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    Economic Survey: ₹25000 का दावा फेल, सिर्फ इतना कमाते हैं डिलिवरी बॉय; आर्थिक सर्वे में खुल गई Swiggy-Zomato की पोल!

    Updated: Thu, 29 Jan 2026 03:40 PM (GMT+05:30)

    आर्थिक सर्वेक्षण 2026 (Economic Survey 2026) के अनुसार, भारत में 40% गिग कर्मचारी ₹15,000 से कम कमाते हैं, जो ज़ोमैटो के संस्थापक के ₹25,000 के दावे क ...और पढ़ें

    40% गिग वर्कर्स की मासिक कमाई 25000 रुपये से कम

    40% गिग वर्कर्स की मासिक कमाई 25000 रुपये से कम

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    भाषा, नई दिल्ली। हाल ही में जोमैटो के फाउंडर दीपेंद्र गोयल ने कहा था कि उनके प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी पार्टनर दिन में 8-10 घंटे और हफ्ते में छह दिन काम करके हर महीने ₹25,000 कमा सकते हैं। मगर आर्थिक सर्वे में इससे जुड़ी एक अलग ही सच्चाई सामने आई है। संसद में गुरुवार को पेश की गई आर्थिक समीक्षा (Economic Survey 2026) में कहा गया कि भारत में करीब 40 प्रतिशत अस्थायी कर्मचारी (Gig Workers) प्रति माह 15,000 रुपये से कम कमाते हैं। सर्वे में इस मामले में अहम नीतिगत हस्तक्षेप करने की बात कही गयी है।

    कौन होते हैं गिग वर्कर्स?

    आमतौर पर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करने वाले कर्मचारियों को गिग कर्मी कहा जाता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में आर्थिक समीक्षा पेश की। समीक्षा में उचित मजदूरी सुनिश्चित करने और नियमित एवं अस्थायी (गिग) रोजगार के बीच लागत असमानता को कम करने के लिए प्रतीक्षा समय (वेटिंग टाइम) के मुआवजे सहित ‘‘न्यूनतम प्रति घंटा या प्रति कार्य आय’’ निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।

    वर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप मिल रहा

    आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के हाल में हुए डेवलपमेंट और नीतिगत सुधारों से वर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप मिल रहा है, जिससे रेगुलराइजेशन एवं लचीलेपन को प्रोत्‍साहन मिल रहा है। श्रम संहिताओं ने ‘गिग’ और ‘ऑनलाइन’ श्रमिकों को औपचारिक रूप से मान्यता दी है।
    इससे सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार हुआ है और वेलफेयर फंड और लाभ को बढ़ावा मिला है।

    10 मिनट की ‘डिलिवरी’ के खिलाफ गिग कर्मी

    भारत में ‘गिग’ कर्मी (जिनमें क्विक कॉमर्स और खाद्य आपूर्ति के ‘राइडर्स’ शामिल हैं) ने हाल ही में बेहतर भुगतान, बेहतर कामकाजी परिस्थितियों, देश के श्रम कानूनों के तहत औपचारिक मान्यता और 10 मिनट की ‘डिलिवरी’ समयसीमा को हटाने की मांग को लेकर अपने श्रम संघों के माध्यम से हड़ताल और विरोध प्रदर्शन किए।
    उनके संगठनों ने इस मुद्दे को केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के समक्ष उठाया। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप, सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने मंच से 10 मिनट में आपूर्ति के दावे को हटाने का कहा।

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    55% बढ़ी गिग वर्कर्स की संख्या

    सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में 77 लाख कर्मियों की तुलना में वित्त वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इनकी संख्‍या एक करोड़ 20 लाख हो गई है। इसके अंतर्गत 80 करोड़ से अधिक लोग ‘स्‍मार्ट फोन’ का उपयोग कर रहे हैं और प्रति माह 15 अरब यूपीआई लेनदेन किए जा रहे है।
    इसमें कहा गया कि भारत में ‘गिग’ कर्मियों की संख्‍या कुल कार्यबल का दो प्रतिशत से अधिक है। इसके वर्ष 2029-30 तक 6.7 प्रतिशत होने का अनुमान है जिससे सकल घरेलू उत्‍पाद में 2.35 लाख करोड़ रुपये के योगदान होने की संभावना है।

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