कच्चे तेल पर सऊदी अरब ने लिया सिरदर्द बढ़ाने वाला फैसला, जंग का फायदा उठाया, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर होगा असर
सऊदी अरब ने एशियाई खरीदारों के लिए कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड प्रीमियम पर बढ़ा दी हैं। ईरान-अमेरिका संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण ...और पढ़ें

HighLights
सऊदी अरब ने एशियाई खरीदारों के लिए कच्चे तेल की कीमतें बढ़ाईं।
ईरान-अमेरिका संघर्ष से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी।
भारत, सऊदी अरब से भारी मात्रा में तेल आयात करता है।
नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका (Iran-US War) के बीच युद्ध से कच्चे तेल (Crude Oil Prices) की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। क्रूड की कीमतों में यह वृद्धि पूरी दुनिया के लिए महंगाई बढ़ने का कारण बनती जा रही है। इस बीच सऊदी अरब ने दुनिया का सिरदर्द और बढ़ा दिया है। दरअसल, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के मद्देनजर सऊदी अरब ने एशियाई खरीदारों के लिए अपने प्रमुख कच्चे तेल की कीमत रिकॉर्ड प्रीमियम पर बढ़ा दी है।
क्या है ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी स्वामित्व वाली सऊदी अरामको मई में बिक्री के लिए अपने अरब लाइट क्रूड की कीमत एशियाई रिफाइनरों के क्षेत्रीय बेंचमार्क से 19.50 डॉलर प्रति बैरल अधिक रखेगी। रिपोर्ट में एक प्राइस लिस्ट का हवाला दिया गया है। प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद, ब्लूमबर्ग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में शामिल व्यापारियों और रिफाइनरों द्वारा अनुमानित 40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कम है।
सऊदी अरब से कितना तेल आयात करता है भारत?
सऊदी अरब द्वारा कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का फैसला भारत समेत अन्य एशियाई देशों के लिए बड़ा परेशानी का कारण बन सकता है। भारत अपनी जरुरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है और सप्लायर की लिस्ट में सऊदी अरब अहम स्थान रखता है। फरवरी 2026 में भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने में सऊदी अरब दूसरे नंबर पर रहा है, जिसने अपने शिपमेंट में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए 1.009 मिलियन बैरल/दिन किया।
फरवरी 2026 में सऊदी अरब से भारत के कच्चे तेल के आयात में निजी और सार्वजनिक दोनों रिफाइनरियों का मजबूत योगदान रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड सबसे बड़ी आयातक कंपनी रही, जिसने फरवरी में 0.364 मिलियन बैरल/दिन तेल खरीदा। आईओसी ने 0.186 मिलियन बैरल/दिन तेल आयात किया था।
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ईरान जंग के बीच लिया फैसला
सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमत में यह वृद्धि ऐसे समय में की है जब ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद करने से क्षेत्रीय ऊर्जा प्रवाह बाधित हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के युद्ध ने फारस की खाड़ी से बाहर जाने वाली आपूर्ति को प्रभावी रूप से रोक दिया है।
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इस उथल-पुथल ने वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि अमेरिका, यूरोप और एशिया में भी ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है।