सरकार ने 5 बार बढ़ाए प्याज के दाम, किसान नहीं दिखा रहे बेचने में दिलचस्पी! उपभोक्ता मंत्रालय की बढ़ी चिंता
सरकार द्वारा प्याज की खरीद कीमत में 5 बार बढ़ोतरी के बावजूद खरीद प्रक्रिया धीमी है, जिससे उपभोक्ता मंत्रालय चिंतित है। किसान अब मंडियों में बेहतर दाम ...और पढ़ें
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प्याज की सरकारी खरीद काफी धीमी होने से बढ़ी चिंता
HighLights
सरकार ने 5 बार बढ़ाई कीमत, फिर भी प्याज खरीद धीमी।
उपभोक्ता मंत्रालय चिंतित, कम बफर स्टॉक से जमाखोरी का डर।
किसान मंडियों में बेहतर दाम मिलने से सरकार को नहीं बेच रहे।
नई दिल्ली| प्याज की कीमत में भारी गिरावट के चलते किसानों की नाराजगी देखी जा चुकी है, जिसके बाद सरकार ने प्याज की खरीद कीमत में बढ़ोतरी की है। बता दें कि पिछले 2 महीने में थोड़े-थोड़े करके 5 बार बढ़ोतरी की है। खरीद भाव बढ़ाने के बाद भी खरीद प्रक्रिया काफी धीमी होने से मुश्किलें फिर से बढ़ गई है। उपभोक्ता मंत्रालय ने इस पर चिंता व्यक्त की है।
प्याज खरीद में काफी धीमी
सरकार ने प्याज की MSP में बीते 2 महीने में 5 बार बढ़ोतरी की है, लेकिन प्याज खरीदने (Onion procurement) की प्रक्रिया काफी सुस्त नजर आ रही है। केंद्र सरकार ने घरेलू प्याज की जरूरत को पूरा करने के लिए 2 लाख टन प्याज की खरीदी का सरकारी लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक लक्ष्य से मात्र 5 फीसदी की खरीद ही हो सकी है।
उपभोक्ता मंत्रालय की बढ़ी चिंता
प्याज की खरीद प्रक्रिया धीमी होने से उपभोक्ता मंत्रालय की चिंता बढ़ गई है। मामले से जुड़े लोगों ने मीडिया को बताया कि मंत्रालय को आशंका है कि अगर मौसम संबंधित समस्याओं के कारण अगर खरीफ फसलों को नुकसान होता है, और प्याज की कीमत में उछाल आता है तो कम बफर स्टाक के साथ जमाखोरी की भी समस्या बढ़ सकती है। अधिकारियों के अनुसार जल्द ही प्याज की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने पर चर्चा की उम्मीद है।
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बता दें कि सरकार ने पिछले दिनों प्याज खरीद की कीमत बढ़ाकर ₹21.25 प्रति किलोग्राम कर दी, साथ ही प्याज खरीद के समय को 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया।
किसान नहीं बेचना चाहते प्याज
महाराष्ट्र प्याज किसान संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने मीडिया से कहा कि “जब छोटे किसानों के पास स्टोरेज की क्षमता और आवश्यक सुविधाएं नहीं थीं और वे कम कीमत पर प्याज बेचने को मजबूर थे, तब सरकार ने खरीद शुरू नहीं की। अब जब सरकार प्याज खरीदना चाहती है, किसान बेचना नहीं चाहते क्योंकि उन्हें मंडियों में अधिक कीमत मिल रही है। सरकार द्वारा दी जाने वाली खरीद कीमतें बाजार में चल रही कीमतों से कम रही हैं।”