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    प्राइवेट कर्मचारियों के बच्चों की देखभाल का 'खर्च' कंपनी को उठाना होगा! नए लेबर कोड में बड़ा एलान

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 11:27 AM (IST)

    नए लेबर कोड के तहत 50 या अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को अब 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्रेच सुविधा देनी होगी, जो जेंडर-न्यूट्रल होगी। ...और पढ़ें

    नए लेबर कोड में बड़ा बदलाव अब सभी कर्मचारियों के बच्चों के लिए क्रेच सुविधा अनिवार्य

    नए लेबर कोड में बड़ा बदलाव अब सभी कर्मचारियों के बच्चों के लिए क्रेच सुविधा अनिवार्य

    HighLights

    1. 50+ कर्मचारियों वाली कंपनियों को क्रेच सुविधा अनिवार्य।

    2. क्रेच सुविधा अब सभी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध।

    3. सुविधा न होने पर ₹500 मासिक भत्ता संभव।

    नई दिल्ली। काम करने वाले माता-पिता के लिए करियर और बच्चों की परवरिश के बीच संतुलन बनाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। इस दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, नए लेबर कोड के तहत वर्कप्लेस पर बच्चों की देखभाल (क्रेच सुविधा) से जुड़े नियमों को ज़्यादा व्यापक और लचीला बनाया गया है।

    'सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 (COSS)' और 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड (OSHWC), 2020' के साथ-साथ श्रम मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरणों के अनुसार, जिन संस्थानों में 50 या उससे ज़्यादा कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें छह साल से कम उम्र के कर्मचारियों के बच्चों के लिए क्रेच (बच्चों की देखभाल की सुविधा) की सुविधा देनी ज़रूरी है। यह सुविधा ऑफिस परिसर से एक किलोमीटर के दायरे में होनी चाहिए। कानून कंपनियों को यह भी इजाज़त देता है कि वे क्रेच की सुविधा या तो अकेले चलाएं या फिर दूसरे संस्थानों के साथ मिलकर एक साझा सुविधा के तौर पर चलाएं।

    क्या इसका फ़ायदा सिर्फ़ महिलाओं को ही मिलेगा?

    एक अहम बदलाव के तहत, क्रेच (बच्चों की देखभाल की सुविधा) की सुविधा अब सिर्फ़ महिलाओं तक सीमित नहीं है। 16 मार्च, 2026 को श्रम और रोज़गार मंत्रालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, OSHWC कोड के तहत क्रेच की सुविधा सभी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है, चाहे उनका जेंडर कुछ भी हो। हालाँकि सोशल सिक्योरिटी कोड के कुछ प्रावधानों में 'महिला', 'विधुर' और 'सिंगल पेरेंट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इंडस्ट्री में इन प्रावधानों को जेंडर-न्यूट्रल (स्त्री-पुरुष के भेद से मुक्त) बनाने की माँग बढ़ रही है।

    क्रेच सुविधा के बदले भत्ता

    अगर कोई कंपनी असल में क्रेच की सुविधा नहीं दे पाती है, तो वह कर्मचारियों की सहमति से नकद क्रेच भत्ता दे सकती है। जो कि कम से कम ₹500 प्रति बच्चा, हर महीने हो सकती है। इसके लिए योग्यता सिर्फ दो बच्चों तक के लिए (जुड़वां बच्चों के मामले में अपवाद हो सकते हैं) होगी।

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    कामकाजी माताओं के लिए अतिरिक्त फायदे

    • दिन में चार बार क्रेच जाने की अनुमति (आराम के समय सहित)।
    • बच्चे के 15 महीने का होने तक रोज़ाना दो बार नर्सिंग ब्रेक (हर बार 15 मिनट)।
    • क्रेच आने-जाने के लिए अतिरिक्त समय (15 मिनट तक)।

    क्रेच (बच्चों की देखभाल के केंद्र) के लिए मानक और सुरक्षा

    कंपनियों के लिए न केवल जगह उपलब्ध कराना जरूरी है, बल्कि सुरक्षा और साफ़-सफ़ाई के मानकों का पालन करना भी ज़रूरी है। इनमें CCTV निगरानी, स्टाफ़ का पुलिस वेरिफिकेशन, हवा-पानी की उचित व्यवस्था, फ़र्स्ट-एड की सुविधा और बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित जगह शामिल होनी चाहिए।

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