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    Budget 2026: वित्त मंत्री ने निर्यात को बढ़ावा देने और कई उत्पादों पर आयात शुल्क जीरो करने का किया एलान; इन सेक्टरों को होगा फायदा

    Updated: Sun, 01 Feb 2026 06:05 PM (IST)

    वित्त मंत्री ने आज बजट (Budget 2026) पेश किया, जिसमें भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करने और निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। बजट ...और पढ़ें

    बजट में किन प्रोडक्ट्स के आयात-निर्यात पर मिली राहत?

    बजट में किन प्रोडक्ट्स के आयात-निर्यात पर मिली राहत?

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    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपना नौवां बजट (Union Budget 2026) पेश किया, जिसमें भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में इंटीग्रेट करने पर फोकस किया गया। बजट में एक्सपोर्ट को चौथे इंजन के तौर पर पेश किया गया। पिछले साल के बजट में कई रेट्स को मिलाकर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी स्लैब की संख्या घटाकर आठ कर दी गई। अब तक कई प्रोडक्ट्स पर सेस, सोशल वेलफेयर सरचार्ज (SWS), और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) जैसे कई टैक्स लगते थे, जबकि इस साल के बजट में हर आइटम पर सिर्फ एक सेस या सरचार्ज है। साथ ही 82 टैरिफ लाइंस से सोशल वेलफेयर सरचार्ज हटा दिया गया है।

    कई चीजों पर आयात शुल्क हुआ जीरो

    कई अहम मिनरल्स पर जीरो आयात शुल्क कर दिया गया है, जिनमें लिथियम, कोबाल्ट, लेड, जिंक आदि शामिल हैं। ये फैसला खासकर EV और मोबाइल बैटरी बनाने के सामान, जहाज बनाने का सामान, टेक्सटाइल मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, PCBA के इनपुट पार्ट्स, कैमरा मॉड्यूल, कनेक्टर्स और वायर्ड हेडसेट, माइक्रोफोन और रिसीवर, USB केबल और सेलुलर मोबाइल फोन के फिंगरप्रिंट रीडर/सेंसर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इनपुट या कच्चे माल के लिए लिया गया है।
    साथ ही LED/LCD TV के TV पैनल के ओपन सेल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले खास इनपुट/पार्ट्स (चिप ऑन फिल्म, PCBA, ग्लास बोर्ड सबस्ट्रेट सेल), सैटेलाइट के लिए ग्राउंड इंस्टॉलेशन, जिसमें उसके स्पेयर पार्ट्स और इस्तेमाल होने वाली चीजें शामिल हैं, लॉन्च व्हीकल बनाने और सैटेलाइट लॉन्च करने में इस्तेमाल होने वाला सामान, वेट ब्लू लेदर, शटल लेस लूम रैपियर लूम और शटल लेस लूम एयर जेट लूम और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 जरूरी दवाओं पर भी कस्टम ड्यूटी जीरो करने का फैसला लिया गया है।

    और किन प्रोडक्ट्स पर दी गयी है राहत

    एक्वाफार्मिंग और समुद्री एक्सपोर्ट, खाने-पीने की चीजों के लिए केमिकल, कीमती धातु, कुछ IT और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, मोटरसाइकिल इंजन वगैरह आदि जैसी मुख्य चीजों पर इंपोर्ट ड्यूटी में भारी कटौती की गई है।
    दूसरी राहतों में ड्यूटी-फ्री इनपुट के लिए समय सीमा को छह महीने से बढ़ाकर एक साल करना शामिल है, और जरूरत पड़ने पर तीन महीने का और एक्सटेंशन भी मिल सकता है। हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट करने के लिए ड्यूटी-फ्री लिस्ट में और इनपुट जोड़े गए हैं।

    एक्सपोर्ट्स को ऐसे दी गयी राहत

    टेक्सटाइल और सीफूड जैसी इंडस्ट्रीज पर US टैरिफ का असर हुआ है। इसलिए बजट में एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को बेहतर बनाने के मकसद से कदम उठाए गए हैं।
    एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने और US टैरिफ से प्रभावित सीफूड इंडस्ट्री को ऊपर उठाने के सरकार के लक्ष्य के तहत, सीतारमण ने एक्सपोर्ट के लिए सीफूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले खास इनपुट के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की लिमिट को पिछले साल के एक्सपोर्ट टर्नओवर की FOB वैल्यू के 1% से बढ़ाकर 3% करने का प्रस्ताव रखा है।

    खबरें और भी

    लेदर या सिंथेटिक फुटवियर एक्सपोर्ट के लिए बड़े एलान

    वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि लेदर या सिंथेटिक फुटवियर के एक्सपोर्ट के लिए अभी जो स्पेसिफाइड इनपुट पर ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा मिलती है, उसे शू अपर (जूते का ऊपरी हिस्सा) के एक्सपोर्ट पर भी दिया जाएगा। सीतारमण ने कहा, "मैं स्पेसिफाइड इनपुट पर ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की मंजूरी देने का प्रस्ताव करती हूं, जो अभी लेदर या सिंथेटिक फुटवियर के एक्सपोर्ट के लिए उपलब्ध है, उसे शू अपर के एक्सपोर्ट पर भी लागू किया जाएगा।"
    बता दें कि ट्रंप के भारतीय निर्यात पर टैरिफ लगाने के बाद, इन अधिक लेबर वाले सेक्टर्स को अमेरिका में बहुत बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जो एक बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन है।

    न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी घोषणा

    न्यूक्लियर पावर सेक्टर में, सीतारमण ने न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी सामानों के इंपोर्ट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में दी जाने वाली छूट को 2035 तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। ये छूट उन्होंने सभी कैपेसिटी वाले न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स को देने का एलान किया है।

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