भारत में खाने के तेल का आयात पहुंचा 166.51 लाख टन, नेपाल के ड्यूट फ्री इंपोर्ट का दिखा असर
भारत का खाद्य तेल आयात 2025-26 में 3% बढ़कर 166.51 लाख टन हो गया है, जिसमें नेपाल से शुल्क-मुक्त आयात की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नेपाल ने SAFTA समझौते ...और पढ़ें

भारत के एडिबल ऑयल इंपोर्ट में 3 फीसदी की बढ़ोतरी
HighLights
भारत का खाद्य तेल आयात 166.51 लाख टन हुआ।
नेपाल से शुल्क-मुक्त आयात में 113% की वृद्धि।
सोयाबीन तेल का आयात सबसे अधिक रहा।
नई दिल्ली| इंडस्ट्री बॉडी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने जानकारी देते हुए बताया कि साल 2025-26 में भारत के खाद्य तेल का आयात 3 फीसदी बढ़ कर 166.51 लाख टन पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 161.82 लाख टन खाद्य तेल आयात किया था।
नेपाल के साथ समझौते का असर
भारत और नेपाल के बीच दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौते (SAFTA) के तहत नेपाल को भारतीय बाजार में शून्य शुल्क पर निर्यात की सुविधा मिलती है। इसका सीधा असर आंकड़ों में देखें तो नेपाल ने इस साल भारत को 7.36 लाख टन एडिबल ऑयल एक्सपोर्ट किया। जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में भेजे गए 3.45 लाख टन से दोगुना से भी अधिक है, और इसमें करीब 113 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
सोयाबीन तेल का इंपोर्ट सबसे अधिक
रिपोर्ट की मानें तो नेपाल से आने वाले खाद्य तेलों में सबसे अधिक हिस्सेदारी रिफाइंड सोयाबीन तेल की रही। इसके साथ ही सूरजमुखी तेल (sunflower oil), RBD पामोलीन और रेपसीड ऑयल की भी सप्लाई हुई है। SEA ने एक बयान में कहा कि, नेपाल से रिफाइंड तेलों के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट में बढ़ोतरी ने इस साल देश में खाने के तेल के इंपोर्ट में भी योगदान दिया है। ड्यूटी फ्री व्यवस्था के कारण नेपाल से रिफाइंड तेल का व्यापार तेजी से बढ़ा है। इसका असर आंकड़ों में देखें तो पिछले साल के मुकाबले 113 फीसदी बढ़ा है।
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हर साल तेल के पीछे कितना खर्चा?
भारत और नेपाल के बीच हुए व्यापार समझौते का असर भारत के खाद्य तेलों की आवक पर देखा गया है। ये आयात पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी अधिक बढ़ा है। इसके अलावा आपको ये भी बता दें कि देश में हर साल 15-16 मिलियन टन खाद्य तेलों का आयात किया जाता है, जिसमें करीब लगभग 18.3 अरब डॉलर का खर्च आता है।
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हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश में ईंधन बचाने की अपील के साथ ही खाने के तेल में कटौती करने की भी अपील की गई थी। सरकार का उद्देश्य खाद्य तेलों के इंपोर्ट को कम कर इस क्षेत्र में भी निर्भरता कम करना है।