"ग्राहकों को गुमराह कर रहीं तेल कंपनियां...", सरकार से SOPA की बड़ी अपील, तेल बनाने वाली कंपनियों के नियम बदलने की मांग
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने सरकार से खाद्य तेलों की मानकीकृत पैकेजिंग मात्रा फिर से लागू करने की मांग की है। उनका मानना है कि यूनि ...और पढ़ें

तेल बनाने वाली कंपनियों को लेकर नियम बदलने की मांग
HighLights
SOPA ने तेल कंपनियों पर ग्राहकों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
मानकीकृत खाद्य तेल पैकेजिंग मात्रा फिर से लागू करने की मांग।
अलग-अलग पैक साइज से उपभोक्ता भ्रमित, ईमानदार कंपनियों को नुकसान।
नई दिल्ली| सरसों, सोयाबीन सहित सभी खाने का तेल बेचने वाली कंपनियां अपने ग्राहकों को गुमराह कर रही हैं। ऐसा हम नहीं बल्कि सोयाबीन उद्योग के प्रमुख संगठन सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने कहा है। कंपनी ने कहा कि तेल बनाने वाली कंपनियां अलग-अलग साइज की पैकिंग और उनकी कीमतें बताकर ग्राहकों को गुमराह कर रही हैं।
SOPA ने उपभोक्ता मामलों के विभाग (Consumer Affairs Department)को एक पत्र लिखकर सरकार से खाद्य तेलों की मानकीकृत पैकेजिंग मात्रा (जैसे 250 मिली, 500 मिली, 1 लीटर, 5 लीटर) फिर से लागू करने की मांग की है।
सरकार ने खत्म की थी पैकेजिंग बाध्यता
1 जनवरी 2023 से पहले भारत में खाद्य तेलों की पैकेजिंग मानकीकृत नेट मात्रा नियमों के तहत होती थी। निर्माताओं को 250 मिली/ग्राम, 500 मिली/ग्राम, 1 लीटर/किलोग्राम, 5 लीटर/किलोग्राम जैसे निर्धारित पैक साइज में ही तेल बेचना होता था। इससे उपभोक्ता आसानी से अलग-अलग ब्रांड के दाम की तुलना कर पाते थे और पारदर्शिता बनी रहती थी।
1 जनवरी 2023 से सरकार ने इन मानक मात्रा प्रतिबंधों को हटा दिया और कंपनियों को किसी भी मात्रा में तेल बेचने की छूट मिल गई। इसके साथ पैकेट पर ‘unit sale price’ (प्रति ग्राम या प्रति मि.ली. कीमत) घोषित करना अनिवार्य किया गया।
SOPA ने की इन बदलावों की मांग
SOPA का कहना है कि कुछ कंपनियां इस छूट का गलत फायदा उठा रही हैं। सरकार ने अच्छे इरादे से पैक साइज की पाबंदियां हटाई थीं, लेकिन अब इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है. कई ब्रांड एक ही तेल को अलग-अलग पैक साइज में बेच रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक unit sale price भी लोगों को कन्फ्यूज करती है।
SOPA ने कहा कि सामान्य खुदरा उपभोक्ता प्रति मिलीलीटर या प्रति ग्राम कीमत की गणना करके उसे एक लीटर या एक किलोग्राम की सामान्य इकाई में नहीं बदलता। खासकर तब जब प्रति इकाई मूल्य पैसे में और दशमलव के साथ लिखा जाता है जैसे 24.72 पैसे प्रति मिलीलीटर। ज्यादातर ग्राहकों को इस तरह के मूल्य की जानकारी नहीं होती है।
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ईमानदार कंपनियों को भी नुकसान
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि मानक मात्रा प्रतिबंध हटने से कॉम्पटीशन में असमानता आई है। जो निर्माता पारदर्शी और मानक पैक साइज बनाए हुए हैं, वे बाजार में हिस्सेदारी खो रहे हैं, जबकि गैर-मानक पैक साइज का उपयोग कर कम कीमत का भ्रम पैदा करने वाले प्रतिस्पर्धी लाभ उठा रहे हैं। इसके चलते ईमानदार कंपनियां भी बाजार में में बने रहने के लिए भ्रामक पैक साइज अपनाने को मजबूर हो रही हैं।