अब Poultry Sector से आई बुरी खबर! महंगाई बढ़ने से पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन ने उठाया बड़ा कदम, घटेगा पोल्ट्री उत्पादन
सोयामील की बढ़ती कीमतों के कारण ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन ने पोल्ट्री उत्पादन में 25% की कटौती का फैसला किया है। इससे घरेलू बाजारों में भी ...और पढ़ें
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सोयाबीन मील की कीमत बढ़ने से पोल्ट्री सेक्टर में दबाव बढ़ा (AI Image)
HighLights
पोल्ट्री उत्पादन में 25% की कटौती का निर्णय।
सोयाबीन मील की कीमतों में 40% से अधिक वृद्धि।
पैरेंट ब्रीडर स्टॉक को भी हटाया जा रहा है।
नई दिल्ली| भारत के सोयामील की कीमतें बढ़ने से जहां एक ओर विदेशों में उसे खदीदार मिलना एक चुनौती हो गई है, तो वहीं दूसरी ओर घरेलू बाजारों में भी इसका असर देखने को मिला है। सोयाबीन और उससे बने उत्पादों की कीमतों में उछाल के चलते ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन (AIPBA) ने एक बैठक में पोल्ट्री उत्पादों को 25 फीसदी तक घटाने का फैसला लिया है। बता दें कि सोयाबीन पोल्ट्री सेक्टर के मुख्य फीड में शामिल है।
पोल्ट्री सेक्टर ने क्यों लिया फैसला?
AIPBA के बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन बहादुर अली ने की। इस दौरान एसोसिएशन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उद्योग ने तत्काल प्रभाव से पोल्ट्री उत्पादन में 25 प्रतिशत की कमी करने का निर्णय लिया है। उन्होंने ये भी कहा कि सोयाबीन मील की कीमतों में पिछले एक महीने में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जिससे पूरे देश में मुर्गी पालकों के लिए चारे की लागत में काफी वृद्धि हुई है और मुनाफा कम हो गया है।
"उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ सावन, नवरात्रि और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के कारण जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के महीनों में चिकन की खपत में गिरावट को देखते हुए, उद्योग ने तत्काल प्रभाव से पोल्ट्री उत्पादन में 25 प्रतिशत की कमी करने का निर्णय लिया है।
ब्रीडर स्टॉक में भी की जा रही कटौती
इंडस्ट्री ने ये भी जानकारी दी कि कि उत्पादन में 25 फीसदी कटौती के इस फैसले के तहत देशभर में पैरेंट ब्रीडर स्टॉक (प्रजनन के लिए रखे गए पक्षियों) को हटाना शुरू कर दिया गया है। उद्योग के अनुसार, पहले जिन ब्रीडर पक्षियों की बिक्री करीब 140 रुपये प्रति पक्षी के आसपास हो रही थी, अब अतिरिक्त स्टॉक को खत्म करने की जल्दबाजी में उन्हें करीब 65 रुपये प्रति पक्षी तक बेचा जा रहा है।
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घरेलू स्टॉक होने के बाद भी कीमतें बढ़ी हैं
बैठक में मौजूद उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि देश में जरूरत के हिसाब से पर्याप्त उत्पादन उपलब्ध है, लेकिन उसके बावजूद सोयाबीन की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कीमतों में तेजी के पीछे जमाखोरी और सट्टा गतिविधियां मुख्य कारण हो सकती हैं।
इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि NAFED के सोयाबीन स्टॉक की बिक्री के दौरान सीमित समूहों की गतिविधियों से भी बाजार प्रभावित हुआ है, और इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने उठाने की बात कही।