Lab Grown Gold: अब लैब में तैयार होगा सोना, कितना होगा शुद्ध और कितनी होगी कीमत? समझ लीजिए
लैब में बने सोने पर चर्चा तेज है, जो रासायनिक और भौतिक रूप से खदान से निकले सोने जैसा ही होगा। यह कोई नकली चीज नहीं, बल्कि असली सोना है जिसे नियंत्रित ...और पढ़ें

लैब में सोना बनाने की चल रही तैयारी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। आपने लैब में बने हीरे यानी डायमंड के बारे में जरूर सुना होगा। मगर क्या आप जानते हैं कि अब मार्केट में लैब में बना सोना (Lab-Grown Gold) पेश किए जाने की तैयारी है। लैब में बने सोने को लेकर चर्चा तेज हो गयी है, मगर अभी ये डेवलपमेंट प्रोसेस में है। लैब में बने सोने को लेकर आपके जहन में कई तरह के सवाल आ सकते हैं। जैसे कि क्या यह खदान से निकले सोने जैसा ही होगा? क्या यह सुरक्षित निवेश होगा? सबसे अहम सवाल कि इसकी कीमत क्या होगी? आइए जानते हैं।
कैसे लैब में तैयार हो रहा सोना?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लैब में तैयार सोना, केमिकली और फिजिकली खदान से निकाले गए सोने जैसा ही होगा, लेकिन असल अंतर इसके बनाने की प्रोसेस में है। जमीन से सीधे खुदाई करके सोना निकालने के बजाय, अब वैज्ञानिक कंट्रोल्ड लैबोरेट्रीज में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके सोना बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
इसलिए, यह सोना न तो 'गोल्ड-प्लेटेड' होगा और न ही इसमें सोने की सिर्फ फिलिंग होगी। यह कोई नकली चीज भी नहीं है। यह असली सोना ही होगा, बस इसे एक अलग तरीके से बनाया जाएगा।
लैब में सोना बनाने के दो तरीके
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लैब में सोना बनाने के अभी दो मुख्य तरीके सामने आए हैं। पहला है एटोमिक-लेवल पर बनाना, जिसमें एडवांस्ड पार्टिकल तकनीक का इस्तेमाल करके सोने के एटम बनाए या अलग किए जाते हैं। लेकिन यह तरीका अभी भी सीमित है, क्योंकि यह बहुत महंगा है।
दूसरा तरीका है सोने की रिकवरी और उसे शुद्ध करने की तकनीक, जिसमें कंपनियाँ रीसायकल किए गए सोने का इस्तेमाल करके, लैब में कंट्रोल्ड प्रोसेसेज के जरिए उसे इतना शुद्ध करती हैं कि वह बहुत अधिक शुद्धता के स्तर तक पहुँच जाए।
कितनी होगी कीमत?
माना जा रहा है कि फिलहाल लैब में बनाए गए सोने के लिए भारी मात्रा में प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, जो अभी भी डेवलपमेंट के फेज में है। बाद में कीमतों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि भविष्य में प्रोडक्शन ज्यादा कुशल हो जाएगा।
अगर इसकी रीसेल वैल्यू की बात की जाए, तो यह समझना जरूरी है कि सोने की कीमत उसके वजन, शुद्धता और मार्केट में सोने की कीमत पर आधारित होती है। अगर लैब में बना सोना भी शुद्धता के उन्हीं मानकों को पूरा करता है, तो उसकी कीमत भी खदान से निकाले गए सोने के बराबर ही होगी, और इस तरह वह रीसेल मार्केट में भी उपलब्ध होगा।
हालाँकि, लेबलिंग में अंतर को समझने में थोड़ा समय लगेगा।