आम रस-मैंगो शेक में 25% असली आमों का पल्प डालना होगा जरूरी, मिलावट करने वालों पर बढ़ेगा GST!
केंद्र सरकार की एक समिति ने आम से बने पेय पदार्थों में 22-25% असली आम का गूदा अनिवार्य करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य तोतापुरी आम के किसानों को ...और पढ़ें
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आम रस में 25% पल्प डालना जरूरी होग
HighLights
पेय पदार्थों में 22-25% असली आम गूदा अनिवार्य होगा।
मानक पूरा करने पर 5% रियायती GST स्लैब मिलेगा।
किसानों को तोतापुरी आम का बेहतर मूल्य मिलेगा।
नई दिल्ली| आम से बनने वाले पेय पदार्थ इन दिनों देश के हर बाजार में आसानी से मिल जाएंगे। मैंगो शेक, मैंगो लस्सू और आम रस जैसी कई चीजें हैं जो मार्केट में उपलब्ध हैं। हालांकि बाजारों में बिकने वाले इन आम पेय पदार्थों में आम के गूदे नाममात्र के ही होते हैं, बाकि अन्य चीजें मिलाकर इन्हें तैयार किया जाता है। अब केंद्र सरकार की एक समिति ने इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है।
25 फीसदी असली आम के गूदे जरूरी
केंद्र सरकार की एक विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया है कि आम वाले पेय पदार्थ में 22-25 प्रतिशत असली प्राकृतिक आम का गूदा (पल्प) होना अनिवार्य किया जाए। साथ ही, पांच प्रतिशत माल एवं सेवा कर (GST) का रियायती स्लैब सिर्फ उन्हीं उत्पादों के लिए हो जो इस मानक को पूरा करते हों। इस कदम का मकसद तोतापुरी आम के पल्प की मांग को बढ़ाना और किसानों को मिलने वाली कीमतों में सुधार करना है।
कृषि मंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट
लखनऊ में ICAR-सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) के निदेशक, टी. दामोदरन की अध्यक्षता वाली समिति ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में अपनी रिपोर्ट सौंपी। मंत्री ने अधिकारियों को इन सुझावों पर अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया है।
समिति को इस मौसम में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक (जो इस फसल के मुख्य उत्पादक राज्य हैं) में तोतापुरी आम की कीमतों में आई भारी गिरावट का अध्ययन करने का काम सौंपा गया था। दामोदरन ने इस गिरावट के लिए प्रसंस्करण क्षमता और खरीद के समय में तालमेल की कमी, घरेलू स्तर पर बिकने वाले पेय में पल्प की कम मात्रा और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव को जिम्मेदार ठहराया।
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कम पल्प पर अधिक GST
समिति का मुख्य सुझाव पेय उद्योग के टैक्स को असल फल की मात्रा से जोड़ना है। जिन उत्पादों में ‘पल्प’ की मात्रा तय सीमा से कम होगी, उन पर ज्यादा जीएसटी लगेगा, जबकि नियमों का पालन करने वाले उत्पादों पर 5% का रियायती स्लैब लागू रहेगा। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इस तरीके से तोतापुरी पल्प की खपत बढ़ने और ग्राहकों को मिलने वाले पेय की पोषक तत्वों की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
किसानों को मिलेगी आर्थिक मजबूती
इसे लागू करने के लिए FSSAI, जीएसटी परिषद और वित्त, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कृषि और स्वास्थ्य मंत्रालयों के साथ एक अंतर-मंत्रालयी बैठक बुलाई जाएगी, ताकि मानकों और कर ढांचे को अंतिम रूप दिया जा सके। इसका उद्देश्य आम उत्पादकों को सही कीमत देकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूक बनाना है।