर, अमरोहा, संभल, बदायूँ, शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है। यह राज्य के कुछ विकसित क्षेत्रों को उन जिलों से जोड़ता है जहां ऐतिहासिक रूप से निवेश में कमी रही है।
खबरें और भी
मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की योजना
इसके आस-पास एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की योजना है। औद्योगिक क्लस्टर की रणनीति सेक्टर-स्पेसिफिक पर आधारित है। जिलों की क्षमता के आधार पर, अलग-अलग केंद्रों से मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स, फूड प्रोसेसिंग और वेयरहाउसिंग पर फोकस किए जाने की उम्मीद है।