FD vs Liquid Fund: शॉर्ट टर्म के लिए निवेश करने हैं ₹1 लाख, तो एफडी या लिक्विड फंड, कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न?
महंगाई के दौर में कम समय के लिए निवेश करने वालों के लिए एफडी और लिक्विड फंड दो लोकप्रिय विकल्प हैं। लिक्विड फंड शॉर्ट-टर्म एफडी की तुलना में बेहतर रिट ...और पढ़ें

शॉर्ट टर्म के लिए निवेश करने हैं ₹1 लाख, तो एफडी या लिक्विड फंड, कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न (AI Generated Image)
HighLights
शॉर्ट-टर्म एफडी पर ब्याज दरें काफी कम होती हैं।
लिक्विड फंड शॉर्ट-टर्म एफडी से बेहतर रिटर्न देते हैं।
लिक्विड फंड में तरलता और टैक्स लाभ अधिक है।
नई दिल्ली। आज के जमाने में जहां महंगाई अपने चरम पर है, हर कोई कुछ पैसा बचाकर निवेश करना चाहता है, ताकि उसे आगे चलकर अच्छा रिटर्न मिल सके। ऐसे में लोगों के पास कई सारे ऑप्शन हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म के लिए देखें तो एफडी और लिक्विड फंड काफी ज्यादा पॉपुलर हैं।
पहले का दौर देखें तो पहले सेविंग्स अकाउंट पर ही अच्छा रिटर्न मिल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। और ऐसे में लोग एफडी जैसी चीजों में पैसा लगााने का सोचते हैं। आइए आज जानते हैं कि एफडी और लिक्विड फंड में कौन आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
FD में निवेश करना कितना फायदेमंद?
बैंक अक्सर ऊंचे ब्याज का दावा करते हैं, लेकिन मालूम हो कि वे आकर्षक दरें लंबी अवधि (Long tenure) के लिए होती हैं। अगर आप सिर्फ 1 से 3 महीने के लिए FD कराते हैं, तो देश के बड़े बैंकों की ब्याज काफी ज्यादा अलग हो सकती है।
बड़े बैंकों की शॉर्ट-टर्म FD दरें:
| समय (Tenure) | SBI | HDFC Bank | ICICI Bank |
| 7 से 45 दिन | 3.05% | 3.25% | 2.75% |
| 46 to 90 दिन | 4.90% | 4.25% | 4.00% |
आंकड़ों से साफ है कि बड़े बैंक शॉर्ट-टर्म FD पर औसतन 2.75% से 4.90% का ही ब्याज इस समय मिल रहा है। यानी कि अगर आप ₹1 लाख की FD 30 दिनों के लिए करते हैं, तो आपको मुश्किल से ₹230 से ₹270 का ब्याज मिलेगा। देखा जाए तो ये मुनाफा एक दम न के बराबर है।
लिक्विड फंड में निवेश करना कितना सही?
अगर आप बैंक FD से बचना चाहते हैं, तो 'लिक्विड फंड' एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। ये एक तरह का डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Fund) होता है, जो आपका पैसा सुरक्षित और कम जोखिम वाले सरकारी और कॉरपोरेट बांड्स में लगाता है, जिनकी मच्योरिटी अधिकतम 91 दिनों की होती है।
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क्योंकि लिक्विड फंड्स ट्रेजरी बिल (T-bills), सरकारी सिक्योरिटीज और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट्स (CDs) जैसी अलग-अलग जगहों पर पैसा लगाते हैं, इसलिए यहां आपका रिस्क बहुत कम हो जाता है। इनका मुख्य मकसद आपके पैसे को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर तुरंत कैश (Liquidity) उपलब्ध कराना है।
रिटर्न के मामले में कौन है आगे?
अगर रिटर्न की बात करें, तो लिक्विड फंड्स काफी फायदेमंद दिखाई पड़ते हैं। जून 2026 की शुरुआत के आंकड़ों के मुताबिक, लिक्विड फंड्स ने एवरेज पिछले 1 महीने में 0.50% और 3 महीने में 1.68% का एब्सोल्यूट (Absolute) रिटर्न दिया है।
अगर आप ₹1 लाख किसी अच्छे लिक्विड फंड में 1 महीने के लिए रखते हैं, तो औसतन ₹500 की कमाई होती है। वही पैसा 3 महीने के लिए रखने पर करीब ₹1,680 का रिटर्न मिलता है, जो शॉर्ट-टर्म बैंक FD से कहीं बेहतर है।
दोनों में क्या है अंतर?
नियमों के हिसाब से, लिक्विड फंड से होने वाली कमाई पर टैक्स आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से ही लगता है (जैसे बैंक FD में)। लेकिन बड़ा अंतर ये है कि लिक्विड फंड में टैक्स तब तक नहीं देना होता जब तक आप पैसा निकाल कर प्रॉफिट बुक नहीं करते, जबकि बैंक FD में बिना पैसा निकाले भी हर साल टैक्स बनता रहता है।
लिक्विड फंड्स में निवेश करने के शुरुआती 6 दिनों के भीतर पैसा निकालने पर बहुत मामूली सा एग्जिट लोड (Exit Load) लगता है। लेकिन 7वें दिन के बाद ये पूरी तरह फ्री हो जाता है। यानी आप जब चाहें अपना पूरा पैसा बिना किसी जुर्माने या कटौती के निकाल सकते हैं, जो कि बैंक एफडी में नहीं होता है।