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    EPFO FAQs: भूलकर भी ना करें ये गलती! PF का पैसा निकालकर Mutual Funds में लगाना पड़ सकता है भारी, बड़ी चेतावनी

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 11:39 AM (IST)

    EPFO FAQs: ईपीएफओ ने पीएफ का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड में निवेश करने के खिलाफ चेतावनी दी है, इसे केवल निवेश नहीं बल्कि एक सामाजिक सुरक्षा योजना बताया ...और पढ़ें

    EPFO VS Mutual Funds

    EPFO VS Mutual Funds

    HighLights

    1. ईपीएफओ ने पीएफ को सामाजिक सुरक्षा योजना बताया, निवेश नहीं।

    2. पीएफ सेवानिवृत्ति, पेंशन, बीमा और टैक्स लाभ प्रदान करता है।

    3. म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़ा है, रिटर्न की गारंटी नहीं।

    नई दिल्ली: अगर आप ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में अपना EPF (Provident Fund) का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में निवेश (Invest) करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर जरूर पढ़ लें। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरीपेशा लोगों को साफ चेतावनी दी है कि EPF और Mutual Fund एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं। EPFO का कहना है कि PF केवल निवेश नहीं बल्कि एक सोशल सिक्योरिटी स्कीम (Social Security Scheme) है, जो रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा (Financial safety), पेंशन (Pension), बीमा (Insurance) और टैक्स लाभी भी देती है।

    EPFO ने दी चेतावनी?

    EPFO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी संदेश में कहा है कि " समझदार को EPF काफी है।" संगठन का कहना है कि PF का उद्देश्य केवल पैसा जमा करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों को रिटायरमेंट (Retirement) के बाद वित्तीय सुरक्षा देना है। दूसरी ओर Mutual Funds बाजार से जुड़ा निवेश है, जहां रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए दोनों की तुलना करना सही नहीं है।

    EPFO और म्यूचुअल फंड में क्या है बड़ा अंतर?

    EPF Mutual Funds
    रिटायरमेंट और सामाजिक सुरक्षा के लिए योजना
    संपत्ति (Wealth) बनाने का निवेश विकल्प
    कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं
    केवल निवेशक पैसा लगाता है
    सरकार द्वारा तय ब्याज मिलता है
    बाजार के प्रदर्शन पर रिटर्न निर्भर
    जोखिम काफी कम
    बाजार जोखिम के कारण रिटर्न घट-बढ़ सकता है
    पेंशन, बीमा और टैक्स लाभ भी मिलते हैं
    सामान्य तौर पर ऐसी सुविधाएं नहीं मिलतीं

    EPF के बड़े फायदे

    1. रिटायरमेंट फंड: नौकरी के दौरान जमा रकम भविष्य के लिए मजबूत बचत बनाती है।
    2. Employer का योगदना: आपकी जमा राशि के साथ कंपनी भी योगदान कराती है।
    3. EPS का लाभ: कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन मिलती है।
    4. EDLI बीमा: कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को 7 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिल सकता है।
    5. टैक्स लाभ: तय शर्तों के तहत जमा राशि, ब्याज और निकासी पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है।

    म्यूचुअल फंड कब बेहतर विकल्प है?

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपकी नियमित बचत PF से अलग है और आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं तथा बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम उठा सकते हैं, तो अतिरिक्त रकम को Mutual Funds में निवेश किया जा सकता है। लेकिन रिटायरमेंट के लिए जमा PF राशि निकालकर म्यूचुअल फंड में लगाना समझदारी नहीं मानी जाती।

    क्या होनी चाहिए सही रणनीति?

    वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:

    * रिटायरमेंट की सुरक्षा के लिए EPF को कभी कमजोर न करें।
    * PF को अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग की मजबूत नींव बनाए रखें।
    * यदि अतिरिक्त बचत है, तो अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार उसे Mutual Fund में निवेश करें।
    * यानी EPF और Mutual Fund दोनों का संतुलित इस्तेमाल लंबी अवधि में बेहतर रणनीति हो सकती है।

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