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    क्या शेयर ट्रेडर्स को मिलेगी LTCG और STT में राहत? मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने बजट से पहले उठाई मांग

    By Jagran BusinessEdited By: Kashid Hussain
    Updated: Sun, 18 Jan 2026 04:20 PM (GMT+05:30)

    मार्केट प्रतिभागियों ने बजट (Union Budget 2026) से पहले कैपिटल मार्केट पार्टिसिपेशन को सरल बनाने का आग्रह किया है। उनकी प्रमुख मांगों में LTCG की छूट ...और पढ़ें

    बजट से पहले मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने रखी अपनी मांगें

    बजट से पहले मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने रखी अपनी मांगें

    HighLights

    1. बजट से पहले मार्केट पार्टिसिपेंट्स की मांगें

    2. सभी एसेट क्लास में 'लॉन्ग टर्म' 12 महीने हो

    3. लेनदेन कर में कोई और वृद्धि न की जाए

    भाषा नई दिल्ली। मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने 2026-27 के आम बजट (Union Budget 2026) से पहले सरकार से कैपिटल मार्केट टैक्सेशन को आसान बनाने का आग्रह किया है, जिसमें लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) पर उच्च छूट सीमा की मांग शामिल है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को लेनदेन टैक्स में और वृद्धि करने से बचना चाहिए। आम बजट एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाएगा।

    और क्या हैं मांगें?

    मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने खुदरा और लॉन्ग-टर्म निवेशकों को अधिक राहत देने के लिए इक्विटी निवेश से होने वाले दीर्घकालिक एलटीसीजी मुक्त छूट सीमा को बढ़ाने की मांग की है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि सरकार को इक्विटी एलटीसीजी के लिए टैक्स-फ्री छूट सीमा को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये करना चाहिए।
    कंपनी ने जटिलता को कम करने और टैक्स क्लियरिटी में सुधार के लिए इक्विटी, डेट, सोना और रियल एस्टेट सहित सभी एसेट क्लास में 'लॉन्ग टर्म' की परिभाषा को 12 महीने के रूप में स्टैंडर्डडाइज्ड करने की भी मांग की है।

    सुझाव भी दिए गए

    इसने कैपिटल लॉस को अन्य मदों के तहत होने वाली आय के साथ समायोजित करने की अनुमति देने की मांग भी की है। बाजार प्रतिभागियों ने लेनदेन से संबंधित टैक्स में किसी भी तरह की और वृद्धि के खिलाफ चेतावनी दी है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीरज रेली ने कहा कि हितधारकों ने सट्टा कारोबार के बजाय लॉन्ग टर्म निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नकद इक्विटी सौदों पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को डेरिवेटिव की तुलना में कम रखने का प्रस्ताव दिया है।
    उन्होंने शेयर बायबैक के केवल लाभ वाले हिस्से पर टैक्स लगाने और घरेलू निवेशकों के लिए डिविडेंड टैक्स की दरों को अनिवासी भारतीयों पर लागू होने वाली दरों के अनुरूप बनाने का भी सुझाव दिया।

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