बारिश और जंग की दोहरी मार: किसानों से 50 पैसे प्रति किलो खरीदी जा रही प्याज, मुआवजा और ₹3500 प्रति क्विंटल MSP की उठी मांग
महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और पश्चिम एशिया युद्ध के कारण प्याज की कीमतें गिर गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसान न्यूनतम समर्थन मूल ...और पढ़ें

प्याज किसानों का हुआ बुरा हाल

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के प्याज वाले इलाके में पहले बारिश हुई और फिर पश्चिम एशिया युद्ध से कई दिक्कतें आईं। नतीजे में प्याज की कीमतें धड़ाम से गिर गईं। बारिश के कारण फसलें सड़ गईं और किसानों को भारी नुकसान हुआ। नासिक, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर में, प्याज उगाने वाले किसानों को इस सीजन में काफी घाटा झेलना पड़ रहा है, क्योंकि कृषि उपज मंडी समितियों (APMCs) में थोक कीमतें उत्पादन लागत से भी बहुत नीचे गिर गई हैं। जी हां, प्याज की कीमत इन मंडी समितियों में 1 रुपये प्रति किलो तक गिर गई है।
संकट में प्याज किसान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार छत्रपति संभाजीनगर के पैठन तालुका के एक किसान पिछले हफ्ते अपनी 1,262 किलोग्राम प्याज बाजार ले गए। मजदूरी, लोडिंग और ट्रांसपोर्ट का खर्च काटने के बाद हिसाब में आया कि उन्हें व्यापारी को 1 रुपया देना है।
दरअसल उनकी फसल की कीमत 1 रुपये प्रति किलो लगाई गई। इस तरह उनकी 1262 किलो प्याज का रेट हुआ 1262 रुपये। एपीएमसी ने उनसे चार्ज किए 1263 रुपये, तो उन्हें 1262 किलो प्याज पर उल्टे 1 रुपये का घाटा हुआ।
50 पैसे प्रति किलो लगाया भाव
इसी ततरह नासिक जिले की सतना APMC में एक किसान अपनी 30 क्विंटल उपज लेकर आए, इस उम्मीद में कि उन्हें अपनी लागत का कम से कम कुछ हिस्सा तो वापस मिल ही जाएगा। व्यापारियों ने पहले 50 रुपये प्रति क्विंटल (50 पैसे प्रति किलो) का भाव लगाया। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो भाव बढ़कर 175 रुपये प्रति क्विंटल — यानी 1.75 रुपये प्रति किलोग्राम — हो गया।
इस किसान ने कहा, “फसल उगाने में मेरा प्रति क्विंटल 1,200 रुपये का खर्च आया। बिक्री, मजदूरी और ढुलाई का खर्च निकालने के बाद मेरे पास सिर्फ 500 रुपये बचे। कुल नुकसान 36,000 रुपये का हुआ।”
बढ़ गए खेती वाले उत्पादों के दाम
गौरतलब है कि खेती में लगने वाली चीजें महँगी हो गई हैं। इनमें बीज, खाद, डीजल, मशीनों से खेती और मजदूरी शामिल हैं। इन सबकी कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं, जबकि बाजार में कीमतें एकदम नीचे गिर गई हैं। पुणे जिले के एक किसान के अनुसार उनकी फसल 4-5 प्रति किलो पर बिक रही है, जबकि उगाने की लागत प्रति किलो 12 रुपये से अधिक है।
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फरवरी से लगातार गिर रहे दाम
मंडियों में प्याज के दाम इस साल फरवरी से लगातार गिर रहे हैं। नासिक के लासलगांव APMC में, जो देश की सबसे बड़ी प्याज की थोक मंडी है और राष्ट्रीय कीमतों के लिए एक पैमाना मानी जाती है, प्याज अभी 400 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रही है। यहाँ आने वाला लगभग 80% प्याज 800 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम कीमत पर बिक रहा है।
वहीं सोलापुर APMC में, 13 मई को प्याज की आवक 14,756 क्विंटल तक पहुँच गई। कीमतें 100 से 1,700 रुपये प्रति क्विंटल, यानी 1 से 17 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहीं। एक साल पहले, वहाँ प्याज 2,500 से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रहा था।
क्यों गिर रही प्याज की कीमत?
जानकारों का मानना है कि भारी आवक, घरेलू मांग में कमी, निर्यात में रुकावटें और बारिश से खराब हुई फसल का मंडियों में भर जाना इसका मुख्य कारण हैं। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनावों ने एक्सपोर्ट मार्केट को प्रभावित किया और विदेशों में प्याज की मांग को कम कर दिया है।
साथ ही 19 से 21 मार्च के बीच हुई बेमौसम बारिश ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचया। जैसे ही गर्मियों की प्याज की कटाई शुरू हुई, नासिक जिले में जोरदार बारिश हुई, जिससे तैयार फसल खराब हो गई और भंडारण के दौरान प्याज सड़ने लगी।
क्या है किसानों की मांग?
किसान मांग कर रहे हैं कि प्याज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के दायरे में लाया जाए, और इसकी कीमत 3,500 रुपये प्रति क्विंटल तय की जाए। किसानों के संगठन चाहते हैं कि महाराष्ट्र सरकार, किसानों को उनकी फसल कम दाम पर बेचने (डिस्ट्रेस सेल) के बदले 1,500 रुपये प्रति क्विंटल का मुआवजा दे।